Saturn in 8th House effects। शनि के आठवें भाव के उपाय

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Saturn In 8th House: ज्योतिष में शनि को ऐसा ग्रह माना जाता है जो इंसान की ज़िंदगी में बड़े बदलाव लाता है. शनि जहां भी बैठता है, उस भाव के मुताबिक जीवन में उतार-चढ़ाव, संघर्ष, मेहनत, सीख, उपलब्धि और कभी-कभी सज़ा जैसी स्थिति भी देता है. लोग शनि को अकसर डर के नजरिए से देखते हैं, लेकिन सच ये है कि शनि कभी भी बिना वजह किसी को परेशान नहीं करता. वो कर्मों का फल देने वाला ग्रह है. अच्छे कर्म का अच्छा फल, गलत काम का कठिन सबक -यही शनि की पहचान है. अब बात करें अगर शनि कुंडली के आठवें भाव में बैठ जाए, तो ज्यादातर लोग ये सुनकर डर जाते हैं. आठवां भाव खुद में एक रहस्यमयी जगह माना जाता है ये भाव जीवन के छुपे पहलू, मृत्यु, दुर्घटना, अचानक मिले लाभ, बीमा, विरासत, दाम्पत्य सुख, ससुराल और गुप्त ज्ञान से जुड़ा होता है. ऐसे में यहां शनि का बैठना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि शनि जहां बैठता है वहां देरी ज़रूर करता है, लेकिन मेहनत और धैर्य से हर स्थिति को बदलने की ताकत भी देता है. आठवें भाव में शनि कुछ लोगों के जीवन में अचानक से बदलाव लेकर आता है कभी अच्छा, कभी संघर्ष से भरा.

ये बदलाव भावनाओं, रिश्तों, पैसों और दिमागी संतुलन पर असर डालते हैं, अगर यह ग्रह मजबूत हो तो इंसान गहरी आध्यात्मिक साधना, रिसर्च, ज्योतिष, चिकित्सा, रहस्यमय ज्ञान और विदेश से लाभ तक पा सकता है, लेकिन अगर शनि कमजोर या पीड़ित हो, तो परेशानियां, ससुराल से दूरी, पैसों में रुकावट, बीमारी और अनचाहे तनाव जैसी दिक्कतें दे सकता है. आइए अब समझते हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह शनि आठवें भाव में होने के सकारात्मक, नकारात्मक प्रभाव और आसान उपाय, जिससे जीवन में संतुलन और राहत पाई जा सके. (राहुल काल्पनिक नाम है)

शनि आठवें भाव के सकारात्मक प्रभाव
-इंसान की सोच गहरी हो जाती है और वो सतही चीज़ों में नहीं उलझता.
-रहस्यमयी विषयों में रुचि बढ़ती है जैसे ज्योतिष, तंत्र, गूढ़ विद्या, मेडिकल रिसर्च.
-अचानक धन या फायदा मिलने की संभावना बनी रहती है, खासकर बीमा, टैक्स, लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट में.
-जीवनसाथी के परिवार से समय के साथ सहयोग और सम्मान मिलता है (अगर शनि शुभ हो).
-कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं टूटता, बल्कि इंसान मजबूत बनकर उभरता है.
-विदेश यात्रा या विदेश में रहकर काम का अवसर मिल सकता है.
-बीमारियों के सामने लड़ने की क्षमता ज्यादा होती है.

शनि आठवें भाव के नकारात्मक प्रभाव
-शादीशुदा रिश्तों में शुरू में तनाव या गलतफहमी बढ़ सकती है.
-ससुराल पक्ष से दूरी, झगड़ा या ठंडा रिश्ता संभव.
-अचानक होने वाली परेशानियां जैसे एक्सीडेंट, ऑपरेशन या पैसा अटकना.
-बीमारी या कमजोरी लंबे समय तक परेशान कर सकती है, खासकर हड्डी, नर्व्स या स्किन से जुड़ी दिक्कतें.
-मानसिक दबाव, अनिद्रा, चिंता या अलग-थलग महसूस करने की स्थिति.
-मेहनत ज्यादा, पहचान कम मिलने की दिक्कत, लेकिन समय के साथ हालात सुधरते हैं.
-गुस्सा अंदर ही अंदर बढ़ता है, जिससे रिश्तों पर असर पड़ सकता है.

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शनि आठवें भाव के असर को कब समझें?
अगर जीवन में बार-बार ये चीजें हो रही हों, तो समझें कि शनि सक्रिय असर दे रहा है —
-अचानक आर्थिक उतार-चढ़ाव
-रिश्तों में खिंचाव
-काम में देरी या रुकावट
-स्वास्थ्य में लंबे समय तक खिंचने वाली परेशानी
-बिना वजह मानसिक बोझ

शनि आठवें भाव के उपाय (सरल और प्रभावी)
-शनिवार या बुधवार को किसी ज़रूरतमंद को काला कपड़ा, काली दाल या तेल दान करें.
-पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं (गले में से पूजा का सिंदूर या चंदन मत लगाएं, सिर्फ पानी).
-हर शनिवार को लोहे की एक छोटी कील बहते पानी में प्रवाहित करें.
-काले या नीले रंग का रूमाल अपने पास रखें.
-किसी बुजुर्ग या सफाई कर्मचारी का सम्मान करें, मदद करें.
-मन को शांत रखने के लिए रोज कम से कम 10 मिनट ध्यान या मंत्र जप:
“ॐ शं शनैश्चराय नमः”
-शराब, झूठ, धोखा, दूसरों को नुकसान पहुंचाने जैसी आदतों से दूर रहें -शनि तुरंत असर दिखाता है.

शनि आठवें भाव में डरने वाली बात नहीं, बल्कि समझने वाली स्थिति होती है. ये ग्रह हमें परखता है, मजबूत बनाता है और धीरे-धीरे हमारी लाइफ में सुधार करता है. जिम्मेदारी, ईमानदारी, धैर्य और अच्छे कर्म ही इस ग्रह को खुश करने का असली रास्ता हैं.

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