jimmy anderson exposed ashes trophy 968 रुपए 88 पैसे की ट्रॉफी को जीतने के लिए बहता है खून-पसीना

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jimmy anderson exposed ashes trophy जिमी एंडरसन के मुताबिक, सीरीज़ जीतने के बाद जब वो और स्पिनर ग्रैम स्वान ट्रॉफी लेकर जश्न मना रहे थे तो उन्होने ट्रॉफी के नीचे कुछ चिपका हुआ महसूस किया. जब दोनों ने ट्रॉफी को पलटा तो उस पर प्राइज टैग लगा हुआ था जो जल्दबाजी में नहीं हटाया गया था जिस पर लिखा था 7.99 पाउंड यानि 968 रुपए और 88 पैसे.

968 रुपए 88 पैसे की ट्रॉफी को जीतने के लिए बहता है खून-पसीनाजिमी एंडरसन का खुलासा, एशेज ट्रॉफी की कीमत सिर्फ 968 रुपए 88 पैसे

नई दिल्ली. गुरुवार को सिडनी में इंंग्लैंड को हराकर ऑस्ट्रेलिया ने एशेज पर कब्जा बरकार रखा.  एशेज को  अक्सर क्रिकेट की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित सीरीज़ कहा जाता है.  यह सिर्फ़ इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला जाने वाला मुकाबला नहीं, बल्कि डेढ़ सदी पुरानी प्रतिद्वंद्विता, राष्ट्रीय गौरव और खिलाड़ियों की मानसिक-शारीरिक सीमाओं की परीक्षा है. दिलचस्प तथ्य यह है कि जिस ट्रॉफी के लिए यह सब होता है, और जो खिलाड़ियों को जीत के बाद दी जाती है उसकी वास्तविक कीमत महज़ £7.99  पाउंड यानि लगभग 968 रुपये  आंकी जाती है इसके बावजूद एशेज की अहमियत किसी भी विश्व कप या आईसीसी ट्रॉफी से कम नहीं मानी जाती.

एशेज ट्रॉफी दरअसल एक छोटा सा कलश है, जिसे 1882 में इंग्लैंड की ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद प्रतीकात्मक रूप से बनाया गया था. इसमें कथित तौर पर जली हुई बेल्स (bails) की राख रखी गई है. आज जो ट्रॉफी विजेता टीम को दी जाती है, वह मूल urn की प्रतिकृति है, जबकि असली urn लॉर्ड्स के म्यूज़ियम में सुरक्षित है. क्रिकेट इतिहासकारों और इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया बोर्ड से जुड़े कई स्रोतों के अनुसार, इस ट्रॉफी की भौतिक कीमत बेहद मामूली है.  लेकिन एशेज का असली मूल्य परंपरा, इतिहास और प्रतिष्ठा में निहित है यही कारण है कि खिलाड़ी इसे करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनते हैं.

जिमी एंडरसन का खुलासा

इंग्लैंड के दिग्गज तेज़ गेंदबाज़ जिमी एंडरसन ने अपनी आत्मकथा “Finding the Edge” में 2009 की एशेज जीत के बाद का एक छोटा लेकिन अहम किस्सा साझा किया है एंडरसन के मुताबिक, सीरीज़ जीतने के बाद जब वो और स्पिनर ग्रैम स्वान ट्रॉफी लेकर जश्न मना रहे थे तो उन्होने ट्रॉफी के नीचे कुछ चिपका हुआ महसूस किया. जब दोनों ने ट्रॉफी को पलटा तो उस पर प्राइज टैग लगा हुआ था जो जल्दबाजी में नहीं हटाया गया था जिस पर लिखा था 7.99 पाउंड. यानि आज की कीमत के हिसाब से 968 रुपए 88 पैसे. 2009 की एशेज जीत के बाद इंग्लैंड टीम का ‘टीम टैग’ तक हटाना भूल जाना एक छोटी घटना लग सकती है, लेकिन यह एशेज की असली प्रकृति को उजागर करती है यह सीरीज़ खिलाड़ियों से सिर्फ़ प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनका सब कुछ मांग लेती है.

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ट्रॉफी की असली कीमत क्या है

एशेज ट्रॉफी की कम कीमत का उल्लेख अक्सर मज़ाक या हैरानी के तौर पर किया जाता है, लेकिन जिमी एंडरसन का यह किस्सा उस धारणा को तोड़ता है कि ट्रॉफी का महत्व उसकी कीमत से तय होता है. वास्तविकता यह है कि इस ट्रॉफी के लिए करियर दांव पर लगते हैं, शरीर टूटता है और खिलाड़ी मानसिक रूप से खाली हो जाते हैं,  यही वजह है कि £7.99  की यह ट्रॉफी क्रिकेट की सबसे महंगी उपलब्धियों में गिनी जाती है भावनात्मक और ऐतिहासिक अर्थों में. सही मायनों एशेज यही है कम कीमत की ट्रॉफी, लेकिन क्रिकेट की सबसे बड़ी परीक्षा.

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