Sakat Chauth par kyo kata jata hai til ka bakra | सकट चौथ पर आखिर क्यों काटा जाता है तिल का बकरा
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माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का पर्व मनाया जाता है. इस दिन माताएं संतान की लंबी उम्र और परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए व्रत करती हैं. सकट चौथ के दिन कई घरों में तिल से बना बकरा काटा जाता है, आइए जानते हैं इस विशेष परंपरा के पीछे आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है…

हिंदू पंचांग में सकट चौथ का खास महत्व है, इसे संकष्टी चौथ या तिल चौथ भी कहा जाता है. यह व्रत हर साल माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. सकट चौथ के दिन दिन माताएं संतान की लंबी उम्र और परिवार की सुख-शांति के लिए व्रत रखती हैं. इस दिन गणेश पूजन करके तिल-गुड़ से बने प्रसाद का भोग लगाया जाता है. सकट चौथ के दिन ज्यादातर घरों में आपने देखा होगा कि तिल का बकरा बनाया जाता है और उसको काटा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर इस विशेष परंपरा के पीछे का कारण क्या है. क्या इसके पीछे सिर्फ धार्मिक मान्यता है या कोई वैज्ञानिक कारण भी जुड़ा है?
सकट चौथ पर तिल का बकरा क्या होता है?
सबसे पहले भ्रम दूर कर लें कि यहां तिल का बकरा कोई जानवर नहीं होता है. दरअसल, तिल और गुड़ से बनाया गया एक विशेष आकृति वाला प्रसाद होता है, जिसे बकरे के आकार में ढाल दिया जाता है. वहीं कुछ जगहों पर चावल से बकरा बनया जाता है. कई जगह इसे तिलकुट, तिल का पुतला या तिल का प्रतीक भी कहा जाता है. बकरे का प्रतीक बनाने के बाद इसको काटा जाता है और सभी लोगों में बांट दिया जाता है. यह कोई पशु बलि नहीं है बल्कि प्रतिकात्मक क्रिया है. इसका उद्देश्य यह होता है कि बच्चे और परिवार पर आने वाली सभी बाधाएं, नकारात्मक शक्ति, संकट इस प्रतीकात्मक बकरे के काटने से दूर हो जाएंगी.
अहंकार का प्रतीक बकरा
बकरा अहंकार और पशु प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है. तिल के बकरे को काटना दरअसल अपने अंदर की नकारात्मकता, जिद और अहंकार का त्याग दर्शाता है. यानी यह एक प्रतीकात्मक बलि है, ना कि वास्तविक हिंसा. लोक मान्यता है कि सकट माता बच्चों को अकाल मृत्यु और संकट से बचाती हैं. तिल का बकरा चढ़ाने से बच्चे पर आने वाले दोष और बाधाएं टल जाती हैं. इसीलिए यह परंपरा खासतौर पर माताओं के व्रत से जुड़ी है.
वैज्ञानिक वजह
धर्म के साथ-साथ तिल के पीछे ठोस वैज्ञानिक वजह भी है. दरअसल सकट चौथ आमतौर पर माघ महीने में आती है और इस समय ठंड अपने चरम पर होती है. ऐसे में इस महीने तिल खाना बेहद फायदेमंद माना जाता है. तिल शरीर को गर्मी देता है, इम्यूनिटी बढ़ाता है और हड्डियों व जोड़ों को मजबूत करता है. गुड़ आयरन से भरपूर होता है और तिल में कैल्शियम और हेल्दी फैट. ऐसे में दोनों मिलकर कमजोरी, ठंड और थकान से बचाते हैं और शरीर को पूरी तरह एक्टिव रखते हैं.
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मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें