28 दिन में बनी 10 लाख के बजट वाली फिल्म, 3 दिन में रिकॉर्ड हुए गाने, 2 बड़े स्टार लेकिन असली हीरो बना कुत्ता
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इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत कोई स्टार, गाना या लोकेशन नहीं थी. असली हीरो वो था, जो न डायलॉग बोलता था, न कैमरे के सामने पोज देता था. फिर भी हर सीन में जान डाल देता था. कहानी जब टूटे दिल, अन्याय और इंसाफ की तलाश तक पहुंची, तब यही खामोश किरदार पूरी फिल्म की आत्मा बन गया. क्या आप जानते हैं ये फिल्म कौन सी है…

नई दिल्ली. बॉलीवुड के इतिहास में एक ऐसी अनोखी फिल्म बनी, जिसने हर पारंपरिक फॉर्मूले को तोड़ दिया. महज 28 दिनों में शूटिंग पूरी करने वाली और केवल 10 लाख रुपये के सीमित बजट में बनी यह फिल्म एक चमत्कार से कम नहीं थी. इसके सभी गाने भी रिकॉर्डिंग के लिए सिर्फ 3 दिन ही लगे. फिल्म में उस दौर के दो जाने-माने चेहरे फिल्म में लीड रोल में थे और बॉलीवुड के बड़े नाम इस फिल्म का निर्माण किया था. लेकिन हैरानी की बात यह रही कि दर्शकों के दिलों पर जो कलाकार छा गया, वह कोई इंसान नहीं, बल्कि एक जानवर था. पर्दे पर उसकी भावनाएं, वफादारी और बुद्धिमत्ता ने सबका ध्यान खींच लिया. एक ऐसा चार पैरों वाला सितारा, जिसने न सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाया, बल्कि फिल्म के सबसे यादगार और मार्मिक पलों का केंद्र भी बना. यह कहानी है एक ऐसे अनोखे हीरो की, जिसने साबित कर दिया कि स्टारडम सिर्फ इंसानों की मोहताज नहीं होती.

बॉलीवुड के इतिहास में 1979 में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई जिसने न सिर्फ दर्शकों के दिल पर राज किया, बल्कि यह साबित कर दिया कि एक कलाकार का दिल धड़कता किसी में भी हो सकता है. आज जब बॉलीवुड में बड़े बजट, भारी-भरकम सेट और वीएफएक्स की बात होती है, तब 1979 में बनी एक सादगी भरी फिल्म ‘नूरी’ की कहानी दिल को छू जाती है.

वजह सिर्फ इसकी प्रेम कहानी नहीं, बल्कि इसका वो साइलेंट हीरो है, जिसने बिना डायलॉग बोले दर्शकों के दिल में गहरी जगह बना ली. इस फिल्म का असली सुपरस्टार था एक कुत्ता-खैरू… फिल्म के प्रोड्यूसर थे यश चोपड़ा, निर्देशक मनमोहन कृष्णा, लीड रोल में थे फारूक शेख और पूनम ढिल्लों, लेकिन इस फिल्म का सबसे बड़ा सुपरस्टार खैरू साबित हुआ. फोटो साभार-@IMDb
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हिमालय की वादियों में बसे एक छोटे से गांव की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म मासूम प्रेम, सामाजिक टकराव और इंसाफ की तलाश की कहानी कहती है. कहानी के केंद्र में हैं यूसुफ (फारूक शेख) और नूरी (पूनम ढिल्लों)—दो सादे दिलों वाले युवा, जिनका सपना है एक छोटा सा घर, परिवार और प्यार से भरी जिंदगी. लेकिन जिंदगी इतनी आसान नहीं होती. फोटो साभार-@IMDb

शादी से ठीक पहले नूरी के साथ एक दिल दहला देने वाली घटना होती है. इस सदमे के बाद नूरी नदी में कूद जाती है और उसकी मौत हो जाती है. यह पल यूसुफ को अंदर से तोड़ देता है. यहीं से कहानी में एंट्री होती है खैरू की… जो नूरी और यूसुफ का पालतू कुत्ता होता है. जहां इंसान टूट जाता है, वहां खैरू हार नहीं मानता. अपनी सूझबूझ और तेज नजर से वह उस अपराधी को पहचान लेता है, जिसने नूरी की जिंदगी तबाह की थी. फोटो साभार-@IMDb

आखिरकार यूसुफ और खैरू मिलकर नूरी को इंसाफ दिलाते हैं. यही वजह है कि दर्शकों की नजर में खैरू इस फिल्म का सच्चा हीरो बन गया. लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी और भी ज्यादा भावुक है. फोटो साभार-@IMDb

IMDb के मुताबिक, शूटिंग के दौरान एक दुखद हादसे में खैरू की मौत हो गई. बताया जाता है कि वह एक जीप से गिर पड़ा और गाड़ी के पिछले टायर के नीचे आ गया. क्रू को लगा कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई है, लेकिन कुछ देर बाद वह उठा और भौंकने लगा. सभी को उम्मीद जगी, मगर अंदरूनी चोटों और ब्लीडिंग की वजह से बाद में खैरू ने दम तोड़ दिया. इस घटना ने पूरी टीम को झकझोर कर रख दिया. फोटो साभार-@IMDb

‘नूरी’ सिर्फ एक प्रेम कहानी नहीं थी. इसमें समाज, इज्जत और महिला की स्थिति जैसे मुद्दे भी सामने आते हैं. यही वजह रही कि फिल्म दर्शकों से गहराई से जुड़ गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘नूरी’ उस साल की सातवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. इस फिल्म ने पूनम ढिल्लों को रातों-रात स्टार बना दिया. फोटो साभार-@IMDb

राजीव राय के मुताबिक, ‘नूरी’ की शूटिंग सिर्फ 28 दिनों में पूरी हो गई थी और सारे गाने महज 3 दिनों में रिकॉर्ड कर लिए गए थे. रिलीज के बाद फिल्म का ऐसा रिस्पॉन्स मिला कि सिर्फ मुंबई के आसरा थिएटर से ही पूरी लागत निकल आई. गुलशन राय ने इसे ‘असली हिट फिल्म’ बताया. फोटो साभार-@IMDb

फिल्म में मदन पुरी और इफ्तिखार जैसे दमदार कलाकार भी थे. इसके अलावा पदम खन्ना, गीता सिद्धार्थ, जावेद खान, भारत कपूर, राज वर्मा समेत कई कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाईं. आज भी ‘नूरी’ को उसकी मासूमियत, संगीत और भावनात्मक गहराई के लिए याद किया जाता है. लेकिन जब भी इस फिल्म की बात होती है, खैरू का जिक्र जरूर आता है. एक ऐसा साइलेंट हीरो, जिसने अपनी मौजूदगी से कहानी को अमर बना दिया. यह क्लासिक फिल्म आज भी दर्शक नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं. फोटो साभार-@IMDb