गले में फंस गई मछली का कांटा, हराम कर दी रात भर की नींद, तड़पता रहा मरीज, डॉक्टरों ने बचाई जान | fish bone removal success story endoscopy surgery relief delhi news dr bsa medical college hospital rohini ent department | Machli ki haddi gale mein fansi

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Machli ki haddi gale mein fansi: देश की राजधानी दिल्ली में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है. मछली खाते समय एक शख्स के गले में मछली का कांटा फंस गया. रोहिणी के डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर (BSA) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के ईएनटी (ENT) विभाग ने एक मरीज को असहनीय दर्द से निजात दिलाकर बड़ी सफलता हासिल की है. यह मामला उन तमाम लोगों के लिए एक सबक है जो मछली खाने के शौकीन हैं लेकिन उसे खाते समय जरूरी सावधानी नहीं बरतते. एक छोटी सी मछली का कांटा गले में इस कदर फंस गया कि मरीज की पूरी रात सिसकते हुए बीती. न वह कुछ खा पा रहा था और न ही चैन की नींद ले पा रहा था. लेकिन डॉक्टरों की सूझबूझ से उसकी जान बचाई गई.

घटना की शुरुआत शनिवार रात हुई जब एक व्यक्ति बड़े चाव से मछली का आनंद ले रहा था. खाने के दौरान अचानक एक नुकीली हड्डी उसके गले में उतर गई. शुरू में उसने सोचा कि शायद यह पानी या रोटी के टुकड़े के साथ नीचे चली जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. जैसे-जैसे समय बीता, दर्द बढ़ता गया. मरीज को गले में तेज जलन, चुभन और कुछ भी निगलने में भारी कठिनाई महसूस होने लगी. वह पूरी रात बिस्तर पर करवटें बदलता रहा. उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कोई सुई उसके गले के अंदर लगातार चुभ रही हो. स्थिति इतनी खराब हो गई कि उसे थूक निगलने में भी परेशानी होने लगी. जब सुबह तक दर्द कम नहीं हुआ, तो वह भागते हुए डॉ. बी.एस.ए. मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग पहुंचा.

एक निवाले ने छीन ली रात की नींद

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की. ईएनटी विभाग के विशेषज्ञों ने मरीज की शारीरिक जांच के बाद एंडोस्कोपिक एग्जामिनेशन करने का निर्णय लिया. बता दें कि एंडोस्कोपी एक ऐसी तकनीक है जिसमें एक पतली नली और कैमरे के जरिए शरीर के अंदरूनी हिस्सों को स्क्रीन पर देखा जाता है. जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि मछली की एक लंबी और नुकीली हड्डी जीभ के निचले हिस्से और वैलेकुला के पास गहराई में फंसी हुई थी. यह हिस्सा गले का काफी संवेदनशील भाग होता है.

एंडोस्कोपी की मदद से निकाला गया कांटा

रोहिणी के डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर की टीम ने बड़ी ही सावधानी और सटीकता के साथ एंडोस्कोपिक उपकरणों का उपयोग किया और बिना किसी चीर-फाड़ या जटिलता के उस हड्डी को बाहर निकाल लिया. हड्डी निकलते ही मरीज को राहत महसूस हुई और उसके चेहरे पर संतोष की लहर दौड़ गई.

डॉक्टरों की सलाह

डॉ पंकज कुमार कहते हैं, अगर मछली का कांटा फंस जाता है और डॉक्टरों के पास आने में देरी होती है तो यह जानलेवा भी हो सकता है. ऐसे में जब भी गले में कोई बाहरी चीज जैसे मछली की हड्डी या कांटा, सिक्का या पिन फंस जाए तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. यदि कांटा लंबे समय तक अंदर फंसी रह जाए तो वह गले के कोमल ऊतकों को जख्मी कर सकती है, जिससे गंभीर संक्रमण हो सकता है. गले के अंदर मवाद या फोड़ा बन सकता है, जिसे ठीक करना काफी मुश्किल और दर्दनाक होता है. कई बार हड्डी गले से खिसक कर भोजन नली या सांस की नली के और गहराई में चली जाती है, जिससे फेफड़ों या दिल के पास की धमनियों को खतरा हो सकता है.’

मछली खाते समय इन बातों का रखें ख्याल

डॉक्टरों का साफ कहना है कि ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द एंडोस्कोपिक हस्तक्षेप ही सबसे सुरक्षित और सटीक इलाज है. इससे जटिलताओं को समय रहते रोका जा सकता है. मछली खाते समय कई बातों को ध्यान रखना चाहिए. मछली खाते समय बातचीत करने से ध्यान भटक सकता है और हड्डी गले में उतर सकती है. हमेशा मछली के छोटे टुकड़े करके उसे अच्छे से जांच लें. छोटे बच्चों और बुजुर्गों को बिना कांटों वाली मछली देना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है. अक्सर लोग गला फंसने पर सूखा चावल या केला खाने की सलाह देते हैं. डॉक्टरों के अनुसार, कई बार यह हड्डी को और गहराई में धकेल सकता है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना ही बेहतर है.

कुलमिलाकर डॉ. बी.एस.ए. अस्पताल के ईएनटी विभाग ने इस सफल इलाज के जरिए एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों में भी आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मरीजों की सेवा के लिए हमेशा तत्पर है. मरीज ने अस्पताल से छुट्टी मिलते समय डॉक्टरों का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया.

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