भारत में किसान, कंपनी, कॉरपोरेट कर्मचारी और रेहड़ी-पटरी वाले सबकी कमाई 1 करोड़, कौन देगा सबसे ज्‍यादा टैक्‍स

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नई दिल्‍ली. कमाई पर टैक्‍स लगता है, इतनी सी बात तो हम सभी को पता है. लेकिन, इनकम टैक्‍स कानून की नजर में हर वर्ग की कमाई भी अलग-अलग होती है. मतलब ये कि अगर यह सभी लोग किसी एक वित्‍तवर्ष में एकसमान कमाई करते हैं तो भी इन पर समान रूप से टैक्‍स नहीं लगाया जाएगा, बल्कि इनके वर्ग के हिसाब से टैक्‍स की दर और उसका अमाउंट अलग-अलग होगा. इसकी पड़ताल करने के लिए हमने एक किसान, एक कॉरपोरेट कर्मचारी, एक कॉरपोरेट कंपनी और रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वाले वेंडर की कमाई पर इनकम टैक्‍स की तुलना करके देखी.

इनकम टैक्‍स नियम और उसकी गणना के लिए इन सभी के लिए कमाई का आंकड़ा 1 करोड़ रुपये समान रखा. मसलन, किसी किसी एक वित्‍तवर्ष में देश का किसान, कॉरपोरेट कर्मचारी, रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वाला वेंडर और एक कॉरपोरेट कंपनी की कमाई 1 करोड़ रुपये रखी गई. अब इन सभी के लिए इनकम टैक्‍स की गणना को लेकर एआई ग्रोक से सवाल पूछा और उसने जो भी जवाब दिया, उसे आपके सामने पेश किया जा रहा है. इसे देखकर आप तत्‍काल समझ सकते हैं कि किस पर टैक्‍स का बोझ ज्‍यादा आता है और किस पर कम.

कॉरपोरेट कर्मचारी पर कितना टैक्‍स
सबसे पहले बात करते हैं मिडिल क्‍लास आदमी यानी कॉरपोरेट या यूं कहें कि प्राइवेट सेक्‍टर में काम करने वाले कर्मचारी की. मान लेते हैं कि कोई कॉरपोरेट कर्मचारी सालभर में 1 करोड़ रुपये कमाता है तो उसे कितने रुपये टैक्‍स देने पड़ेंगे. मान लें कि इस कर्मचारी ने नया वाला टैक्‍स रिजीम चुन लिया है, जिसमें स्‍लैब रेट कम होती है तो 24 लाख रुपये से ज्‍यादा की कमाई पर 30 फीसदी टैक्‍स लगता है. इसका मतलब है कि 1 करोड़ की कमाई पर 26.65 लाख रुपये तो सीधा टैक्‍स लगता है. इस पर 15 फीसदी सरचार्ज और 4 फीसदी हेल्‍थ एंड एजुकेशन सेस लगता है. लिहाजा कुल मिलाकर टैक्‍स हो जाएगा 34.66 लाख रुपये.

किसान को कितना देना होगा टैक्‍स
भारतीय इनकम टैक्‍स कानून में सीधा प्रावधान है कि अगर खेती-किसानी से कोई कमाई होती है तो वह पूरी तरह टैक्‍स फ्री रहती है. इनकम टैक्‍स कानून के सेक्‍शन 10(1) के तहत फसल बेचकर या फिर किराये आदि से कमाई होती है तो वह पूरी राशि इनकम टैक्‍स फ्री होनी चाहिए. हालांकि, अगर इसमें कोई गैर कृषि आय होती है तो उस पर टैक्‍स देना पड़ता है, लेकिन एग्रीकल्‍चर इनकम पर टैक्‍स नहीं देना पड़ता है.

स्‍ट्रीट वेंडर्स के लिए क्‍या नियम
रेहड़ी-पटरी पर दुकान लगाने वालों को छोटे कारोबारी की श्रेणी में गिना जाता है. ऐसे कारोबारियों का टर्नओवर 2 से 3 करोड़ तक होता है तो इनकम टैक्‍स की धारा 44AD के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्‍सेशन का लाभ मिलता है. इसके तहत प्रॉफिट को कुल टर्नओवर का 6 से 8 फीसदी मानकर टैक्‍स लगाया जाता है. चूंकि, 1 करोड़ की कमाई पर प्रॉफिट बहुत कम माना जाता है तो इस पर टैक्‍स न के बराबर माना जाएगा. इसका मतलब हुआ कि यह पूरी कमाई एक तरह से टैक्‍स फ्री हो जाएगी.

कंपनी के लिए टैक्‍स का क्‍या नियम
कॉरपोरेट कानून के तहत कंपनी के लिए टैक्‍स की दर घटाई गई थी. इसके तहत छोटी कंपनियों के लिए 25 फीसदी और बड़ी कंपनियों के लिए 30 फीसदी की दर लगाई जाती है. मान लेते हैं कि टैक्‍स की यह गणना छोटी कंपनी के लिए है तो उस पर 25 फीसदी का टैक्‍स स्‍लैब लागू होगा. इस तरह, 1 करोड़ का मुनाफा हुआ है तो कंपनी को 25 लाख रुपये का टैक्‍स देना पड़ता है.

किस पर लगा सबसे ज्‍यादा टैक्‍स
अगर आप ऊपर दिए चारों सेक्‍शन पर लगने वाले टैक्‍स के आंकड़े देखें तो एक नजर में ही साफ हो जाता है कि 1 करोड़ की समान कमाई पर टैक्‍स की सबसे ज्‍यादा मार मिडिल क्‍लास वाले कॉरपोरेट कर्मचारी पर पड़ रही है. उसे जहां 34 लाख रुपये से ज्‍यादा का टैक्‍स देना पड़ रहा है, वहीं कॉरपोरेट कंपनी को 25 लाख तो रेहड़ी-पटरी वाले और किसान को शून्‍य टैक्‍स देना पड़ेगा.

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