नाम, शहर और पिता तक बदला, फिर भी बच न सका, 34 साल बाद पत्नी के कातिल को दिल्ली पुलिस ने पकड़ा | delhi police caught life convict a husband after 34 years who murdered his wife changed father address city name aadhar
नई दिल्ली. कहते हैं कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून के लंबे हाथ अपराधी की गर्दन तक पहुंच ही जाते हैं. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल ने इस कहावत को सच कर दिखाया है. पुलिस ने एक ऐसे अपराधी को गिरफ्तार किया है जिसने 34 साल पहले अपनी पत्नी की बेरहमी से गला घोंटकर हत्या की थी और पिछले 25 सालों से पैरोल जंप करके फरार चल रहा था. 58 वर्षीय योगेंद्र उर्फ जोगिंदर सिंह ने पुलिस से बचने के लिए न केवल अपना शहर बदला, बल्कि अपनी पहचान, नाम और यहां तक कि अपने पिता का नाम भी बदल लिया था. लेकिन क्राइम ब्रांच की तकनीक और कड़ी मेहनत के आगे उसका यह परफेक्ट कवर धराशायी हो गया.
1992 की वो खौफनाक सुबह
वारदात की शुरुआत 15 मार्च 1992 को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पिल्लंगी गांव, जो अब सरोजिनी नगर थाना क्षेत्र में आता है में हुई थी. सुबह करीब 7:15 बजे पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है और वह भागने की फिराक में है. मकान मालिक के भाई की मदद से पुलिस ने उस वक्त आरोपी योगेंद्र को पीछा करके दबोच लिया था. कमरे के अंदर बिस्तर पर उसकी पत्नी की लाश पड़ी थी, जिसकी बाईं आंख के पास चोट के निशान थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मौत का कारण मैनुअल स्ट्रैंगुलेशन यानी हाथों से गला घोंटना था.
पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की. साल 1997 में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने योगेंद्र को अपनी पत्नी की हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी.
पैरोल का फायदा और 25 साल की फरारी
सजा काटने के दौरान साल 2000 में योगेंद्र ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की और उसे चार सप्ताह की पैरोल मिल गई. लेकिन जेल की सलाखों से बाहर आते ही योगेंद्र के मन में कानून को धोखा देने का विचार आया. वह पैरोल खत्म होने के बाद वापस जेल नहीं लौटा और भूमिगत हो गया. साल 2010 में हाई कोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी और उसकी सजा को बरकरार रखा, लेकिन योगेंद्र का कहीं अता-पता नहीं था. अदालत ने उसे घोषित अपराधी करार दिया और उसकी तलाश के लिए क्राइम ब्रांच को टास्क सौंपा गया.
पहचान बदलकर बना ‘जोगिंदर सिंह’, सीखी पंजाबी भाषा
फरारी के दौरान योगेंद्र ने देश के अलग-अलग हिस्सों जैसे हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार और कर्नाटक में शरण ली. वह हर राज्य में 2-3 साल रुकता और फिर ठिकाना बदल लेता. साल 2012 में वह पंजाब के लुधियाना में जाकर बस गया. यहाँ उसने एक बड़ी साजिश रची. उसने अपना नाम ‘योगेंद्र’ से बदलकर ‘जोगिंदर सिंह’ कर लिया और अपने पिता का नाम ‘जय प्रकाश’ की जगह ‘जयपाल’ लिखवाया.
बाप बदलकर बनाया नया अधार कार्ड
इतना ही नहीं, उसने लुधियाना के पते पर नया आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड भी बनवा लिया. खुद को पूरी तरह पंजाबी समाज में ढालने के लिए उसने पंजाबी भाषा सीखी और अब वह धाराप्रवाह पंजाबी बोलता है. वह वहां एक बढ़ई यानी कारपेंटर के रूप में काम कर रहा था ताकि किसी को उस पर शक न हो.
500 लोगों की जांच और 10 दिन का लुधियाना मिशन
क्राइम ब्रांच के डीसीपी संजीव कुमार यादव के मुताबिक, इंस्पेक्टर मंगेश त्यागी और रॉबिन त्यागी की टीम इस भगोड़े की तलाश में जुटी थी. हेड कांस्टेबल मिंटू यादव को गुप्त सूचना मिली कि योगेंद्र लुधियाना में छिपा हो सकता है. पुलिस ने मुजफ्फरनगर (आरोपी का पैतृक निवास) और लुधियाना में लगभग 500 से अधिक लोगों की प्रोफाइल और रिकॉर्ड की जांच की.
जब पुलिस को पक्का यकीन हो गया कि ‘जोगिंदर’ ही ‘योगेंद्र’ है, तो एएसआई नीरज कुमार, हेड कांस्टेबल मिंटू और सवाई सिंह की एक टीम लुधियाना भेजी गई. यह टीम 10 दिनों तक वहां वेश बदलकर रही. 5 जनवरी 2026 को पुलिस ने लुधियाना के साउथ सिटी इलाके में घेराबंदी की. पुलिस को देखते ही योगेंद्र ने मोटरसाइकिल से भागने की कोशिश की, लेकिन एक लंबे पीछा करने के बाद उसे दबोच लिया गया.
सफेद दाढ़ी और बदल गया हुलिया
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने उससे पूछताछ की, तो उसने बताया कि उसे लगा था कि इतने सालों बाद पुलिस उसे भूल चुकी होगी. वह अपनी नई पहचान के साथ पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रहा था. 25 सालों में उसका हुलिया पूरी तरह बदल चुका था, उसने सफेद दाढ़ी बढ़ा ली थी और वह एक आम पंजाबी नागरिक की तरह रहता था. फिलहाल, कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे दिल्ली की तिहार जेल भेज दिया गया है. दिल्ली पुलिस की यह सफलता बताती है कि इंसाफ में देरी भले ही हो, लेकिन वह मिलता जरूर है.