‘वो तुम्हें छोड़ देगा’, दीपिका पादुकोण की ‘मां’, तलाकशुदा एक्टर से दूसरी शादी करते ही जिसे मिलने लगी थी वार्निंग

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Supriya Pathak Birthday: टीवी की दुनिया हो या फिल्मी पर्दा, सुप्रिया पाठक ने अपने हर किरदार से दर्शकों को खूब एंटरटेन किया है. आज भी उनकी गिनती ऐसे कलाकारों में होती हैं, जो हर किरदार में जान डाल देते हैं. कभी सीधी-सादी हंसा बनकर दर्शकों को हंसा देती हैं, तो कभी धनकोर बा जैसे नेगेटिव रोल से अमिट छाप छोड़ी. उनकी यही बहुमुखी एक्टिंग उन्हें इंडस्ट्री की सबसे अलग एक्ट्रेसेस की पहचान देती है.

नई दिल्ली. एक्टिंग की दुनिया की जानी मानी एक्ट्रेस सुप्रिया पाठक ने अपने लंबे करियर में हर तरह के रोल निभाए हैं. खासतौर पर स्टार प्लस के सुपरहिट सीरियल ‘खिचड़ी’ में हंसा पारेख का किरदार तो उन्होंने अमर कर दिया. वह इस रोल से इतनी इतनी पॉपुलर हुई कि बतौर कॉमिक एक्ट्रेस लोग उन्हें जानने लगे थे. लेकिन सुप्रिया पाठक ने अपने करियर में कुछ सीरियस तो कुछ रोमांटिक रोल भी निभाए हैं.

7 जनवरी साल 1961 को जन्मीं सुप्रिया पाठक ने अपने लंबे करियर हर तरह के किरदारों में खुद को ढाला है. कॉमेडी हो, इमोशनल ड्रामा हो या निगेटिव शेड्स वाला किरदार, उन्होंने हर बार खुद को साबित किया है. जिस भी रोल में वह नजर आती हैं, उसमें पूरी तरह रम जाती हैं. इसी के चलते उन्हें कई बड़े सम्मान मिले हैं, जिनमें तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड भी शामिल हैं.

सुप्रिया ने डेब्यू साल 1981 में श्याम बेनेगल की फिल्म कलयुग से किया था. इस फिल्म में उन्होंने सुभद्रा का किरदार निभाया, जो महाभारत से जुड़ी कहानी का हिस्सा था. यह रोल आसान नहीं था, लेकिन उनकी सशक्त परफॉर्मेंस ने सबका ध्यान खींच लिया और पहली ही फिल्म में उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला.

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इसके बाद साल 1982 में आई फिल्म बाजार में सुप्रिया शबनम के रोल में नजर आईं. यह किरदार एक ऐसी लड़की का था, जो सामाजिक दबावों और गरीबी से जूझती है. उनकी संवेदनशील एक्टिंग ने इस किरदार को बेहद प्रभावशाली बना दिया. इसी दौरान वह फिल्म गांधी में भी नजर आईं, जहां उन्होंने महात्मा गांधी की भतीजी का छोटा लेकिन यादगार किरदार निभाया.

1987 में रिलीज हुई मिर्च मसाला में सुप्रिया एक दमदार महिला का रोल निभाया. जो बाकी महिलाओं के साथ मिलकर अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाती है. इस फिल्म में उनकी मौजूदगी कहानी को मजबूती देती है. फिर साल 2005 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म सरकार से उन्होंने दमदार वापसी की.

साल 2013 में संजय लीला भंसाली की फिल्म गोलियों की रासलीला राम-लीला में सुप्रिया पाठक ने दीपिका पादुकोण की मां धनकोर बा का किरदार निभाया. यह एक ताकतवर और खौफ पैदा करने वाली महिला का रोल था. इस रोल के लिए उन्हें एक बार फिर फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया.

जी न्यूज में प्रकाशित खबर के मुताबिक, सुप्रिया पाठक ने 22 साल की उम्र में मां की सहेली के बेटे से प्यार किया था और शादी भी रचा ली थी. लेकिन एक साल बाद दोनों का तलाक हो गया. इस शादी से पछतावा भी होने लगा था. पहली शादी टूटने के बाद उनकी मुलाकात पंकज कपूर से हुई.

पंकज और उनकी पहली मुलाकात भटिंडा हुई थी, फिर क्या था, दोनों प्यार में पड़ गए और शादी का फैसला किया, लेकिन सुप्रिया की मां दीना पाठक को पंकज कपूर पसंद नहीं थे क्योंकि उनकी पहली शादी टूट गई थी. ऐसे में उनकी मां ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वो तुम्हें छोड़ देंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

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‘वो तुम्हें छोड़ देगा’, एक्ट्रेस ने मां की चेतावनी के बाद भी रचाई दूसरी शादी

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