हमास की लश्कर से ये कैसी जुगलबंदी, पाकिस्तान में आतंकी नेता की मुलाकात से खुला राज, भारत के खिलाफ उगल चुका आग
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Hamas Lashkar Meeting: पाकिस्तान में हमास और लश्कर-ए-तैयबा के रिश्ते गहरे हो रहे हैं. डॉ. नाजी ज़हीर ने गुजरांवाला में लश्कर कमांडर से मुलाकात की. यह नेटवर्क क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है.
हमास के वरिष्ठ नेता डॉ. नाजी ज़हीर ने पाकिस्तान के गुजरांवाला में लश्कर कमांडर राशिद अली संधू से मुलाकात की.पाकिस्तान में आतंकी संगठनों हमास और लश्कर-ए-तैयबा के बीच रिश्ते और गहरे होते दिख रहे हैं. हाल ही में सामने आए एक वीडियो से पता चला है कि हमास के वरिष्ठ नेता डॉ. नाजी ज़हीर ने पाकिस्तान के गुजरांवाला में लश्कर कमांडर राशिद अली संधू से मुलाकात की. यह मुलाकात एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान हुई, जिसे पीएमएमएल (PMML) नाम के संगठन ने आयोजित किया था. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पीएमएमएल को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ एक राजनीतिक मंच माना जाता है. राशिद अली संधू इसी मंच के तहत एक प्रमुख नेता की भूमिका निभाता है.
भारत के खिलाफ उगल चुका जहर
फरवरी 2025 में ज़हीर ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) का दौरा किया था, जहां उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कमांडरों के साथ मंच साझा किया. उस दौरान आयोजित भारत विरोधी रैली को भी ज़हीर ने संबोधित किया था. यह दौरा पहलगाम आतंकी हमले से कुछ ही हफ्ते पहले हुआ था, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ जाती है. इससे पहले अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हमास के हमले के बाद भी ज़हीर पाकिस्तान गए थे और वहां कई बड़े इस्लामी नेताओं के साथ बैठकों और सम्मेलनों में शामिल हुए थे.
लगातार सामने आ रहे इन घटनाक्रमों से यह संकेत मिलता है कि हमास से जुड़े नेता पाकिस्तान में मौजूद आतंकी और कट्टरपंथी संगठनों के साथ अपने संपर्क और समन्वय को तेज़ी से बढ़ा रहे हैं. सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह नेटवर्किंग न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है, बल्कि वैश्विक आतंकवाद के फैलते दायरे को भी दर्शाती है.
गाजा में सेना भेजने की तैयारी में पाकिस्तान
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और पश्चिमी देश गाज़ा में भविष्य की संभावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण फोर्स (ISF) को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर भी नज़र बनाए हुए हैं. ऐसे में पाकिस्तान की धरती पर हमास और लश्कर जैसे संगठनों के बीच खुले संपर्क और कार्यक्रमों का आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन बैठकों का उद्देश्य केवल वैचारिक समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रशिक्षण, फंडिंग और रणनीतिक सहयोग जैसे पहलुओं की भी आशंका जताई जा रही है. आने वाले दिनों में इस नेटवर्क के और खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
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