सुहागरात का वो गाना, न नाचा हीरो-न हीरोइन, बूढ़ों से जवां दिलों तक सभी ने ली खूब चुटकी
बॉलीवुड में आपने कई सुहागरात के गाने सुने होंगे. कुछ तो इतने यादगार है कि सालों बाद भी लोग उन्हें गुनगुनाते हैं. लेकिन क्या आप उस गाने के बारे में जानते हैं, जिसमें न हीरो नाचा और न ही हीरोइन नाची, लेकिन बूढ़ों से जवां दिल वालों ने नए दूल्हा-दुल्हन की खूब चुटकी ली. 1993 में आई फिल्म ‘रोजा’ ने भारतीय सिनेमा को सिर्फ एक यादगार प्रेम कहानी ही नहीं दी, बल्कि ऐसे गीत भी दिए जो समय के साथ और भी खास बनते चले गए. इन्हीं में से एक है ‘रुक्मिणी रुक्मिणी’ एक ऐसा सुहागरात गीत, जिसने परंपरागत रोमांटिक गानों की धारणा ही बदल दी. न इसमें हीरो-हीरोइन का नाच है, न ही कोई सजी-धजी रोमांटिक कोरियोग्राफी, फिर भी यह गाना हर उम्र के दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान ले आता है. शादी के बाद की झिझक, मासूम शरारत और हल्के-फुल्के व्यंग्य को इस गीत में इतने अनोखे अंदाज में पिरोया गया कि बूढ़ों से लेकर जवान दिलों तक सभी ने खूब चुटकी ली. ए.आर. रहमान का संगीत, पी.के. मिश्रा के बोल और मणिरत्नम की संवेदनशील सोच इस गाने को साधारण से कहीं ऊपर ले जाती है. ‘रुक्मिणी रुक्मिणी’ आज भी साबित करता है कि सच्चा मनोरंजन शोर नहीं, समझदारी से पैदा होता है.