व्हाट्सएप शेयर मार्केट स्कैम: पूर्व CBI अधिकारी की पत्नी से 2.58 करोड़ की ठगी
Digital Fraud: ‘Hi! क्या आप शेयर मार्केट में 500% रिटर्न चाहते हैं?’ एक साधारण सा मैसेज व्हाट्सएप पर आया. सामने था भरोसेमंद दिखने वाला ग्रुप. नाम था स्टॉक मार्केट प्रॉफिट गाइड. अंदर लोग मुनाफे के स्क्रीनशॉट डाल रहे थे. करोड़ों की कमाई का भरोसा ऐसा कि शक की गुंजाइश ही नहीं लगी. लेकिन यही एक मैसेज, कुछ ही दिनों में देश के सबसे हाई-प्रोफाइल परिवारों में से एक को 2.5 करोड़ रुपए की चपत लगा गया.
हैरानी की बात यह है कि इस बार शिकार कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि पूर्व CBI जॉइंट डायरेक्टर और रिटायर्ड IPS अधिकारी वी.वी. लक्ष्मी नारायण की पत्नी उर्मिला बनीं. यानी कानून और जांच एजेंसियों से जुड़ा परिवार भी साइबर ठगों के जाल से नहीं बच सका. सिर्फ 12 दिनों में बिना किसी हथियार के, बिना धमकी के, सिर्फ लालच और भरोसे के जरिए करोड़ों रुपए उड़ा दिए गए.
क्या है पूरा मामला?
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार यह मामला हैदराबाद के पॉश इलाके बंजारा हिल्स से जुड़ा है. नवंबर 2025 में उर्मिला को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया. ग्रुप का नाम था ‘tock Market Profit Guide Exchange 20’. ग्रुप में खुद को इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट बताने वाला दिनेश सिंह लगातार शेयर बाजार में मोटे मुनाफे के दावे कर रहा था. ग्रुप में मौजूद अन्य सदस्य भी रोजाना भारी कमाई के स्क्रीनशॉट साझा करते थे. कोई 20 लाख का प्रॉफिट दिखाता, कोई 50 लाख का. माहौल ऐसा बनाया गया कि यह सब बिल्कुल असली लगे.
कैसे बुना गया ठगी का जाल
साइबर ठगों ने इस स्कैम को बेहद पेशेवर तरीके से अंजाम दिया. पहले भरोसा बनाया गया. फिर लालच बढ़ाया गया. फिर टेक्नोलॉजी का सहारा लिया गया. उर्मिला को ऐप स्टोर से ‘MCKIEY CM’ नाम का एक ऐप डाउनलोड कराया गया. ऐप दिखने में पूरी तरह प्रोफेशनल था. उसमें रियल टाइम प्रॉफिट दिख रहा था. ऐप पर निवेश बढ़ता गया. मुनाफा करोड़ों में दिखने लगा. लेकिन असल में वह सिर्फ एक डिजिटल छलावा था.
पूर्व CBI अधिकारी की पत्नी व्हाट्सएप निवेश स्कैम में फंसीं. (Image:AI)
12 दिन, 19 ट्रांजैक्शन और 2.58 करोड़ रुपए
24 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 के बीच उर्मिला ने कुल 19 अलग-अलग ट्रांजैक्शन किए. हर बार रकम बढ़ती गई. कभी लाखों में. कभी करोड़ के करीब. कुल मिलाकर 2.58 करोड़ रुपए ठगों के बताए गए खातों में ट्रांसफर हो गए. पैसे देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद म्यूल बैंक खातों में भेजे गए. ताकि ट्रैक करना मुश्किल हो जाए.
कब हुआ शक और कैसे खुला राज
पुलिस जांच में क्या सामने आया
साइबर क्राइम पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. शुरुआती जांच में सामने आया कि स्कैमर्स ने खुद को वैध दिखाने के लिए फर्जी SEBI सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया. कई फर्जी कंपनियों और डिजिटल वॉलेट्स के जरिए पैसा घुमाया गया. पुलिस अब जुड़े खातों को फ्रीज करने, मनी ट्रेल ट्रैक करने और आरोपियों की पहचान में जुटी है. यह जांच कई राज्यों तक फैल सकती है.
क्यों यह केस बेहद गंभीर है
यह मामला सिर्फ एक साइबर ठगी नहीं है. यह दिखाता है कि डिजिटल अपराधी अब किस स्तर तक पहुंच चुके हैं. वे न तो प्रोफेशन से डरते हैं, न रुतबे से. रिटायर्ड CBI अफसर का परिवार भी सुरक्षित नहीं रहा. यह केस इस बात की चेतावनी है कि ऑनलाइन निवेश में थोड़ा सा लालच कितनी बड़ी कीमत वसूल सकता है.
आम लोगों के लिए बड़ा सबक
यह घटना बताती है कि 500% रिटर्न, गारंटीड प्रॉफिट और व्हाट्सएप इन्वेस्टमेंट ग्रुप्स सबसे बड़े रेड फ्लैग हैं. SEBI-रजिस्टर्ड ब्रोकर कभी भी ऐसे तरीकों से निवेश नहीं कराते. कोई भी ऐप डाउनलोड करने से पहले उसकी पूरी जांच जरूरी है. CBI अफसर की पत्नी के साथ हुई यह ठगी एक हाई-प्रोफाइल साइबर क्राइम केस बन चुकी है. यह साफ करता है कि डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है. अगर शक हो तो तुरंत कार्रवाई करें. 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें. देर की कीमत करोड़ों में चुकानी पड़ सकती है.