भूख बढ़ाने और एनीमिया से लड़ने में चांगेरी का कमाल, बच्चों के लिए सुरक्षित और फायदेमंद, जानिए इसके फायदे – Uttar Pradesh News
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वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि चांगेरी वास्तव में आयुर्वेद का अनमोल खजाना है, जो बच्चों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. यह पाचन सुधारने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, भूख बढ़ाने और पेट की समस्याओं में कारगर है. यदि सही मात्रा और आयुर्वेदिक सलाह के साथ चांगेरी को बच्चों के आहार में शामिल किया जाए, तो यह उनके स्वस्थ और मजबूत भविष्य की नींव बन सकती है.

गोंडा में कई ऐसे औषधीय पौधे पाए जाते हैं, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. इनमें से एक खास पौधा है चांगेरी, जिसे ग्रामीण इलाकों में आसानी से देखा जा सकता है. यह छोटा और साधारण दिखने वाला पौधा बच्चों की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है.

लोकल 18 से बातचीत में वैद्य जमुना प्रसाद यादव ने बताया कि चांगेरी का उपयोग खासतौर पर बच्चों की पाचन समस्याओं के लिए किया जाता है. आजकल बच्चों में पेट दर्द, गैस, अपच और दस्त जैसी समस्याएं आम हो गई हैं. चांगेरी में मौजूद प्राकृतिक गुण पेट को ठंडक पहुंचाते हैं और पाचन शक्ति को मजबूत बनाते हैं. इसका हल्का काढ़ा या रस बच्चों को देने से पेट की समस्याओं में आराम मिलता है.

वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार बच्चों का पाचन तंत्र नाजुक होता है और इसे मजबूत रखना बेहद जरूरी है. चांगेरी पाचन रसों के स्राव को बढ़ाने में मदद करती है, जिससे भोजन आसानी से पचता है. यह गैस, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याओं में राहत देती है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में चांगेरी का सेवन बच्चों के पेट को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखता है.
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आयुर्वेद में चांगेरी को दस्त और पेट के संक्रमण में लाभकारी माना गया है. बच्चों में दूषित पानी या भोजन के कारण दस्त की समस्या आम हो जाती है. चांगेरी के पत्तों का हल्का काढ़ा या रस आयुर्वेदिक सलाह के अनुसार देने पर दस्त और पेट के संक्रमण में आराम मिलता है.

चांगेरी में मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व बच्चों की इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं. इससे बच्चे बार-बार सर्दी, खांसी और बुखार जैसी मौसमी बीमारियों की चपेट में नहीं आते. आज के समय में जब बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती जा रही है, चांगेरी एक प्राकृतिक सहारा बन सकती है.

कई बच्चों को ठीक से भूख नहीं लगती, जिससे उनका शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है. चांगेरी भूख बढ़ाने में मदद करती है. इसके सेवन से पाचन बेहतर होता है और बच्चा भोजन को रुचि और आनंद के साथ खाता है.

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी चांगेरी का उपयोग पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए किया जाता है. बच्चों में पेट के कीड़े आम समस्या हैं, जिससे कमजोरी और वजन कम होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं. आयुर्वेदिक मात्रा में चांगेरी का सेवन इस समस्या में लाभकारी माना गया है.

चांगेरी में आयरन और अन्य खनिज तत्व पाए जाते हैं, जो खून की कमी यानी एनीमिया में सहायक हो सकते हैं. बढ़ते बच्चों के लिए यह बेहद जरूरी है, क्योंकि खून की कमी उनके मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती है.

चांगेरी में कैल्शियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो बच्चों की हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. यह पौधा उनके संपूर्ण विकास के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है.

वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि बच्चों को चांगेरी देने के कई पारंपरिक तरीके हैं. जैसे चांगेरी का साग बनाकर देना, हल्की चटनी बनाना या आयुर्वेदिक सलाह से चांगेरी का रस या काढ़ा देना. हालांकि, बच्चों को चांगेरी देने से पहले यह ध्यान रखना जरूरी है कि मात्रा सीमित हो और किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह ली जाए, खासकर छोटे बच्चों के लिए. सावधानियां भी जरूरी हैं: चांगेरी में औषधीय गुण भरपूर हैं, लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन नुकसानदायक हो सकता है. बहुत ज्यादा खट्टी होने के कारण यह कुछ बच्चों में पेट में जलन या एसिडिटी बढ़ा सकती है. इसलिए संतुलित मात्रा और सही तरीके से सेवन करना बेहद जरूरी है.