चाय या चीनी नहीं… नीरा से बनती है यह चाय, गया में पर्यटकों को खूब भा रही, ऐसे होती तैयार, जानें खासियत
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बोधगया में महाबोधि मंदिर के पास बिकने वाली नीरा चाय पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. इसमें चीनी या गुड़ के बजाय खजूर/ताड़ के नीरा का इस्तेमाल होता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए सुरक्षित है. स्वास्थ्यवर्धक और स्वादिष्ट होने के कारण देसी-विदेशी सैलानी इसे बेहद पसंद कर रहे हैं.
गयाः जब से बिहार में शराबबंदी हुई है, तब से नीरा का सेवन बढ़ गया है. अब नीरा से तरह-तरह की मिठाई भी बनाई जा रहीं हैं. इन दिनों बोधगया में पर्यटन सीजन चल रहा है और विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के ठीक सामने एक चाय का स्टॉल लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है. दरअसल इस चाय स्टॉल पर चीनी और गुड़ नहीं बल्कि नीरा से चाय तैयार की जा रही है और हर वर्ग के लोग उसे पसंद कर रहे हैं. बोधगया प्रखंड क्षेत्र के इलरा गांव के रहने वाले डब्लू कुमार ने यह स्टॉल लगाया है और वह नीरा उत्पादित सामानों की बिक्री करते हैं.
नीरा चाय की खासियत
बोधगया महाबोधि मंदिर के सामने नीरा का इनका स्टॉल है, जहां सिर्फ और सिर्फ नीरा उत्पादित प्रोडक्ट की बिक्री होती है. जिला प्रशासन और बिहार सरकार के द्वारा भी इन्हें काफी सहयोग दिया गया है. नीरा चाय की खासियत है कि इसे डायबिटिक पेशेंट भी पी सकते हैं. इसकी कीमत 15 रुपया प्रति कप है. जिस तरह से हम लोग नॉर्मल चाय बनाते हैं और चीनी या गुड़ का उपयोग करते हैं, इसमें चीनी या गन्ने का गुड का इस्तेमाल न कर दूध में चायपत्ति, इलायची और नीरा या इससे तैयार गुड़ डाला जाता है.
इस चाय को लोग खुब पसंद कर रहे हैं. वहीं, इससे उनके स्वास्थ्य को भी काफी लाभ है. बोधगया घूमने आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों को यह चाय खूब पसंद आ रही है. डब्लू रोजाना 1000-1200 रुपये की चाय बेच लेते हैं. डब्लू बताते हैं कि वह प्रतिदिन 150 लीटर नीरा खरीदते है और उससे गुड़ तैयार करते हैं. चाय में प्रतिदिन 15 लीटर नीरा की खपत हो रही है. नीरा से बनी चाय की बिक्री भी काफी हो रही है. इसे पीने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. डायबिटीज मरीजों के लिए यह वरदान के समान है.
पर्यटक भी कर रहे तारीफ
वहीं, गंगटोक शहर से घुमने आए एक परिवार ने भी नीरा चाय की खूब तारीफ की. इन्होने बताया नीरा के चाय का स्वाद ही लाजवाब है. अब जब भी यहां आएंगे इसका स्वाद जरुर चखेंगे और हो सके तो अपने साथ नीरा भी खरीदकर ले जाएंगे और जो भी जाने पहचाने लोग गंगटोक से बोधगया घूमने आएंगे उन्हें इस स्टाॅल के बारे में जरुर बताएंगे.
बता दें कि जिले में जीविका व अन्य माध्यमों से नीरा बेची जा रही हैं. इससे शराबबंदी को लेकर भी लोगों में जागरूकता आई है. नीरा जो बेहद सेहतमंद रखने वाली और फायदेमंद है, इसका उपयोग अब कई तरह से किया जा रहा है. नीरा ताड़ के पेड़ से सूर्य निकलने से पहले ही निकाली जाती है, जिससे उसमें नशा नहीं होता. गया जिले की बात करें तो सालाना औसतन 20 लाख लीटर नीरा का उत्पादन किया जा रहा है और इसके उत्पादन में 1100 से अधिक टैपर्स जुडे हुए है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.