IPAC Case ED Moves Supreme Court : IPAC केस में सुप्रीम कोर्ट पहुंची ED, जांच में रुकावट का आरोप लगा मांगी CBI जांच
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IPAC ED Raids: IPAC केस में ED ने सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 32 याचिका दाखिल की है. एजेंसी ने आरोप लगाया कि सीएम ममता बनर्जी ने रेड के दौरान अहम दस्तावेज हटाए. निष्पक्ष जांच में बाधा आने के कारण अब मामले की CBI जांच की मांग की गई है. हाईकोर्ट में हंगामे के बाद एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
कोलकाता: भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के सदस्यों ने शुक्रवार (9 जनवरी, 2026) को कोलकाता में I-PAC ऑफिस और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर ED की छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बर्ताव के खिलाफ प्रदर्शन किया. (PTI फोटो)नई दिल्ली: IPAC मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस पूरे विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. एजेंसी ने आर्टिकल 32 के तहत एक याचिका दायर की है. इस याचिका में ED ने उन सभी घटनाओं का विस्तार से जिक्र किया है जो अब तक जांच के दौरान घटी हैं. ED ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि राज्य की मशीनरी उसे निष्पक्ष जांच करने से रोक रही है. उनके जांच के अधिकार का हनन किया जा रहा है. मामला कोयला घोटाले से जुड़ा है जिसका पैसा एक विशेष कोल कंपनी में आने का दावा किया गया है.
IPAC कंपनी और कोयला घोटाले का क्या है असली कनेक्शन?
जांच एजेंसी का दावा है कि कोयला घोटाले की बड़ी रकम एक कोल कंपनी को भेजी गई थी. यह कंपनी IPAC से जुड़ी बताई जा रही है. इसी मनी ट्रेल का पीछा करते हुए ED की टीम ने कंपनी के परिसरों पर छापेमारी की थी. एजेंसी इस अवैध लेन-देन के पुख्ता सबूत जुटाना चाहती थी. इसी रेड के बाद से विवाद शुरू हुआ.
रेड के दौरान ममता बनर्जी ने कैसे ली दस्तावेजों में एंट्री?
ED ने अपनी याचिका में एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला दावा किया है. एजेंसी के अनुसार जब वे कंपनी के ठिकानों पर रेड कर रहे थे तब वहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहुंच गईं. आरोप है कि वह वहां से जांच से जुड़े अहम दस्तावेज अपने साथ ले गईं. ED का कहना है कि यह जांच प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप है.
हाईकोर्ट के हंगामे ने सुप्रीम कोर्ट जाने पर क्यों किया मजबूर?
ED सबसे पहले इस मामले को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट गई थी. वहां सुनवाई के दौरान भारी हंगामा और शोर-शराबा देखने को मिला. इस हंगामे की वजह से कोर्ट को सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टालनी पड़ी. जांच में हो रही देरी और राज्य के रवैये को देखते हुए एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया. अब इस मामले की CBI जांच की मांग की गई है.
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दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें