खराब हिंदी की वजह से हाथ लगी ब्लॉकबस्टर फिल्म, 1 झटके में चमक गई तकदीर, अमर हो गया एक्टर का किरदार
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फिल्म जगत में पैर जमाने के लिए भाषा पर पकड़ होना जरूरी है, लेकिन एक एक्टर के साथ इसके उलट हुआ. उनकी टूटी-फूटी और खराब हिंदी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई, जिसकी वजह से एक्टर को ब्लॉकबस्टर फिल्म में ब्रेक मिला. तीन बड़े हीरो के बीच एक साइड रोल निभाने के बावजूद अभिनेता ने अपनी कॉमेडी और अनोखे अंदाज से पूरी महफिल लूट ली. फिल्म रिलीज होते ही एक्टर की तकदीर एक झटके में बदल गई. साइड रोल में एक्टर ने बड़ी पॉपुलैरिटी हासिल की और यहां तक कि किरदार अमर हो गया.

नई दिल्ली. माना जाता है कि सिनेमा की दुनिया में पहचान बनाने के लिए लीड रोल मिलना जरूरी है, क्योंकि मुख्य भूमिका ही एक्टर को असली शोहरत दिलाती है. हालांकि, ओमी वैद्य के मामले में यह बात गलत साबित हुई. उन्होंने अपनी फिल्म में तीन बड़े सुपरस्टार्स की मौजूदगी के बावजूद साइड रोल से ऐसी जबरदस्त छाप छोड़ी कि हर कोई उनका कायल हो गया.

आमिर खान की ‘थ्री इडियट्स’ में ओमी वैद्य का किरदार ‘चतुर रामलिंगम’ उर्फ ‘साइलेंसर’ आज भी उनकी सबसे बड़ी पहचान है, जिसने उन्हें रातों-रात अपार सफलता और लोकप्रियता दिला दी. आज यानी 10 जनवरी को ओमी वैद्य का जन्मदिन है. चलिए आपको उनके फिल्मी सफर के बारे में बताते हैं.

लॉस एंजेलिस में जन्मे ओमी वैद्य की परवरिश वहीं हुई थी, लेकिन वह बीच-बीच में भारत आते रहते थे. उनके पिता और भाई दोनों ही डॉक्टर थे और वे चाहते थे कि ओमी भी डॉक्टर बने, लेकिन ओमी की आंखों में एक्टिंग की चमक दौड़ रही थी.
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अपनी एक्टिंग को निखारने के लिए उन्होंने अमेरिका में थिएटर ज्वाइन किया और वह जब भी भारत आते थे, तो मराठी थिएटर में कुछ दिन जरूर बिताते थे. ओमी हमेशा हॉलीवुड में अपनी किस्मत आजमाना चाहते थे और उन्हें छोटे-मोटे रोल मिलने लगे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

ओमी को नहीं पता था कि एक मेगा फिल्म उनकी किस्मत को बदलने का इंतजार कर रही है. शादी में आए ओमी ने अपने दोस्त के कहने पर फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ के लिए ऑडिशन दिया था, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पहले एक्टर को राजू रस्तोगी का रोल ऑफर किया गया था, लेकिन उनकी टूटी-फूटी हिंदी ने सारा खेल बिगाड़ दिया.

ऑडिशन के दिन उन्हें राजू रस्तोगी की लाइनें पढ़ने के लिए कहा गया था, लेकिन उनके लिए शुद्ध हिंदी बोल पाना मुश्किल हो रहा था. एक्टर को लगने लगा कि उनका पत्ता साफ है, लेकिन कुछ दिनों बाद उन्हें फिल्म के डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने दोबारा बुलाया और ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ की स्क्रिप्ट पढ़ने को दी.

ओमी ने खुद इस बात का खुलासा इंटरव्यू में किया था कि संजय दत्त की लाइन इंसाफ और देश पर थी, लेकिन मैंने सब कुछ गलत पढ़ा और वहां बैठे सारे लोग हंसने लगे. राजू ने मेरी हिंदी की वजह से ही मुझे रोल ऑफर किया था, क्योंकि उन्हें ऐसे शख्स की तलाश थी, जिसे हिंदी बोलनी नहीं आती हो, लेकिन एक्टिंग आती हो.

उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें बार-बार निर्देश दिए गए कि वह हिंदी न सीखें और फिल्म की स्क्रिप्ट भी शूटिंग शुरू होने से तीन दिन पहले मिली थी. साल 2009 में रिलीज हुई थ्री इडियट्स बॉक्स ऑफिस पर बड़ी कामयाब साबित हुई और साथ ही ओमी वैद्य भी इस मूवी से घर-घर पहचाने जाने लगे. उनका साइलेंसर का किरदार अमर हो गया.