धोनी ने इरफान पठान के लिए यहां से मंगाया था मटन, दोपहर में लगता है मेला, झोलदार मटन-राइस के लिए रांची वाले क्रेजी! – Jharkhand News
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Ranchi Famous Mutton Shop: झारखंड की राजधानी रांची में एक ऐसा होटल है जहां के मटन के महेंद्र सिंह धोनी तक दीवाने हैं. अपने स्टाफ के जरिए वे कई बार यहां से ऑर्डर भी कर चुके हैं. यहां का मटन का टेस्ट ऐसा है कि एक बार खाएंगे तो बार-बार आएंगे…

राजधानी रांची के डलाडाली चौक के पास आपको एक होटल मिलेगा, जिसे दूर से देखने पर लगेगा कि कुछ मुफ्त बंट रहा है, चलो हम भी चल कर ले लेते हैं. लेकिन, पास आने पर पता चलता है कि भाई यह तो एक मटन होटल है जिसका नाम है सरना होटल. यहां पर मिलता है मटन चावल, जिसकी कीमत ₹120 प्लेट है.

लेकिन सच यह है कि यहां पर कुछ भी मुफ्त में नहीं मिलता बल्कि, पैसे देने पड़ते हैं. इसके बावजूद भी भीड़ ऐसी. यहां पर आपको दोपहर में 12:00 बजे पैर रखने की जगह नहीं मिलेगी. कई बार तो लोग खड़े-खड़े खा लेते हैं. यहां का मटन चावल पूरे रांची में काफी फेमस है और आपको मटन चावल सुखवा के पत्ते में परोसा जाएगा.

घर पर दादी-नानी और आपकी मां गांव में जिस तरीके से ठेठ मटन बनाती होंगी, एकदम झोलदार और मसालेदार बिल्कुल यहां पर ऐसा ही स्वाद मिलता है. जो स्पाइसी खाने के शौकीन है, वो तो कहते हैं कि यह जगह हमारे लिए जन्नत है. यहां के स्थानीय निवासी संदीप बोलते हैं कि मेरी तो हर दिन ₹120 की बुकिंग होती है यहां के मटन चावल के लिए.
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यहां पर आलम ऐसा है कि 12 से लेकर 3:00 के बीच ही सारा मटन आउट ऑफ स्टॉक चला जाता है. हर दिन 80 से 90 केजी तक की खपत है. अब आप समझ सकते हैं कि लोगों की दीवानगी इस जगह के लिए कैसी होगी. दरअसल, यहां का जो मटन होता है एकदम बढ़िया पका होता है, जो मुंह में जाते ही आराम से घुलल जाए. इसीलिए बुजुर्ग से लेकर हर वर्ग इसे पसंद करता है.

यहां के संचालक पीटर बताते हैं, एक बार धोनी के घर का स्टाफ आया था और कहा की इरफान पठान जैसे क्रिकेटर आए हुए हैं. उनके लिए 25 पीस मटन चाहिए, तो इस तरीके से हमेशा धोनी का स्टाफ आता है और यहां से मटन पैक कराकर ले जाता है. बगल में ही महेंद्र सिंह धोनी का फार्म हाउस है, जहां पर धोनी रहते हैं अपने परिवार के साथ.

मतलब अब आप यह समझ सकते हैं कि यहां के मटन की खुशबू धोनी के घर तक जाती है. यह जो होटल है बड़ा ही साधारण है, बांस का बना हुआ. इसमें करीबन 50 टेबल लगे हुए हैं और सब टेबल नंबर एलॉटेड हैं लेकिन दोपहर में भीड़ ऐसी होती है कि क्या टेबल नंबर दो और पांच, जहां जिसको जगह मिले वहां बैठ जाता है.

अगर यहां पर आपको बैठने की जगह मिल गयी तो सोचिए भाई आप बहुत लकी इंसान हैं वरना खड़े होकर ही खा लीजिए. लोग यहां खड़े होकर ही खाकर चलते बनते हैं. पीटर बताते हैं, ये जो मसाले होते हैं ये घर में मेरी मां तैयार करती हैं. एकदम खड़े शुद्ध मसाले से और इन्हें मैं अपने से देखकर लाता हूं. इसीलिए क्वालिटी में समझौता नहीं करता हूं. यह भीड़ उसी का नतीजा है.