Mars planet astrology। मंगलवार को कर्ज लेना चाहिए या नहीं

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Tuesday Money Rules: हमारे देश में जब भी कोई नया काम शुरू करना होता है, लोग सबसे पहले दिन, तिथि और ग्रह-नक्षत्र पर ध्यान देते हैं. हर दिन किसी न किसी देवता और ग्रह का माना जाता है, और उस दिन से जुड़े कुछ नियम और मान्यताएं भी मौजूद हैं. इन्हीं में से एक है मंगलवार. हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और ग्रह मंगल से जुड़ा माना जाता है. मंगल ग्रह को उग्र स्वभाव और तेज ऊर्जा का संकेत समझा जाता है. यही वजह है कि इस दिन कुछ काम करने के लिए मना किया जाता है, जिनमें से सबसे बड़ा है कर्ज का लेन-देन. लोगों का मानना है कि मंगलवार को कर्ज लेना किसी मुसीबत को खुद बुलाने जैसा होता है. कहा जाता है कि इस दिन लिया गया कर्ज धीमे-धीमे खत्म नहीं होता, बल्कि आगे बढ़ता जाता है, जैसे ज्वाला पर घी डाला हो. इसे सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि कई ज्योतिषाचार्य भी मानते हैं. शास्त्रों में इस दिन को ऐसे कामों से दूर रहने की सलाह दी गई है जिनसे आर्थिक बोझ बढ़ सकता है. इस दिन अगर गलती से कर्ज ले लिया जाए, तो माना जाता है कि व्यक्ति लंबे समय तक उस चक्र में फंसा रहता है.

कई लोग ये भी मानते हैं कि अगर कोई पहले से ही कर्ज में डूबा हुआ है, तो मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करके राहत मिल सकती है. इस दिन सुंदरकांड का पाठ करना, हनुमान चालीसा पढ़ना और सिंदूर चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है. माना जाता है कि इससे मनोबल बढ़ता है, नेगेटिविटी दूर होती है और आर्थिक स्थितियां सुधारने का रास्ता मिलता है. अब सवाल ये है कि आखिर क्यों मंगलवार को कर्ज देने-लेने को लेकर इतनी सख्त मान्यता है? इसमें ज्योतिष और परंपरा का क्या रोल है? और क्या इस मान्यता के पीछे कोई तर्क भी जुड़ा हुआ है? आइए इस पूरे विषय को आसान भाषा में समझते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.

मंगलवार को कर्ज लेने से क्यों मना किया जाता है?
मंगलवार का संबंध सीधे मंगल ग्रह से माना जाता है. ज्योतिष में मंगल को फायर एलिमेंट माना गया है, यानी इसकी ऊर्जा अग्नि की तरह तेज और प्रभावशाली होती है. इसका असर सीधे आत्मविश्वास, गुस्सा, संघर्ष, मेहनत और अचानक आई परेशानियों पर देखा जाता है. कहा जाता है कि अगर इस दिन कर्ज लिया जाए, तो यह अग्नि की तरह फैलता जाता है. इसका मतलब है कि जितना कर्ज लिया जाए उससे कई गुना ज्यादा चुकाना पड़ सकता है. कई लोग बताते हैं कि ऐसा करने पर हमेशा पैसों की तंगी बनी रहती है, या फिर पैसा आने से ज्यादा खर्च होने लगता है. ये भी माना जाता है कि इस दिन लिया गया कर्ज घर में तनाव, झगड़े और मानसिक दबाव की वजह बन सकता है. कई परिवारों में ये भी रिवाज है कि मंगलवार को किसी से पैसे उधार लेना तो दूर, किसी के घर पैसे उधार देने के लिए भी मना किया जाता है. क्योंकि ऐसा करने से घर की वित्तीय ऊर्जा कम होती है और पैसा लौटकर आने में दिक्कत आती है.

धार्मिक मान्यता: हनुमान जी और मंगलवार
मंगलवार को संकटमोचन हनुमान जी का दिन माना जाता है. इस दिन हनुमान जी को सिंदूर और जस्तै का प्रसाद चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है. ऐसा करने से घर में नेगेटिविटी कम होती है और आर्थिक परिस्थितियों में सुधार शुरू होता है. कई लोग मानते हैं कि मंगलवार को कर्ज लेने से हनुमान जी नाराज होते हैं, क्योंकि यह दिन उनके भक्ति, धैर्य, ऊर्जा और आत्मविश्वास का दिन है, जबकि कर्ज लेना आर्थिक दबाव और परेशानी को बुलाने जैसा है. इसलिए ये दिन किसी भी तरह की उधारी शुरू करने के लिए अनुकूल नहीं माना गया.

क्या मंगलवार को कर्ज चुकाना ठीक है?
जी हां!
जहां एक तरफ मंगलवार को कर्ज लेना मना है, वहीं इस दिन कर्ज चुकाना शुभ माना जाता है, अगर आप किसी पुराने कर्ज से परेशान हैं और उससे मुक्ति चाहते हैं, तो मंगलवार से शुरुआत करना भाग्यशाली माना जाता है, अगर आप पहली किस्त इसी दिन भरते हैं, तो कहा जाता है कि कर्ज जल्दी उतरता है और आर्थिक स्थिति संभलने लगती है. कई लोग यहां तक कहते हैं कि अगर मंगलवार को दान-पुण्य किया जाए, किसी जरूरतमंद की मदद की जाए या मंदिर में प्रसाद चढ़ाया जाए, तो धन से जुड़ी रुकावटें कम होती हैं.

क्या ये मान्यता वैज्ञानिक है?
धार्मिक मान्यताओं का सीधा वैज्ञानिक तर्क कम ही मिलता है, लेकिन मानसकिक और व्यवहारिक स्तर पर देखा जाए तो इसका प्रभाव जरूर दिखता है.
उदाहरण के तौर पर:
-अगर कोई पहले ही आर्थिक दबाव में है और हफ्ते की शुरुआत में ही कर्ज ले ले, तो तनाव बढ़ेगा.
-मंगल का स्वभाव उग्र माना जाता है, इसलिए मन पर इसका असर माना गया होगा.
-हफ्ते में एक दिन ऐसे कामों से दूर रहने की परंपरा शायद पुराने समय में अनुशासन को ध्यान में रखकर बनाई गई हो.

इसलिए पूरी तरह से नकारना या पूरी तरह से मान लेना दोनों ही छोर पर खड़ा होना है. सही रास्ता यही है कि मान्यता का सम्मान करते हुए अपनी आर्थिक स्थिति पर नजर रखें और फैसला सोच-समझकर लें.

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