कहानी 500 रुपये में एक कफ सिरप की बोतल बेच 800 करोड़ कूटने वाले शुभम जायसवाल की, जानें अब ED कैसे खंगाल रही कुंडली । shubham jaiswal | varanasi cough syrup mafia | ed actions | 800 crore codeine syndicate | up stf ndps law | bangladesh connection
वाराणसी. देश में जहरीली कफ सिरप कांड के आरोपी शुभम जायसवाल को लेकर जांच एजेसियों ने कई खुलासे किए हैं. ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि वाराणसी का रहने वाला शुभम जायसवाल ने बीते 5-10 सालों में अकूट संपत्ति कूट लिए. शुभम ने शैली ट्रेडर्स के जरिये बांग्लादेश में ही 2.24 करोड़ बोतलें दी थीं. इससे शुभम ने करीब 800 करोड़ की कमाई की. प्रवर्तन निदेशालय की जांच में इस खुलासे के बाद उसकी काली कमाई के सुराग तलाशी जा रही है. अंदाजा लगाया जा रहा है कि शुभम जायसवाल की काली कमाई का आंकड़ा 2000 करोड़ तक भी छू सकता है.
देश में कफ सिरप के अवैध कारोबार का जाल और इस धंधे का सबसे बड़ा किंगपिन शुभम जायसवाल अभी भी पकड़ से कोसों दूर है. शुभम के काले कारनामे की जड़ें देश के कई राज्यों से लेकर नेपाल और बांग्लादेश तक फैली हुई हैं. इस सिंडिकेट का सबसे बड़ा मास्टरमाइंड खुद ही शुभम जायसवाल ही है. एक साधारण सा दिखने वाला दवा व्यापारी शुभम जायसवाल, महज कुछ ही वर्षों में कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी कर 800 से 2000 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का मालिक कैसे बन गया?
कौन है शुभम जायसवाल?
प्रवर्तन निदेशालय और यूपी स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे किसी फिल्मीय पटकथा से कम नहीं हैं. कफ सिरप से हुई अवैध कमाई के बाद शुभम जायसवाल सफेदपोश बनने की कोशिश में था. लेकिन इन सब के बीच कफ सिरप के काले खेल का पर्दाफाश हो गया. अक्सर जब शुभम दवा व्यापारियों की किसी मीटिंग में जाता था, तो संघ के बड़े पदाधिकारी मंच से उसका नाम लेकर स्वागत करते थे. हालांकि शुभम की हसरत सिर्फ इस संघ में अध्यक्ष बनने की नहीं थी, बल्कि वह एमएलसी बनकर विधानसभा तक का सफर तय करना चाहता था.
कफ सिरप तस्करी का मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल पर 75 हजार का ईनाम
800 करोड़ का कोडीन सिंडिकेट और मॉडस ऑपेरंडी
शुभम जायसवाल वाराणसी की सप्तसागर मंडी का एक दवा व्यापारी है, जो अपनी फर्म शैली ट्रेडर्स के जरिए दवाइयों का कारोबार करता था. हालांकि, जांच में पता चला कि यह फर्म महज एक मुखौटा थी. शुभम ने अपने पिता भोला प्रसाद और कुछ करीबियों के साथ मिलकर 173 फर्जी यानी (Shell) कंपनियां बनाई थीं. इन कंपनियों का इस्तेमाल कोडीन युक्त कफ सिरप को थोक मात्रा में खरीदने और उसे अवैध रूप से खपाने के लिए किया जाता था. कोडीन, जो अफीम जैसा है, कफ सिरप में एक निश्चित मात्रा में दवा के तौर पर इस्तेमाल होता है, लेकिन नशे के शौकीन इसका उपयोग ड्रग्स के रूप में करते हैं.
किन-किन देशों में सिंडिकेट
शुभम जायसवाल का नेटवर्क उत्तर प्रदेश के वाराणसी, गाजियाबाद, जौनपुर और आजमगढ़ से लेकर झारखंड और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ था. सिंडिकेट का मुख्य काम बड़ी कंपनियों से भारी मात्रा में कफ सिरप खरीदना और उसे कागजों पर फर्जी अस्पतालों या मेडिकल स्टोर को बेचना दिखाना था. हकीकत में, ये बोतलें ट्रकों के जरिए सीमा पार नेपाल और बांग्लादेश भेजी जाती थीं, जहां कोडीन युक्त सिरप की मांग बहुत अधिक है.
हवाला नेटवर्क से जुड़ा
ईडी की जांच के अनुसार, इस धंधे से होने वाली कमाई को छिपाने के लिए शुभम ने हवाला नेटवर्क का सहारा लिया. उसने अवैध कैश को सोने में बदला और 50 से अधिक फर्जी बैंक खातों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की. अब तक की जांच में 40 करोड़ रुपये से अधिक के हवाला ट्रेल का सीधा प्रमाण मिल चुका है, जबकि कुल कारोबार 800 करोड़ से 2000 करोड़ के बीच होने का अनुमान है.
देश में कफ सिरप को लेकर मचा था बवाल.
कानून की सजा और प्रावधान
कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस यानी एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत आती है. कोडीन एक निर्मित नशीली दवा की श्रेणी में है. चूंकि शुभम का सिंडिकेट हजारों पेटियों में सिरप सप्लाई करता था, इसलिए यह कमर्शियल मात्रा के दायरे में आता है. NDPS एक्ट की धारा 21 के तहत, इसमें 10 से 20 साल तक की कठोर जेल और 1 से 2 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. इसके सात ही नशीली दवाओं की तस्करी के लिए पैसा जुटाने और अपराधियों को शरण देने पर भी 10 से 20 साल की सजा हो सकती है यदि इसे केवल दवा नियमों का उल्लंघन माना जाए, तो इसमें 3 से 5 साल की सजा और जुर्माना होता है.
कानूनी खामियां
अक्सर यह सवाल उठता है कि इतने बड़े माफिया आसानी से कैसे बच निकलते हैं. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह कानून की व्याख्या में छिपा लूपहोल है.
दवा बनाम ड्रग्स की बहस
आरोपी के वकील अक्सर अदालत में यह दलील देते हैं कि कफ सिरप एक स्वीकृत दवा है, न कि नारकोटिक ड्रग्स. यदि सिरप में कोडीन की मात्रा 10mg/5ml से कम है और वह चिकित्सीय उपयोग के लिए है, तो कई बार अदालतें इसे एनडीपीएस एक्ट के बजाय ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत मामूली अपराध मानकर जमानत दे देती हैं.
यूपी में कफ सिरप की तस्करी का मास्टरमाइंड है शुभम जायसवाल.
मात्रा की गणना
हाल तक इस बात पर विवाद था कि सजा पूरी सिरप की बोतल के वजन पर दी जाए या केवल उसमें मौजूद कोडीन के शुद्ध वजन पर. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अब स्पष्ट किया है कि पूरी मिश्रण की मात्रा देखी जाएगी, लेकिन इस भ्रम का फायदा उठाकर कई सालों तक माफिया बचते रहे.
दुबई से चल रहा खेल?
फिलहाल शुभम जायसवाल फरार है और उसके दुबई में छिपे होने की खबरें हैं. दिल्ली और यूपी पुलिस की टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं. सरकार ने इस समस्या की गंभीरता को देखते हुए 1 जनवरी 2026 से कफ सिरप की बिक्री के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं, जिसमें शेड्यूल K से सिरप शब्द हटाकर इसके खुले आम सेल पर रोक लगाने की तैयारी है. शुभम जायसवाल का मामला यह चेतावनी है कि कैसे सफेदपोश व्यापार की आड़ में नशे का काला कारोबार पीढ़ियों को बर्बाद कर रहा है. प्रशासन अब उसकी करोड़ों की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है.