सिर्फ स्वाद नहीं, सेहत का भी सुपरस्टार…कैसे बनता है सही देसी अचार? जानिए दादी-नानी का आजमाया तरीका – Uttar Pradesh News
Last Updated:
Desi Achar Benefits: दादी-नानी के जमाने में अचार सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि सेहत का हिस्सा माना जाता था. सरसों का तेल, सही मात्रा में नमक और देसी मसालों से बना अचार पाचन को बेहतर रखता था. बिना केमिकल और मिलावट के तैयार किया गया घर का अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहता था. लसौड़ा, मिर्च, लहसुन और कच्चे आम का अचार गट हेल्थ को मजबूत करता है. आज बाजार के अचारों के मुकाबले देसी अचार ज्यादा सेहतमंद और भरोसेमंद माना जाता है.

अचार सिर्फ स्वाद के लिए नहीं खाया जाता है बल्कि, अचार पाचन क्रिया को मजबूत रखता है. पुराने समय में दादी-नानी का ऐसा मानना था कि सही तरीके से बना अचार पेट को मजबूत रखता है. सरसों का तेल, नमक और मसाले मिलकर पाचन को बेहतर बनाते थे. इसलिए दाल-चावल, खिचड़ी या पराठे के साथ थोड़ा-सा अचार जरूर परोसा जाता था. यह खाने का स्वाद भी बढ़ाता था और पेट को हल्का रखता था.

घर पर बनने वाला अचार पूरी साफ-सफाई और सही मौसम में तैयार किया जाता था. इसमें न तो केमिकल होता था और न ही किसी तरह की मिलावट. दादी-नानी धूप, मसालों और तेल का पूरा ध्यान रखती थीं. यही वजह थी कि अचार लंबे समय तक खराब नहीं होता था और सेहत को नुकसान भी नहीं पहुंचाता था. आज के पैकेट वाले अचारों से यह काफी अलग माना जाता है.

अचार में सरसों का तेल सिर्फ स्वाद के लिए नहीं डाला जाता था, बल्कि यह अचार को सुरक्षित रखने का काम भी करता था. तेल की परत अचार को खराब होने से बचाती थी. साथ ही शुद्ध सरसों का तेल पाचन के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. इसी वजह से दादी-नानी अचार में तेल की मात्रा कभी कम नहीं करती थीं.
Add News18 as
Preferred Source on Google

नमक अचार का एक अहम हिस्सा होता है. पुराने समय में नमक की मात्रा बहुत सोच-समझकर डाली जाती थी. नमक बैक्टीरिया और फफूंद को पनपने से रोकता है. यही कारण है कि अचार महीनों तक सुरक्षित रहता था. दादी-नानी जानती थीं कि ज्यादा या कम नमक, दोनों ही अचार को खराब कर सकते हैं.

गर्मियों में मिलने वाला लसौड़ा (गुंदा) अचार के लिए खूब इस्तेमाल होता था. इसे पाचन के लिए अच्छा माना जाता है. लसौड़ा फाइबर और मिनरल्स से भरपूर होता है. दादी-नानी का मानना था कि इसका अचार पेट को ठंडक देता है और खाना आसानी से पचाने में मदद करता है.

मिर्च और लहसुन का अचार खाने में तीखापन तो लाता ही है, साथ ही पाचन भी सुधारता है. लहसुन में मौजूद गुण पेट को साफ रखने में मदद करते हैं, वहीं मिर्च भूख बढ़ाने का काम करती है. यही वजह है कि भारी खाने के साथ थोड़ा तीखा अचार जरूर रखा जाता था.

आज बाजार में मिलने वाले अचारों में प्रिजर्वेटिव और मिलावट आम हो गई है. ऐसे में घर का बना अचार ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. दादी-नानी के तरीके से तैयार अचार न सिर्फ स्वाद में बेहतर होता है, बल्कि गट हेल्थ को भी मजबूत करता है. यही कारण है कि आज भी लोग देसी अचार की ओर लौट रहे हैं.

कच्चे आम का अचार लगभग हर घर में बनाया जाता है. यह स्वाद के साथ-साथ पाचन के लिए भी अच्छा माना जाता है. आम का खट्टापन पेट में जमी गैस और भारीपन को हल्का करता है. दादी के अनुसार, सही तरीके से बना आम का अचार खाने को संतुलित करता है.