थैलीसीमिया मरीजों के लिए पहली ओरल ड्रग मंजूर, क्या अब मरीज को नहीं चढ़ेगा बार-बार खून, फायदे से कीमत तक जानें हर सवाल का जवाबfirst oral drug Mitapivat is approved by usfda for thalassemia treatment know its benefits price and details from hematologist dr rahul bhargava
थैलीसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए ओरल ड्रग मिटापिवैट (Mitapivat) उम्मीद की किरण बनकर आई है. थैलीसीमिया के लिए इलाज के लिए दुनिया की पहली इस ओरल ड्रग को हाल ही में अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) ने मंजूरी दी है. भारतीय स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो इससे न केवल थैलीसीमिया के इलाज में आने वाली परेशानियों से निजात मिलने की उम्मीद है बल्कि यह दवा बड़ी फायदेमंद भी साबित हो सकती है.
यह दवा अभी भारत में भले ही नहीं आई है लेकिन इलाज की उम्मीद तेज हो गई है. इस बारे में थैलीसीमिया पेशेंट एडवोकेसी ग्रुप और थैलीसीमिया पेशेंट की सचिव अनुभा तनेजा मुखर्जी कहती हैं,’ जहा तक मेरा मानना है, मैं इसे भारत में थैलेसीमिया के मरीजों के लिए एक बहुत बड़ी आशा की किरण के रूप में देखती हूं, बशर्ते इसकी जल्द और सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके. हम अपने डॉक्टरों के साथ मिलकर यह भी जानने का प्रयास कर रहे हैं कि यह थैलीसीमिया के विभिन्न श्रेणियों के मरीजों के लिए कितनी प्रभावी और उपयुक्त है.
मिटापिवैट कैसे काम करती है?
गोली के रूप में मौजूद नव-स्वीकृत यह थेरेपी एक पायरूवेट काइनेज एक्टिवेटर है. यह अपनी श्रेणी की पहली दवा है जिसे लाल रक्त कोशिकाओं के भीतर ऊर्जा संतुलन को बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. थैलेसीमिया रोगियों में लाल रक्त कोशिकाएं नाजुक होती हैं और समय से पहले टूट जाती हैं, जिससे लंबी अवधि का एनीमिया होता है और बार-बार खून चढ़ाने (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की जरूरत पड़ती है. हालांकि पायरूवेट काइनेज को सक्रिय करके यह दवा कोशिकीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाती है, जिससे लाल रक्त कोशिकाएं लंबे समय तक जिंदा रहती हैं और बेहतर ढंग से कार्य करती हैं.
क्या इस थेरेपी के बाद मरीज को बार-बार खून नहीं चढ़ाना पड़ेगा?
इस दवा से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सुधरता है और बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत या तो लंबी अवधि में होती है या कम होने लगती है. दशकों से, वयस्क थैलेसीमिया रोगी मुख्य रूप से रक्त आधान (ट्रांसफ्यूजन) और चेलेशन थेरेपी पर ही निर्भर रहे हैं, जो न केवल मेडिकली जटिल भी है बल्कि इससे क्वालिटी ऑफ लाइफ पर भी बोझ पड़ता है.
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यह किस श्रेणी के थैलीसीमिया के लिए कारगर है?
यह मिटापिवै दवा ट्रांसफ्यूजन-निर्भर और गैर-ट्रांसफ्यूजन-निर्भर दोनों प्रकार के थैलेसीमिया के लिए पहली मौखिक थेरेपी के रूप में स्वीकृत की गई है. यह उपलब्धि केवल चिकित्सकीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि थैलेसीमिया देखभाल के भविष्य की रणनीति के लिहाज से भी एक मील का पत्थर है.
इस दवा के क्या-क्या फायदे मरीजों को होंगे
इससे हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार होने की संभावना तो है ही, थकान कम करना भी एक विकल्प है, साथ ही इससे इलाज का खर्च भी कम होगा और लॉन्ग टर्म में जटिलताएं भी कम होने की संभावना है. इस दवा से उम्मीदें हैं.