जब तुर्कमान गेट पर गरजे थे बुलडोजर, संजय गांधी के एक्शन से सहमी दिल्ली, जानिए इमरजेंसी की वो कहानी

Share to your loved once


Turkman Gate Dargah Faiz Elahi Masjid Bulldozer Action: दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास मंगलवार की आधी रात को बुलडोजर की गर्जना सुनाई दी है. दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट इलाके में एक फैज-ए-इलाही मस्जिद है. यहां पर अवैध निर्माण के खिलाफ आधी रात से ही बुलडोजर एक्शन जारी है. 6 जनवरी 2026 की रात को फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास एमसीडी यानी दिल्ली नगर निगम की टीम ने अतिक्रमण हटाया. बुलडोजर एक्शन से स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया. आधी रात को ही तुर्कमान गेट इलाके में तनाव का माहौल बन गया. पुलिस और स्थानीय लोग आमने-सामने आ गए. देखते ही देखते पत्थरों की बरसात हो गई. जवाब में पुलिस ने भी आंसू गैस के गोले छोड़े. करीब 30 बुलडोजरों से फैज-ए-इलाही मस्जिद परिसर में मौजूद अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त किया गया. दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास इस बुलडोजर एक्शन से इमरजेंसी के दौर की पुरानी यादें ताजा हो गईं. इमरजेंसी के वक्त भी कुछ इसी तरह से तुर्कमान गेट पर बुलडोजर एक्शन हुआ था. संजय गांधी के चलते उस वक्त भी दिल्ली कुछ इसी कदर सहमी थी.

साल 1975 से 1977 के बीच देश में इमरजेंसी लगी हुई थी. लोकतंत्र का गला घोंटा गया था. विपक्ष का मुंह बंद कर दिया गया था. विरोधियों को जेल में डाल दिया गया था. इमरजेंसी के वक्त भी बुलडोजर एक्शन से दिल्ली सहम गई थी. यह बात साल 1976 की है. उस वक्त भी दिल्ली के तुर्कमान गेट पर बुलडोजर एक्शन हुआ था. अब और तब में केवल इतना अंतर है कि आज का एक्शन कोर्ट के आदेश पर है, जबकि उस वक्त का एक्शन संजय गांधी के आदेश पर हुआ था. इमरजेंसी के वक्त देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं. इंदिरा गांधी भले ही पीएम रही हों, मगर संजय गांधी ही असल फैसले लेते थे. उस वक्त संजय गांधी की बात को काटने की हिम्मत किसी में नहीं होती थी. संजय गांधी ने जो फैसला लिया, उसे मिटाना असंभव होता था. कारण कि संजय का फैसला मतलब पत्थर की लकीर.

संजय गांधी और तुर्कमान गेट पर बुलडोजर एक्शन
उस वक्त संजय गांधी ने दिल्ली को सुंदर बनाने के नाम पर तुर्कमान गेट पर बुलडोजर चलवाया था. तब डीडीए के वाइस चेयरमैन थे जगमोहन. कहते हैं कि जगमनोहन के लिए संजय गांधी भगवान हुआ करते थे. फरवरी 1976 में संजय गांधी तुर्कमान गेट के दौरे पर गए थे. तभी उनके दिमाग में बुलडोजर एक्शन का खयाल आया था. इंदिरा गांधी की जीवनी लिखने वाली लेखिका कैथरीन फ्रैंक कहती हैं, ‘संजय ने अपनी मां इंदिरा गांधी से इच्छा प्रकट की थी कि वो चाहते हैं कि उन्हें तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद साफ-साफ दिखाई दे. इंदिरा गांधी ने संजय की कही बात को इनकार नहीं किया. इसके बाद उस समय डीडीए के उपाध्यक्ष जगमोहन ने संजय गांधी के इन मौखिक शब्दों को आदेश की तरह लिया.’

दिल्ली में तुर्कमान गेट पर एक बार फिर बुलडोजर एक्शन हुआ है.

तुर्कमान गेट पर इमरजेंसी में क्यों चला बुलडोजर
बीबीसी की एक रिपोर्ट में जिक्र है, ‘जगमोहन ने तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद के बीच आने वाले हर चीज को मिटा दिया, जो दिखाई देने में बाधक थी. यहां रहने वाले लाखों लोगों को बीस मील दूर यमुना पार खाली पड़ी जमीन पर बसाया गया. उस समय 16 बुलडोजर दिन रात काम कर रहे थे. उसी दिन तुर्कमान गेट के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल जगमोहन से मिलने गया. प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया कि उन्हें तुर्कमान गेट से दूर न भेजा जाए और अलग अलग जगहों पर न भेज कर एक साथ रहने दिया जाए.’ जगमोहन ने जवाब दिया, ‘क्या आप समझते हैं कि हम पागल हैं कि एक पाकिस्तान तोड़ कर दूसरा पाकिस्तान बन जाने दें? हम आपको त्रिलोकपुरी और खिचड़ीपुर में प्लॉट देंगे और आपको उन पांच लाख लोगों की तरह वहां जाना पड़ेगा जिन्हें हम वहां बसाना चाहते हैं. और ये याद रखिए अगर आप वहां नहीं जाते हैं और डिमोलिशन का विरोध करने की बेवकूफी जारी रखते हैं, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे.’

इमरजेंसी के दौरान भी तुर्कमान गेट पर बुलडोजर की गर्जना सुनाई दी थी.

संजय के आदेश पर एक्शन
कहते हैं कि जगमोहन यह सब संजय गांधी के मौखिक आदेश पर ही कर रहे थे. उस वक्त संजय गांधी कोई आधिकारिक पद नहीं रखते थे, फिर भी दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) और एमसीडी पर उनका प्रभाव इतना था कि उन्होंने शहर को ‘सुंदर’ बनाने के नाम पर तुर्कमान गेट इलाके में बुलडोजर चलवा दिया था. तुर्कमान गेट पुरानी दिल्ली का एक घनी आबादी वाला मुस्लिम बहुल इलाका है.

तुर्कमान गेट पर बुलडोजर एक्शन से कैसे सहम गई थी दिल्ली
बात फरवरी 1976 की है. संजय गांधी ने पुरानी दिल्ली का दौरा किया. तुर्कमान गेट से जमिया मस्जिद का नजारा देखकर वे नाराज हो गए, क्योंकि बीच में झुग्गियां और पुरानी इमारतें रुकावट बन रही थीं. तभी संजय गांधी ने पुरानी दिल्‍ली के सौंदर्यीकरण का ऐलान किया था. उन्होंने फैसला किया कि सारी अवैध इमारतें गिरा दी जाएंगी. इसके लिए लाल किले, जामा मस्जिद और तुर्कमान गेट के आसपास के इलाकों को चिन्हित किया गया था. इस काम का जिम्मे जगमोहन को ही सौंपा गया. जगमोहन डीडीए के वाइसचेयर मैन थे और संजय गांधी के सबसे भरोसेमंद. अप्रैल 1976 को पहला बुलडोजर तुर्कमान गेट पहुंचा. आसफ अली रोड पर पुरानी इमारतें गिरानी शुरू हुईं. कलां महल, दूजाना हाउस और आसपास की झुग्गियां धराशायी हो गईं. निवासियों को दूर-दराज के रिसेटलमेंट कॉलोनियों में शिफ्ट किया गया.

तुर्कमान गेट मुस्लिम बहुल इलाका है.

कैसा था उस वक्त का नजारा
तुर्कमान गेट में विरोध बढ़ा तो पुलिस ने हवाई फायरिंग का भी सहारा लिया. पुलिस के इस एक्शन से प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए. फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास लोग धरने पर बैठ गए. देखते ही देखते भीड़ 5-6 हजार तक पहुंच गई. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस छोड़ी, लेकिन जब विरोध नहीं रुका तो हवाई फायरिंग शुरू हो गई. बताया जाता है कि कई लोगों की मौत बुलडोजर से कुचलने से हुई तो कुछ की गोली लगने से हुई. क्योंकि देश में इमरजेंसी लगी थी, तो मीडिया की आजादी भी छिनी जा चुकी थी. ऐसे में इसकी रिपोर्टिंग भी उस तरह नहीं हुई. इसक तरह तुर्कमान गेट की घटना पूरे दिल्ली में स्लम डेमोलिशन का प्रतीक बन गई. इमरजेंसी के दौरान दिल्ली में हजारों अवैध संरचनाएं गिराई गईं और हजारों लोग विस्थापित हुए. यही कारण है कि दिल्ली में जब भी बुलडोजर एक्शन होता है, लोगों को संजय गांधी का वो एक्शन याद आ जाता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP