नाइजीरिया से भारत आए शख्स ने बनाई ऐसी हिंदी फिल्म, जीता बेस्ट मूवी का अवॉर्ड, तरसा रहा मन – Sanjay mishra Rajat kapoor phans gaye re obama ankhon dekhi movies made within 4 years both films flop at box office turn cult movie winning hearts
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Bollywood Cult Movies : कुछ फिल्में जब सिनेमाघरों में रिलीज होती हैं, तब कई वजहों से फ्लॉप हो जाती हैं. कुछ की कहानी दर्शक शुरुआत में समझ नहीं पाते. कुछ को ज्यादा स्क्रीन नहीं मिल पातीं. ऐसा कम बजट की फिल्मों के साथ ज्यादा होता है. जब यही फिल्में टीवी-यूट्यूब पर आती हैं तो दिल जीत लेती हैं. तीन साल के अंतराल में ऐसी ही दो फिल्में सिनेमाघरों में आई थीं. दोनो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गईं लेकिन आज दोनों की गिनती अंडररेटेड फिल्मों में होती है. एक मूवी ने बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड भी जीता. इन फिल्मों के प्रति दर्शकों की दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक को IMDB पर 7.5 जबकि दूसरी फिल्म को 7.9 की रेटिंग मिली हुई है. ये दोनों फिल्में कौन सी हैं, आइये जानते हैं…….

कई बार भारी बजट की फिल्में वो दिल में उतनी रोचकता पैदा नहीं कर पाती, जितना कोई एक छोटे बजट की फिल्म कर दिखाती है. ऐसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर भले ही फ्लॉप हो जाएं लेकिन ओटीटी और यूट्यूब पर इन्हीं मूवी को दर्शक सबसे ज्यादा देखते हैं. चार साल के अंतराल में ऐसी ही दो फिल्में रिलीज हुई थीं. दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहीं लेकिन दर्शकों के दिल में राज इन्हीं फिल्मों नें किया. आएमडीबी पर हाई रेटिंग मिली हुई है. ये फिल्में थीं : फस गए रे ओबामा और आंखों देखी. आंखों देखी को तो तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिले थे. आइये जानते इन कल्ट मूवी से दिलचस्प फैक्ट्स…….

सबसे पहले बात करते हैं 3 दिसंबर 2010 को रिलीज हुई ‘फस गए रे ओबामा’ फिल्म की जिसमें रजत कपूर, नेहा धूपिया, मनु ऋषि, संजय मिश्रा और अमोल गुप्ते लीड रोल में नजर आए थे. यह एक सैटारिकल ब्लैक कॉमेडी फिल्म थी जिसे सुभाष कपूर ने लिखा था. फिल्म का डायरेक्शन भी सुभाष कपूर ने ही किया था. म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर मनीष और जे. टीपू ने कंपोज किया था. गाने शैली और गोपाल तिवारी ने लिखे थे. फिल्म को रेवेल फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया था. वार्नर ब्रदर्स डिस्ट्रीब्यूटर्स थे. फिल्म की कहानी अमेरिका में 2008-09 के दौरान आई आर्थिक मंदी पर बेस्ड थी. फिल्म में इंग्लिश टीचर के एक छोटे से रोल में इश्तियाक खान ने वाहवाही लूट ली थी.

सुभाष कपूर के मन में आर्थिक मंदी पर फिल्म बनाने का आइडिया ‘सलाम इंडिया’ के बाद आया था. वो फिल्म बनाना चाहते थे तो प्रोड्यूसर मंदी का हवाला देते थे. यह मंदी यूएस की देन थी. ऐसे में उन्होंने व्यंग्यात्मक तरीके से अपने गुस्से को एक स्क्रिप्ट का रूप दिया. सुभाष कपूर ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘मैंने सोचा कि इस मंदी से अंडरवर्ल्ड और राजनेता क्यों प्रभावित नहीं है. मैंने इसी पर कहानी लिखी.’ माना जाता है कि फिल्म में अमोल गुप्ते का कैरेक्टर यूपी के बाहुबली नेता डीपी यादव और झारखंड के शिबू सोरेन से इंस्पायर्ड था.
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फिल्म में इंग्लिश टीचर बने इश्तियाक खान का एक आइकॉनिक सीन था. इस सीन में इश्तियाक खान कहते हैं, ‘यू डंकी फेलो, यू टुगेदर थिंकिंग इंग्लिश स्पीकिंग लाइक ए राइस प्लेट ईटिंग. नो, नॉट ऑल. इंग्लिश स्पीकिंग इज ए अंडरटेकर प्ले. ताज महल क्रिएट….’ इश्तियाक खान ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘ उन दिनों मैं स्ट्रगल कर रहा था. निखिल द्विवेदी मेरे मित्र हैं. जब उन्हें पता चला कि फंस गए रे ओबामा बन रही है तो उन्होंने मुझ नरेंद्र भाई से संपर्क करने को कहा. नरेंद्र ने कहा कि तीन-चार लाइन का कैरेक्टर है. आप एनएसडी पासआउट हैं. हम नहीं चाहते कि आप यह रोल करें. लाइनें बहुत अच्छी थीं. टीचर इंटर नो नोटिस, फुल इन्सल्टिंग. मैंने इंप्रोवाइज किया. फिर सुभाष कपूर ने चुनिंदा लाइनें रख लीं.’

डायरेक्टर बनने से पहले सुभाष कपूर एक पत्रकार थे. उन्होंने उत्तर भारत में खासा काम किया है. उनकी फिल्मों की भाषा और कैरेक्टर उत्तर भारत से ही आते हैं. यही वजह है कि उन्होंने ‘किडनैपिंग’ इंडस्ट्री कैसे काम करती है, इसे फिल्म में दिखाया. फंस गए रे ओबामा फिल्म हंसा-हंसाकर पेट फुला देती है और अंत में एक खूबसूरत मैसेज देकर भी जाती है. फिल्म में नेहा धूपिया का रोल ‘लार्जर दैन लाइफ’ जैसा बनकर सामने आया. लेडी गैंगस्टर का रोल निभाया था. फिल्म में संजय मिश्रा के रोल को भला कौन भुला सकता है. उन्हें बेहतरीन एक्टिंग से सबका दिल जीत लिया था. बेस्ट परफॉर्मेंस के लिए उन्हें बेस्ट कॉमेडियन का स्टार स्क्रीन अवॉर्ड भी मिला था. 6 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 14 करोड़ का कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म फ्लॉप रही थी.

अब 2014 में रिलीज हुई एक और कल्ट मूवी ‘आंखों देखी’ की बात करते हैं. ‘आंखों देखी’ फिल्म को रजत कपूर ने लिखा था. डायरेक्शन भी रजत कपूर ने ही किया था. रजत कपूर ने फिल्म में काम भी किया था. प्रोड्यूसर मनीष मुंद्रा थे. फिल्म में संजय मिश्रा और रजत कपूर, सीहा पहवा और तंजीत कौर लीड रोल में थे. फिल्म 21 मार्च 2014 को रिलीज हुई थी. फिल्म की कहानी अनुभववाद पर बेस्ड है. जो आंखों से देखा, वही सच है. बाऊजी का रोल निभाने वाले संजय मिश्रा उसी चीज में भरोसा करते हैं जो अपनी आंखों से देखते हैं. फिल्म समीक्षकों ने इस मूवी को बहुत सराहा था. म्यूजिक सागर देसाई ने कंपोज किया था. गीतकार वरुण ग्रोवर थे.

यह फिल्म जब सिनेमाघरों में आई तो डिजास्टर साबित हुई लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरा, फिल्म की अहमियत लोगों को समझ आई. सच्चा सिनेमा देखने वालों के लिए यह फिल्म किसी ‘खजाना’ से कम नहीं. आज इस फिल्म की गिनती कल्ट मूवी में होती है, जिसकी एक फैन फॉलोइंग है. आंखों देखी फिल्म के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का स्क्रीन अवॉर्ड जीतने वाली सीमा पहवा ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘आंखों देखी मेरे करियर की बेस्ट फिल्म है. उस फिल्म की स्क्रिप्ट सबसे मजबूत थी. उसमें सभी तरह के शेड थे. मां की जर्नी, बेटी की समय पर शादी हो जाए, उसका लड़का बड़ा होकर किसी गलत काम में ना पड़े, यही हर महिला का सपना होता है लेकिन उसका लड़का जुआ खेलने लगता है, लड़की घर से प्रेमी के साथ भागने को तैयार बैठी है, उसे सहारा था अपने पति का लेकिन वो भी अजीब-अजीब हरकतें करने लगा है, वो किसी और चीज की खोज में है, ऐसे में वो औरत उस घर को फिर से बनाने की जद्दोजहद करती है.’

आंखों देखी फिल्म ने तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते थे. संजय मिश्रा को बेस्ट एक्टर का, बेस्ट फिल्म का और बेस्ट स्टोरी का अवॉर्ड रजत कपूर को मिला था. संजय मिश्रा ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘आंखों देखी फिल्म ने जिंदगी के प्रति मेरा नजरिया भी बदल दिया. आप किसी दूसरे के कहे मुताबिक, अपनी जिंदगी की डायरी भर रहे होते हैं, आप उसके पास जाइये. एक लाइन है कि समाज जिसे बुरा-भला कहे, उसे कभी कुछ मत कहिए.’

4.75 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने महज 1.1 करोड़ की कमाई की थी. यह एक डिजास्टर फिल्म साबित हुई थी. फिल्म बहुत ही ज्यादा दार्शनिक थी. जिंदगी को सिर्फ अपनी आंखों से देखकर समझाने की कोशिश की गई है. जिंदगीभर हम वही मानते हैं, जो लोगों से सुनते हैं. आंखों देखी फिल्म सच का रिश्ता इंसान से जोड़ती है. उसे आजादी देती है. रिश्तों का मतलब, दुनिया का दिखावा, भगवान का सच सबकुछ फिल्म दिखाती है. आंखों देखी एक फिल्म नहीं बल्कि सोच है जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि आंखों देखी फिल्म को मनीष मुंद्रा ने प्रोड्यूस किया था, जो कि नाइजीरिया में रहते थे. मनीष मुंद्रा वैसे तो झारखंड के रहने वाले हैं. उन्होंने नाइजीरिया में नौकरी के दौरान रजत कपूर को संपर्क किया और फिल्म प्रोड्यूस करने की इच्छा जताई.