Laddu Gopal bathing rituals। लड्डू गोपाल स्नान समय
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Laddu Gopal Snan Niyam: हमारे घरों में जब लड्डू गोपाल आते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे किसी नन्हे बेबी का आगमन हुआ हो. उनका हर दिन प्रेम, सेवा और भक्ति से भरा होना चाहिए. सुबह उठाना, उन्हें स्नान कराना, तैयार करना, भोग लगाना और फिर विश्राम देना-ये सब जिम्मेदारियां बहुत ही भावुक अनुभव देती हैं. कई महिलाएं रोज लड्डू गोपाल की सेवा करती हैं, लेकिन फिर भी उनके मन में एक सवाल हमेशा घूमता रहता है-“लड्डू गोपाल को स्नान कराने का सबसे शुभ समय क्या है?” क्योंकि हम अपने हिसाब से तो सेवा कर लेते हैं, लेकिन शास्त्रीय नियमों के अनुसार अगर समय का ध्यान रखा जाए, तो पूजा और सेवा का फल कई गुना बढ़ जाता है. भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार, सही समय पर किया गया स्नान घर में सुख, शांति और बरकत लाता है. वहीं गलत समय पर स्नान कराने से पूजा का प्रभाव कम हो जाता है.

लड्डू गोपाल का स्नान सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद 8 बजे तक सबसे शुभ माना जाता है. दोपहर और रात का समय पूरी तरह वर्जित है. सही समय, प्रेम और नियम से की गई सेवा घर में सुख, शांति और बरकत लाती है.

1. ब्रह्म मुहूर्त: सबसे शुभ समय (4:00 AM से 6:00 AM) ज्योतिष में ब्रह्म मुहूर्त को देवी-देवताओं की पूजा का सबसे पवित्र समय कहा जाता है. इस वक्त वातावरण शांत रहता है और सकारात्मक ऊर्जा सबसे ज्यादा सक्रिय होती है, अगर आप इस समय लड्डू गोपाल को स्नान कराती हैं, तो ये सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. इससे घर में सकारात्मकता बढ़ती है, मन शांत रहता है और भक्ति में गहरा जुड़ाव महसूस होता है, अगर आपकी दिनचर्या जल्दी उठने की है या आप सुबह पूजा का समय बनाना चाहती हैं, तो यह समय आपके लिए परफेक्ट है. नियमित रूप से इस मुहूर्त में स्नान कराना शुभ फल देता है.

2. सूर्योदय के बाद 8 बजे तक भी ठीक (अगर ब्रह्म मुहूर्त मिस हो जाए) अगर किसी दिन जल्दी उठना मुश्किल हो जाए या किसी वजह से ब्रह्म मुहूर्त में सेवा संभव न हो, तो चिंता की बात नहीं. सूर्योदय के बाद 8 बजे तक का समय भी स्नान के लिए शुभ माना जाता है. इस समय सूर्य प्रकाश के साथ वातावरण में सात्विक ऊर्जा बनी रहती है, जो पूजा के लिए अनुकूल है. ध्यान रखें कि 8 बजे के बाद का समय धीरे-धीरे देवताओं के आराम का समय माना जाता है और इस दौरान स्नान का प्रभाव कम हो सकता है.
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3. दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक स्नान न कराएं कई लोग सुविधा के कारण दोपहर में पूजा और स्नान करते हैं, लेकिन यह समय बिल्कुल उचित नहीं माना जाता. दोपहर 12 से 4 के बीच भगवान के विश्राम का समय होता है. इसी वजह से मंदिरों के कपाट भी बंद रहते हैं. इस दौरान पूजा या स्नान करने से फल प्राप्त नहीं होता और ऊर्जा संतुलित नहीं रहती. कोशिश करें कि किसी भी दिन इस समय स्नान न कराएं, भले ही सुबह का समय मिस हो गया हो.

4. शाम 4 से 5 बजे: बैकअप समय (अगर सुबह सेवा न हो पाई हो) कई बार काम, यात्रा, या सेहत के कारण सुबह स्नान नहीं करा पाते. ऐसी स्थिति में शाम का समय एक विकल्प है. 4 से 5 बजे के बीच स्नान कराना सही माना जाता है. यह समय देवताओं के जागरण का समय माना जाता है और ऊर्जा संतुलित रहती है. हालांकि, यह रोज के लिए आदर्श नहीं है सिर्फ आपात स्थितियों में ही करें.

5. रात में स्नान कराना पूरी तरह वर्जित सूर्यास्त के बाद से लेकर रात तक का समय लड्डू गोपाल के विश्राम का समय माना जाता है. रात में स्नान कराना शास्त्रों के हिसाब से अनुचित है, क्योंकि इस समय वातावरण में तमो गुण बढ़ जाता है, जिससे पूजा का प्रभाव कम हो जाता है. जब भगवान शयन करते हैं, तो उन्हें उठाकर सेवा करना नियम के विरुद्ध माना जाता है. इसलिए इस गलती से बचें.

6. स्नान के पानी का तापमान और सामग्री का ध्यान रखें समय के साथ स्नान की सामग्री भी मायने रखती है. पानी बहुत ठंडा या बहुत गरम न हो, थोड़ा गुनगुना बेहतर माना जाता है. मौसम के हिसाब से तापमान रखें. बहुत ज़्यादा खुशबूदार साबुन या केमिकल युक्त चीजों से बचें. हल्दी, गंगाजल या गुलाबजल की कुछ बूंदें मिलाना शुभ माना जाता है.

7. स्नान के बाद की सेवा भी उतनी ही महत्वपूर्ण स्नान के बाद लड्डू गोपाल के लिए साफ कपड़े, हल्की खुशबू, ताज़ा भोग और शांत मन से पूजा करना सेवा को पूरा करता है. सही समय पर स्नान के बाद जब सही तरीके से पूजा की जाए, तो उसका परिणाम कई गुना बढ़ जाता है. इसे सिर्फ एक रिचुअल न समझें, बल्कि मां-बाप की तरह अपने कान्हा का ध्यान रखने जैसा महसूस करें.