Shri Gavi Gangadhareshwara Swamy Temple On Makar Sankranti | मकर संक्रांति पर गवी गंगाधरेश्वर मंदिर में खुद सूर्यदेव करते हैं भगवान शिव का राजतिलक
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Gavi Gangadhareshwara Swamy Temple: मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी दिन गुरुवार को मनाया जाएगा. भगवान शिव के इस मंदिर नें सूर्यदेव खुद राजतिलक करते हैं और यह साल में एक बार होने वाला अद्भुत नजारा है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. आइए जानते हैं भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में…

<strong>Gavi Gangadhareshwara Swamy Temple Makar Sankranti:</strong> देश के हर हिस्से में भगवान शिव के कई चमत्कारी मंदिर मौजूद हैं, जहां भक्त अपने कष्टों से छुटकारा पाने के लिए आते हैं. बेंगलुरु में भगवान शिव का ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां मकर संक्रांति के मौके पर सूर्य निर्धारित समय पर शिवलिंग का तिलक करते हैं. यह साल में केवल एक होने वाला अद्भुत नजारा है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. मकर संक्रांति पर सूर्य जब शिवजी का रातिलक करते हैं, तब किसी जटिल ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम की जरूरत नहीं होती है. सूर्यदेव खुद शिवजी का राजतिलक करते हैं. मकर संक्रांति भारतीय सनातन परंपरा का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है. यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का सूचक है, जिसे उत्तरायण का आरंभ माना गया है. आइए जानते हैं भगवान शिवजी के इस मंदिर के बारे में…

हम बात कर रहे हैं गवी गंगाधरेश्वर मंदिर की, जहां विज्ञान पर आस्था भारी पड़ती दिखती है. कर्नाटक के बेंगलुरु गाविपुरम में महादेव को समर्पित गवी गंगाधरेश्वर मंदिर है, जिसे तीन हजार साल पुराना बताया जाता है. गवी का अर्थ है गुफा और गंगाधरेश्वर का अर्थ है महादेव. यहां बाबा गुफानुमा मंदिर के अंदर विराजमान हैं, लेकिन मकर संक्रांति के दिन यहां कुछ ऐसा होता है, जो साल में सिर्फ एक बार होता है.

मकर संक्रांति को शाम 5 बजे के आसपास जब सूरज ढलने की स्थिति में होता है, तब सूर्य की किरणें पहले मंदिर के बाहर लगे स्तंभों से टकराकर मंदिर के अंदर प्रवेश करती हैं और फिर नंदी महाराज के सींग को छूते हुए सीधे गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग को छूती हैं. यह नजारा साल में एक बार ही देखने को मिलता है, जब बाहर का प्रकाश मंदिर में इस तरीके से पहुंचता है. माना जाता है कि अपनी दिशा बदलने के साथ सूर्य भगवान महादेव का राजतिलक कर आशीर्वाद लेने आते हैं.
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गंगाधरेश्वर मंदिर की एक और खास बात है कि यहां भगवान शिव पर अर्पित किया गया दूध, छाछ या दही बन जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि मंदिर प्रशासन भगवान शिव पर चढ़ने वाले दूध का संग्रह करता है और उसका दही बनाकर प्रसाद स्वरूप अगले दिन भक्तों में वितरित कर देता है. मंदिर प्रशासन का मानना है कि वे किसी भी खाने की वस्तु को बर्बाद करने पर यकीन नहीं रखते हैं. मंदिर के इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा हर तरफ होती है.

मंदिर प्रशासन इस बात का भी ध्यान रखता है कि दूध में सिंदूर या कोई अन्य चीज ना मिले. स्वच्छता के साथ दूध को अलग किया जाता है और उसे फर्मेंट करके छाछ बना दिया जाता है. मंदिर से जुड़े लोग ही दूध का संग्रह करते हैं और स्वच्छ दूध से ही छाछ बनाते हैं. वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य धनु से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब से सूर्य उत्तर दिशा की ओर गति करता है. उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा गया है. यह काल सकारात्मकता, ऊर्जा और उन्नति का प्रतीक है.