बंगाल से बाहर हैं तो सुनवाई में छूट, SIR पर चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, छात्रों-मरीजों, कर्मचारियों को राहत
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पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग ने बड़ा ऐलान किया है. आयोग ने बंगाल से बाहर छात्रों, इलाज करा रहे मरीजों और निजी क्षेत्र में काम कर रहे मतदाताओं को व्यक्तिगत रूप से SIR सुनवाई में उपस्थित होने से छूट दे दी है.
पश्चिम बंगाल के नादिया में एसआईआर की सुनवाई कुछ इस तरह चल रही है. (PTI)पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग ने राहत भरा ऐलान किया है. आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि जो मतदाता अस्थायी रूप से राज्य से बाहर हैं, उन्हें अब SIR सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की बाध्यता से छूट दी गई है. चुनाव आयोग के इस फैसले से हजारों छात्रों, इलाज करा रहे मरीजों और निजी क्षेत्र में काम करने वाले उन लोगों को बड़ी राहत मिली है, जो किसी न किसी वजह से अभी बंगाल से बाहर रह रहे हैं. अब उन्हें अपनी पढ़ाई, नौकरी या इलाज बीच में छोड़कर सुनवाई के लिए वापस लौटने की जरूरत नहीं होगी.
किसे मिली है यह बड़ी छूट?
- चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, यह छूट उन सभी मतदाताओं पर लागू होगी जो वर्तमान में राज्य में मौजूद नहीं हैं.
- वे युवा मतदाता जो उच्च शिक्षा या किसी कोर्स के सिलसिले में बंगाल से बाहर के राज्यों में पढ़ाई कर रहे हैं.
- वे लोग जो किसी गंभीर बीमारी का इलाज कराने के लिए राज्य से बाहर के अस्पतालों में भर्ती हैं या वहां रह रहे हैं.
- वे लोग जो प्राइवेट नौकरी के कारण अस्थायी रूप से दूसरे राज्यों में कार्यरत हैं.
- इसके अलावा, आयोग ने सरकारी सेवा में तैनात लोगों को भी इसमें शामिल किया है. बंगाल से बाहर तैनात सरकारी कर्मचारी, सैन्य एवं अर्धसैनिक बलों के जवान और पीएसयू कर्मचारी भी अब इस छूट के दायरे में आएंगे. उन्हें भी अपनी ड्यूटी छोड़कर सुनवाई के लिए आने की जरूरत नहीं है.
अब कैसे होगी सुनवाई?
परिवार को मिला अधिकार आयोग ने साफ किया है कि व्यक्तिगत उपस्थिति में छूट का मतलब यह नहीं है कि वेरीफिकेशन नहीं होगा. प्रक्रिया को आसान बनाते हुए आयोग ने पारिवारिक प्रतिनिधित्व की अनुमति दे दी है. आदेश के अनुसार, ऐसे मतदाताओं की ओर से उनके परिवार का कोई भी वयस्क सदस्य SIR सुनवाई में शामिल हो सकता है. यह एक बड़ा बदलाव है जो प्रक्रिया को व्यवहारिक बनाता है.
सुनवाई के लिए क्या दस्तावेज लगेंगे?
- अगर कोई मतदाता खुद नहीं आ पा रहा है और उसकी जगह उसका परिजन सुनवाई में जाता है, तो उसे कुछ जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करनी होगी.
- सुनवाई में आने वाले परिवार के सदस्य को यह साबित करने वाले दस्तावेज दिखाने होंगे कि वह संबंधित मतदाता का परिजन है.
- साथ ही, चुनाव आयोग (ECI) द्वारा अधिसूचित 13 वैध दस्तावेजों में से कोई भी एक दस्तावेज जमा करना होगा जो मतदाता की पहचान और पते की पुष्टि करता हो.
- आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि सुनवाई की प्रक्रिया और मानक वही रहेंगे जो व्यक्तिगत उपस्थिति वाले मामलों में अपनाए जाते हैं. यानी जांच की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा, बस मतदाता की शारीरिक उपस्थिति की शर्त हटा दी गई है.
किन मामलों में लागू होगा यह नियम?
चुनाव आयोग ने तकनीकी तौर पर भी स्थिति स्पष्ट की है. यह छूट मुख्य रूप से दो तरह के मामलों में लागू होगी. अनमैप्ड (Unmapped) मामले यानी ऐसे मतदाता जिनका विवरण सही ढंग से मैप नहीं किया गया है. दूसरा, लॉजिकल विसंगति यानी वे मामले जिनमें आंकड़ों या विवरण में कोई तार्किक गड़बड़ी पाई गई है. इन दोनों ही श्रेणियों में अगर मतदाता का नाम SIR सूची में है, तो अब उसे घबराने की जरूरत नहीं है.
अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निर्देश
चुनाव आयोग ने इस राहत को जमीनी स्तर पर तुरंत लागू करने के लिए कमर कस ली है. आदेश में सभी ईआरओ, एईआरओ और माइक्रो ऑब्जर्वर्स को निर्देश दिया गया है कि वे इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू करें. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सिर्फ इसलिए न कटे क्योंकि वह पढ़ाई, इलाज या नौकरी की वजह से सुनवाई के दिन मौजूद नहीं हो सका. यह कदम चुनाव प्रक्रिया को अधिक समावेशी और मतदाता-हितैषी बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है.
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Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें