जेब में नहीं थी फूटी कौड़यां, फिर भी मर्सिडीज से घूमता था शख्स, हर महीने खरीदता था नई कार, पुलिस ने खोल दिया राज | delhi police crime branch cyber cell vehicle loan fraud syndicate with mercedes 5 luxury car recovered

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Delhi Crime News: दिल्ली में अपराध की दुनिया के सफेदपोश ठगों के तरीके जानकर सब हैरान हैं. जेब में फूटी कौड़ियां नहीं, फिर भी मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz), टाटा अल्ट्रोज़ (Tata Altroz). मारुति ब्रेजा (Maruti Brezza), महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन (Scorpio-N) और टोयोटा हिल्क्स (Toyota Hilux) जैसे गाड़ियां रखता था. दिल्ली पुलिस की क्राइन ब्रांच और साइबर सेल ने मिलकर एक ऐसे सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंकों से करोड़ों रुपये का ‘व्हीकल लोन’ डकार रहा था. दिल्ली पुलिस ने अब इस पूरे गोरखधंधे की परतों को खोलकर रख दिया. इस कार्रवाई में पुलिस ने न केवल तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, बल्कि उनके पास से मर्सिडीज और स्कॉर्पियो-एन जैसी 5 लग्जरी गाड़ियां भी बरामद की हैं.

इस गैंग का मास्टरमाइंड अमन कुमार उर्फ राहुल कपूर उर्फ श्याम सुंदर है, जो तिलक नगर का रहने वाला है. अमन का तरीका इतना शातिर था कि बैंक के बड़े-बड़े अधिकारी भी मात खा जाते थे. वह एक ही फोटो का इस्तेमाल करके अलग-अलग नामों से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और फर्जी इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) तैयार करता था. जांच में सामने आया कि उसने राहुल कपूर और श्याम सुंदर जैसे कई नामों से बैंक खाते खोले. इन खातों का उपयोग बैंकों को यह विश्वास दिलाने के लिए किया जाता था कि वह एक संपन्न व्यक्ति है, ताकि उसे आसानी से भारी-भरकम व्हीकल लोन मिल सके.

दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन

25 दिसंबर 2025 को इंस्पेक्टर संदीप सिंह और इंस्पेक्टर विनय कुमार की टीम को एक गुप्त सूचना मिली थी कि दिल्ली में एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो फर्जी कागजों पर गाड़ियां फाइनेंस करा रहा है. एसीपी अनिल शर्मा की देखरेख में बनी इस टीम ने तकनीकी सर्विलांस और फील्डवर्क के जरिए जाल बिछाया. सबसे पहले अमन कुमार को दबोचा गया. उसकी निशानदेही पर जब छापेमारी हुई, तो पुलिस के भी होश उड़ गए.

कैसे शुरू हुआ खेल?

अमन के पास से फर्जी पहचान पत्र और लोन से जुड़े दर्जनों दस्तावेज बरामद हुए. पूछताछ में उसने कुबूल किया कि लोन की पहली या दूसरी किस्त देने के बाद वह जानबूझकर डिफॉल्ट (Default) कर जाता था, जिससे बैंक उसे एनपीए (NPA) घोषित कर देते थे. इसके बाद वह उन गाड़ियों को दूसरे राज्यों में ले जाकर बेच देता था. अमन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया और नजफगढ़ के रहने वाले धीरज उर्फ आलोक को गिरफ्तार किया.

फर्जी आधार, पेन कार्ड और फोटो

धीरज भी इसी तरह की कार्यप्रणाली अपनाता था. लेकिन सवाल यह था कि इतने सटीक फर्जी आधार कार्ड और सरकारी दस्तावेज बन कहां रहे थे? जांच की सुई नजफगढ़ के ‘साईं दस्तावेज केंद्र’ पर जाकर रुकी. पुलिस ने इस सेंटर के मालिक नरेश कुमार को गिरफ्तार किया. नरेश के पास से आई स्कैनर (Eye Scanner), बायोमेट्रिक स्कैनर, वेब कैमरा और पीवीसी कार्ड बनाने वाली मशीन बरामद हुई. यह वही जगह थी जहां सरकारी रिकॉर्ड में सेंध लगाकर फर्जी पहचान पत्र तैयार किए जा रहे थे.

बरामदगी और बरामद लग्जरी गाड़ियां क्राइम ब्रांच ने इस पूरे ऑपरेशन के दौरान कुल 5 गाड़ियां बरामद की हैं, जो इस सिंडिकेट के पास थीं. इनमें शामिल हैं:

मर्सिडीज-बेंज (Mercedes-Benz)

टाटा अल्ट्रोज़ (Tata Altroz)

मारुति ब्रेज़ा (Maruti Brezza)

महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन (Scorpio-N)

टोयोटा हिल्क्स (Toyota Hilux)

इन गाड़ियों को आरोपियों ने अलग-अलग बैंकों को चूना लगाकर खरीदा था और इन्हें ठिकाने लगाने की फिराक में थे. डीसीपी क्राइम आदित्य गौतम के अनुसार, इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 318(4), 336, 338, 340, 112 और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है. यह खुलासा उन बैंकों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है जो बिना उचित फिजिकल वेरिफिकेशन के बड़े लोन पास कर देते हैं. पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस सिंडिकेट में बैंकों के कुछ कर्मचारी भी शामिल थे, जिन्होंने इन फर्जी दस्तावेजों को नजरअंदाज किया. फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और आगे की पूछताछ जारी है ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और अन्य ठगी गई गाड़ियों का पता लगाया जा सके.

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