Delhi Murder: पहले सजी महफिल फिर हुआ भरोसे का कत्ल, युवक की हत्या की गुत्थी सुलझी, 2 नाबालिग निकले हत्यारे | delhi police new ashok nagar murder case solved two juveniles arrested for strangulation with giloy creeper
नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने न्यू अशोक नगर ब्लाइंड मर्डर केस से पर्दा उठा दिया है. दिल्ली पुलिस के खुलासे के बाद आप हैरान हो जाएंगे कि अपराध और अपराधी का कैरेक्टर कैसे बदल गया है. दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे केस का पर्दाफाश किया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और समाज में बढ़ती किशोर अपराध की प्रवृत्ति पर सवाल खड़े कर दिए हैं. न्यू अशोक नगर थाना पुलिस ने एक 28 वर्षीय युवक की ब्लाइंड मर्डर की गुत्थी को सुलझाते हुए दो नाबालिगों को पकड़ा है. इस हत्याकांड की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आरोपियों ने हत्या के लिए किसी चाकू या हथियार का नहीं, बल्कि औषधीय गुणों वाली ‘गिलोय की बेल’ का इस्तेमाल फंदे के रूप में किया. महज 22 हजार रुपयों के लालच में नाबालिगों ने दोस्ती और भरोसे का कत्ल कर दिया.
घटना की शुरुआत 4 जनवरी 2026 को हुई, जब पुलिस को दल्लूपुरा गांव के एक कमरे में एक युवक के अचेत अवस्था में पड़े होने की सूचना मिली. पीसीआर कॉल मिलते ही न्यू अशोक नगर थाने की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची. कमरे के अंदर का नजारा खौफनाक था. बिस्तर पर 28 वर्षीय मोहम्मद इस्लाम अली का शव पड़ा हुआ था. कमरे में चारों तरफ शराब की खाली बोतलें, प्लास्टिक के गिलास और कुछ स्नैक्स बिखरे हुए थे, जिससे यह साफ था कि मौत से पहले यहां महफिल जमी थी.
कमरे में मिली थी लाश, बिखरी थीं शराब की बोतलें
पुलिस ने तुरंत क्राइम टीम और एफएसएल (FSL) विशेषज्ञों को मौके पर बुलाया. मृतक को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे ‘ब्रॉट डेड’ घोषित कर दिया. शुरुआती जांच में मौत संदिग्ध लग रही थी, इसलिए शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया.
माँ की आपबीती और वेतन की लूट
मृतक की माँ ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा इस्लाम मजदूरी का काम करता था. 3 जनवरी को वह अपनी पूरी महीने की मेहनत की कमाई यानी अपना वेतन लेकर घर लौटा था. उस रात उसकी माँ अपनी बेटी के घर गई हुई थी. जब वह अगली सुबह वापस लौटी, तो उसने देखा कि बेटा कोई जवाब नहीं दे रहा है. 5 जनवरी को जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, तो पुलिस के होश उड़ गए. डॉक्टरों ने साफ किया कि इस्लाम की मौत प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि उसका गला घोंटकर हत्या (Homicidal Strangulation) की गई थी. इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की.
पुलिस की तफ्तीश और ‘माचिस’ का बहाना
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्वी जिले के एडिशनल कमिश्नर अभिषेक धानिया और एसीपी कल्याणपुरी के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम बनाई गई. एसएचओ हारून अहमद के नेतृत्व में इंस्पेक्टर दर्पण सिंह, एसआई तनुज और उनकी टीम ने स्थानीय मुखबिरों और तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि वारदात वाली रात दल्लूपुरा इलाके के ही दो नाबालिग लड़के इस्लाम के कमरे के आसपास देखे गए थे.
3 जनवरी की वो शाम
पुलिस ने जब दोनों नाबालिगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उन्होंने जो खुलासा किया वह दंग करने वाला था. उन्होंने बताया कि 3 जनवरी की शाम वे इस्लाम के कमरे पर ‘माचिस’ मांगने के बहाने गए थे. उन्हें पता था कि इस्लाम को आज ही तनख्वाह मिली है. वहां जाने के बाद उन्होंने इस्लाम के साथ मिलकर शराब पी. जब इस्लाम शराब के नशे में धुत हो गया, तो नाबालिगों की नीयत डोल गई. उन्होंने उसके पास रखे 22,000 रुपये और दो मोबाइल फोन चोरी कर लिए.
गिलोय की बेल बनी मौत का फंदा
चोरी के दौरान इस्लाम की आंख खुल गई और उनके बीच बहस शुरू हो गई. पकड़े जाने के डर से दोनों नाबालिगों ने उसे जान से मारने की साजिश रच डाली. एक नाबालिग ने इस्लाम को कसकर पकड़ लिया, जबकि दूसरे ने पास में ही पड़ी ‘गिलोय की बेल’ उठाई और उसे इस्लाम के गले में लपेटकर पूरी ताकत से खींच दिया. दम घुटने के कारण इस्लाम की मौके पर ही मौत हो गई. आरोपियों ने यह सुनिश्चित किया कि वह मर चुका है, इसके बाद कमरे की लाइट बंद की और चुपचाप वहां से फरार हो गए.
लूट की रकम का बंटवारा और गिरफ्तारी
पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने लूटे गए 22,000 रुपये आपस में बराबर-बराबर बांट लिए थे. पुलिस ने उनकी निशानदेही पर मृतक के दोनों मोबाइल फोन और हत्या में इस्तेमाल की गई गिलोय की बेल भी बरामद कर ली है. पकड़े गए दोनों आरोपी कानून का उल्लंघन करने वाले किशोर (CCLs) हैं, जिन्हें अब जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा. दिल्ली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने एक अंधे कत्ल का राज खोल दिया है, लेकिन इस घटना ने इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन नाबालिगों का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी रहा है.