Chatni Bnane Ka Tareeka : क्या आपने कभी खाई है तिल की चटनी? स्वाद में लाजवाब और बनाने में भी आसान, जानें रेसिपी
Last Updated:
Thandi Me Chatni Bnane Ka Tareeka : भीलवाड़ा में सर्दियों में तिल की चटनी को कीर्ति कृष्णा ने पौष्टिक और स्वादिष्ट बताया, जिसमें कैल्शियम, आयरन और स्वस्थ वसा हड्डियों व इम्युनिटी के लिए फायदेमंद हैं. यह चटनी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि इसे बनाना भी बेहद आसान है. रोटी, परांठा या बाजरे की रोटी के साथ तिल की चटनी सर्दी में स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संगम पेश करती है.
भीलवाड़ा. सर्दी का मौसम आते ही शरीर को गर्म रखने वाले और ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों की जरूरत बढ़ जाती है. ऐसे में तिल से बनी चटनी एक बेहतरीन और पौष्टिक विकल्प मानी जाती है. तिल में भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन और स्वस्थ वसा पाई जाती है, जो सर्दी के दिनों में शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है.
यह चटनी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि इसे बनाना भी बेहद आसान है. रोटी, परांठा या बाजरे की रोटी के साथ तिल की चटनी सर्दी में स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संगम पेश करती है.
घर पर ऐसे बनाएं तिल की चटनी
कीर्ति कृष्णा ने बताया कि तिल की चटनी सर्दियों में खासतौर पर पसंद की जाती है और इसे बनाना बेहद आसान है. सबसे पहले सफेद तिल को धीमी आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भून लिया जाता है, जिससे उसकी खुशबू और स्वाद दोनों बढ़ जाते हैं. भुने हुए तिल ठंडे होने पर मिक्सी में डालें और इसमें स्वादानुसार नमक, हरी मिर्च, लहसुन की कलियां, थोड़ा सा जीरा और खट्टापन लाने के लिए नींबू का रस या इमली मिलाएं. चाहें तो इसमें मूंगफली या धनिया भी डाला जा सकता है. सभी सामग्री को थोड़ा थोड़ा पानी डालते हुए बारीक पीस लें. तैयार तिल की चटनी रोटी, बाजरे की खिच या पराठे के साथ बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक लगती है.
हड्डियों और इम्युनिटी के लिए फायदेमंद
सर्दियों में तिल की चटनी का खास महत्व माना जाता है. तिल को कैल्शियम और आयरन का खजाना कहा जाता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने और शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है. यह चटनी ठंडी सुबह या शाम के समय रोटी, खिचड़ी या बाजरे की राब के साथ खाने पर विशेष लाभ देती है. पीढ़ियों से घरों में बनाई जा रही यह चटनी सर्दियों की कमजोरी दूर करने और इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक मानी जाती है.
About the Author
नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें