संकट में एयरलाइंस कंपनियों ने जनता से की थी वसूली! अब देना पड़ेगा पाई-पाई का हिसाब, सरकार ने सबसे मांगा ब्योरा
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CCI Action on Airlines : सीसीआई ने एयरलाइंस कंपनियों से दिसंबर में वसूले गए किराये का ब्योरा मांगा है. दिसंबर में इंडिगो संकट की वजह से कंपनियों ने यात्रियों से मनमाना किराया वसूला था.
सीसीआई ने हवाई कंपनियों से दिसंबर में वसूले किराये का ब्योरा मांगा है. नई दिल्ली. दिसंबर का महीना तो याद ही होगा, जब इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें कैंसिल हो गई थी और हजारों यात्री एयरपोर्ट पर ही फंस गए थे. तब संकट की बहती गंगा में सभी एयरलाइंस कंपनियों ने जमकर हाथ धोए और 5 हजार वाली हवाई टिकट 50-50 हजार रुपये में बेची थी. क्या इंडिगो और क्या एयर इंडिया, स्पाइसजेड या अकासा, ऐसी कोई कंपनी नहीं थी जिसने यात्रियों से जमकर वसूली न की हो. अब सीसीआई के कहने पर सरकार ने सभी एयरलाइंस कंपनियों से इस वसूली का ब्योरा मांगा है.
दिसंबर महीने में हवाई किराये में हुई असामान्य वृद्धि को लेकर सरकार काफी सख्त हो गई है और एयरलाइंस से इसका पूरा डाटा मांगा है. अब देश के प्रतिस्पर्धा नियामक आयोग यानी Competition Commission of India (CCI) ने विमानन क्षेत्र के नियामक DGCA से सभी एयरलाइंस से किराये का डोटा लाने के लिए कहा है. इसके बाद सरकार ने IndiGo, Air India, SpiceJet और Akasa से कहा है कि वे दिसंबर महीने में वसूले गए औसत हवाई किराये का पूरा ब्योरा दें.
फेयर कैप लगाने की आ गई थी नौबत
दिसंबर में इंडिगो संकट के दौरान कुछ एयरलाइंस के किराये असामान्य रूप से बढ़े थे, जिसके चलते अस्थायी रूप से किराया सीमा यानी Fare Cap लगाने की नौबत आ गई थी. CCI ने दिसंबर में कहा था कि वह यह जांच करेगी कि कहीं इंडिगो ने अपनी बड़ी बाजार हिस्सेदारी का गलत फायदा तो नहीं उठाया, जिसकी वजह से यात्रियों को संकट का सामना करना पड़ा और मुसीबत के समय हवाई यात्रियों से मनमाना किराया वसूला गया था. इसी बात को लेकर अब सरकार ने सभी एयरलाइंस से किराये का ब्योरा मांगा है.
क्यों आया था इंडिगो का संकट
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए ने साल 2024 में एक नियम जारी किया था, जो 1 नवंबर, 2025 से लागू हुआ. इसके तहत इसके तहत पायलट के साप्ताहिक आराम को 36 से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया गया और रात की ड्यूटी भी घटा दी गई थी. इसके अलावा रात में लैंडिंग की संख्या भी प्रति सप्ताह 6 से घटाकर सिर्फ 2 कर दी गई थी. हालांकि, नियम लागू होने के बावजूद इंडिगो ने अपने क्रू के शिड्यूल और पायलट भर्ती को समायोजित नहीं किया था, जिससे करीब 2 हजार उड़ानें कैंसिल हो गईं और हजारों यात्री एयरपोर्ट पर ही फंस गए थे.
कितना बढ़ गया था किराया
संकट की इस घड़ी में एयरलाइंस कंपनियों ने यात्रियों से 3 से लेकर 10 गुना तक किराया वसूला था. आलम ये था कि मुंबई से दिल्ली तक का एक तरफ का किराया 35 हजार रुपये तक वसूला गया था, जो आमतौर पर राउंड ट्रिप के लिए 20 हजार रुपये तक ही रहता है. इसी तरह, दिल्ली से तिरुवनंतपुरम तक 6 से 7.5 हजार रुपये तक रहने वाली एयर टिकट के लिए 49 हजार से 69 हजार रुपये तक वसूले गए थे. स्पाइसजेट ने तो कोलकाता से मुंबई तक का किराया 90 हजार रुपये तक वसूला था, जबकि एयर इंडिया ने मुंबई से भुवनेश्वर तक 84 हजार रुपये से ज्यादा का किराया लिया था. बाद में सरकार ने फेयर कैप लगाकर इस पर अंकुश लगाया और कंपनियों की मनमानी रोकी. अब इसी बात को लेकर सीसीआई ने सभी कंपनियों से दिसंबर में वसूले गए किराये के आंकड़े मांगे हैं.
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आज तक से टीवी पत्रकारिता शुरू करने वाली प्रियंका कांडपाल को अब तक तकरीबन 11 साल का अनुभव है. तकरीबन चार साल आज तक में रिपोर्टिंग के साथ एंकरिंग भी कर चुकी हैं. उसके बाद इंडिया टीवी में पांच साल तक काम किया. 201…और पढ़ें