धर्म बदलते ही चमक गई किस्मत, रचे जादुई गाने तो कहलाने लगे संगीत के बादशाह, 1 साल में जीते 2 ऑस्कर अवॉर्ड
Last Updated:
हम जिस शख्सियत की बात कर रहे हैं, उनका बचपन में दिलीप कुमार नाम था. उन्होंने करीब 20 साल की उम्र में अपना धर्म बदला, तो उनके संगीत में रुहानियत की झलक मिलने लगी. उन्होंने अपने संगीत और गायकी से भारतीय सिनेमा पर जादुई असर छोड़ा और एक ही साल में दो ऑस्कर अवॉर्ड जीतकर इतिहास रच दिया. क्या आपने उन्हें पहचाना?
भारत सरकार संगीतकार को पद्म भूषण से सम्मानित कर चुकी है. (AI से जेनरेटेड इमेज)नई दिल्ली: जब संगीत की बात आती है, तो भारतीयों के दिलों में एक नाम गूंजता है. उन्हें ‘मोजार्ट ऑफ मद्रास’ भी कहा जाता है. उनका संगीतमय सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. संगीतकार का जन्म 6 जनवरी 1967 को तमिलनाडु में हुआ था. वे शुरू में दिलीप कुमार नाम से पहचाने गए. उन्होंने अभावों से लड़कर अपने सुरों की दुनिया बनाई, जिसकी गूंज आज लॉस एंजिल्स के ऑस्कर वेन्यू डॉल्बी थिएटर तक पहुंची है. हम एआर रहमान की बात कर रहे हैं.
विरासत में सुर के साथ मिला बचपन में स्ट्रगल
एआर रहमान के पिता आरके शेखर मलयालम फिल्मों के जाने-माने संगीतकार थे. महज 4 साल की उम्र में एआर रहमान ने पियानो से दोस्ती कर ली थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. जब रहमान सिर्फ 9 साल के थे, उनके पिता का साया सिर से उठ गया. घर की आर्थिक स्थिति इतनी चरमरा गई कि पिता के म्यूजिकल स्ट्रूमेंट को किराए पर देकर गुजारा करना पड़ा. परिवार की जिम्मेदारी के बोझ तले दबे एआर रहमान को 15 साल की उम्र में स्कूल छोड़ना पड़ा. आपको जानकर हैरानी होगी कि उनकी पहली कमाई महज 50 रुपये थी, जो उन्होंने एक रिकॉर्डिंग के दौरान साज बजाकर कमाई थी.
धर्म बदलने के बाद संगीत में उदय
एआर रहमान के जीवन में 20 साल की उम्र में बड़े बदलाव आए. उनकी छोटी बहन की गंभीर बीमारी और एक सूफी संत की शिक्षाओं ने उन्हें इस्लाम को अपनाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने अपनी आस्था बदली और दिलीप कुमार से अल्लाह रक्खा रहमान बन गए. यह सिर्फ नाम का बदलाव नहीं था, बल्कि उनके संगीत में एक नई रूहानी गहराई की शुरुआत थी.
फैंस के दिलों में बसते हैं एआर रहमान. (फाइल फोटो)
आंगन का वो जादुई स्टूडियो
एआर रहमान की महानता की नींव उनके घर के आंगन में रखे एक छोटे से होम रिकॉर्डिंग स्टूडियो से पड़ी. जहां उस दौर के संगीतकार बड़े स्टूडियो में रिकॉर्डिंग करते थे, एआर रहमान ने अपने छोटे से कमरे में तकनीक और धुन का ऐसा मेल बिठाया कि फिल्मकार मणिरत्नम दंग रह गए. उन्होंने 1992 की फिल्म ‘रोजा’ से भारतीय संगीत की दिशा ही बदल दी.
बॉलीवुड से हॉलीवुड तक
‘रोजा’ के बाद ‘रंगीला’, ‘ताल’, ‘लगान’ और ‘रंग दे बसंती’ जैसी फिल्मों ने उन्हें देश का सबसे बड़ा संगीतकार बना दिया. लेकिन असली धमाका तब हुआ, जब फिल्म ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ के गाने ‘जय हो’ ने पूरी दुनिया को झूमने पर मजबूर कर दिया. आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, वे एक साल में 2 ऑस्कर अवॉर्ड जीतने वाले पहले भारतीय हैं. उन्होंने 2 ग्रैमी अवॉर्ड भी अपने नाम किए थे. वे छह नेशनल और 15 फिल्मफेयर अवॉर्ड भी जीत चुके हैं. भारत सरकार उन्हें पद्म भूषण अवॉर्ड भी दे चुकी है.
About the Author
अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें