जा बेवफा जा तुझे प्यार नहीं करना… पति ने दिल पर पत्थर रखकर खुद ही कर दी पत्नी की प्रेमी के साथ विदाई | husband sends wife with lover | police station settlement | pati patni aur wo love unique story | pratapgarh news

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प्रतापगढ़. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए. इसे आधुनिकता का असर कहें या रिश्तों का पतन, लेकिन अंतू थाना क्षेत्र में जो हुआ उसने समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां एक पति को अपनी ही पत्नी की विदाई उसके प्रेमी के साथ करनी पड़ी. यह फैसला किसी खुशी का नहीं, बल्कि उस गहरे जख्म और मजबूरी का नतीजा था, जहां एक पुरुष ने अपने आत्मसम्मान और बच्चों के भविष्य को बचाने के लिए अपनी जीवनसंगिनी को हमेशा के लिए विदा कर दिया.

कहानी अंतू थाना क्षेत्र के एक गांव की है, जहां एक युवक अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ सादगी से जीवन बिता रहा था. सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन कुछ समय पहले पत्नी की जिंदगी में ‘वो’ यानी बगल के गांव का एक युवक दाखिल हुआ. धीरे-धीरे मेल-मुलाकातें बढ़ीं और फिर यह सिलसिला प्यार के जुनून तक पहुंच गया. महिला अपने पति और बच्चों को भूलकर अक्सर चोरी-छिपे अपने प्रेमी से मिलने लगी.

वो ‘तीसरा’ जिसने उजाड़ दी हस्ती-खेलती गृहस्थी

पति ने कई बार उसे समझाने की कोशिश की, मिन्नतें कीं और बच्चों की दुहाई दी, लेकिन प्यार के नशे में अंधी हो चुकी महिला पर किसी बात का असर नहीं हुआ. वह आए दिन घर छोड़कर प्रेमी के पास चली जाती थी. यह सिलसिला जब हद से गुजर गया और समाज में बदनामी होने लगी तो पति ने वह फैसला लिया जिसे लेना किसी भी स्वाभिमानी पुरुष के लिए मुमकिन नहीं होता.

थाने में हुआ अजीबोगरीब समझौता

शनिवार को यह हाई-वोल्टेज ड्रामा अंतू थाने तक पहुंच गया. पति, पत्नी और उसका प्रेमी तीनों पुलिस के सामने खड़े थे. महिला ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर साफ शब्दों में कह दिया कि वह अब अपने पति के साथ नहीं, बल्कि प्रेमी के साथ रहना चाहती है. पुलिस के लिए भी यह स्थिति अजीब थी, क्योंकि जब दो बालिग आपसी सहमति से अलग होना चाहें और महिला किसी के साथ जाने पर अड़ जाए, तो कानून भी बेबस हो जाता है.

थाने में ही दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हुआ. पति ने महसूस किया कि जो महिला अपने बच्चों की ममता को ठुकरा सकती है, वह उसकी कभी नहीं हो सकती. उसने दिल पर पत्थर रखा और प्रेमी के हाथों में अपनी पत्नी का हाथ सौंप दिया. उसने तय किया कि वह अब इस कलह को रोज-रोज सहने के बजाय अपनी पत्नी की विदाई कर देगा ताकि घर की शांति लौट सके.

उन मासूम बच्चों का क्या होगा?

इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा और दुखद सवाल उन दो मासूम बच्चों का है, जिनकी दुनिया रातों-रात बिखर गई. जिस उम्र में बच्चों को मां के आंचल की छांव चाहिए होती है, उस उम्र में उनकी मां ने उन्हें एक अजनबी के लिए लावारिस छोड़ दिया. बच्चों के पिता ने उन्हें अपने पास रखने का फैसला किया है.

अब वो पिता ही उनके लिए मां भी बनेगा और पिता भी. समाज के लिए यह एक डरावनी सच्चाई है कि एक मां की ममता पर वासना और स्वार्थ इस कदर हावी हो गया कि उसे अपने बच्चों के रोते हुए चेहरे भी नजर नहीं आए. उन बच्चों के मानस पटल पर इस घटना का जो प्रभाव पड़ेगा, उसकी भरपाई शायद कोई कानूनी समझौता कभी नहीं कर पाएगा.

समाज के लिए आईना या सबक?

प्रतापगढ़ की यह घटना केवल एक ‘अवैध संबंध’ की कहानी नहीं है, बल्कि यह हमारे बदलते सामाजिक ताने-बाने का एक क्रूर ‘आईना’ है. क्या आज के दौर में शादी जैसे पवित्र बंधन की कोई अहमियत रह गई है? अक्सर देखा गया है कि पड़ोस और नजदीकी जान-पहचान में ऐसे रिश्ते पनप रहे हैं, जो परिवारों को खत्म कर रहे हैं. यह घटना एक सबक है उन लोगों के लिए जो भावनाओं में बहकर अपने बच्चों का भविष्य दांव पर लगा देते हैं.

कानूनी रूप से भले ही वह महिला स्वतंत्र हो, लेकिन नैतिक रूप से उसने एक पिता का विश्वास और बच्चों का बचपन छीन लिया है. पति का यह फैसला कि जाओ, खुश रहो अपने प्रेमी के साथ, उसकी महानता नहीं बल्कि उसकी चरम हताशा को दर्शाता है. यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं जहां निजी सुख, सामूहिक पारिवारिक जिम्मेदारी से बड़ा हो गया है? अंतू थाने से जब वह महिला प्रेमी के साथ निकली, तो पीछे छूट गए सिसकते बच्चे और एक पत्थर बन चुका पति, जो शायद अब कभी किसी रिश्ते पर भरोसा न कर पाए.

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