Mangal Raj makes India proud with Guinness record in yoga push ups
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Success Story: मंगल राज ने सीतामढ़ी और बिहार का नाम रोशन किया है. उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स-2025 में दर्ज हुआ है. कठिन योगा पुश-अप्स में रिकॉर्ड बनाकर भारत को गौरवान्वित किया. पर उनकी सफलता आसान नहीं थी. कई बार रिजेक्शन, पिता का निधन और वैवाहिक जीवन टूटने के बाद भी लगातार प्रयास करते रहे.

सीतामढ़ी: जिले के परसौनी प्रखंड के बलहा गांव के लाल मंगल राज ने कमाल कर दिखाया है. स्व. शशिशेखर सिंह और शिक्षिका रागिनी कुमारी के पुत्र मंगल राज ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट इच्छाशक्ति से ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स-2025’ में भारत का नाम दर्ज कराया है. योगा की अत्यंत कठिन श्रेणी में उन्होंने सिर के ऊपर दोनों पैर रखकर एक मिनट में सबसे अधिक पुश-अप्स करने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है. यह उपलब्धि न सिर्फ मंगल राज के व्यक्तिगत जीवन की ऐतिहासिक जीत है, बल्कि सीतामढ़ी जिले और बिहार के लिए भी गर्व का क्षण है. वर्ष 2022 से शुरू हुई उनकी यह चुनौतीपूर्ण यात्रा आज प्रेरणा की मिसाल बन चुकी है.
साल 2022 में जब मंगल राज ने पहली बार गिनीज रिकॉर्ड के लिए प्रयास किया, तब उन्हें सफलता नहीं मिली. हालांकि उसी दौरान लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने उनके ‘हस्त मयूर आसन’ और ‘पद्म मयूर आसन’ को 2023 के संस्करण में स्थान दिया. जिससे उनका हौसला और मजबूत हुआ. लेकिन इसके बाद 2023 और 2024 उनके जीवन में कठिनाइयों का दौर लेकर आए. पिता के निधन और पांच साल पुराने वैवाहिक रिश्ते के टूटने ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया. वे मां को अकेला छोड़कर मुंबई लौटने में भी हिचक रहे थे, लेकिन मां के दृढ़ विश्वास और परिवार के निरंतर उत्साहवर्धन ने उनके भीतर फिर नई ऊर्जा भर दी.
लगातार फेल होने के बाद भी नहीं मानी हार
मंगल ने 2024 में पुनः “Most number of push ups in a minute while both legs above head” टाइटल के लिए प्रयास किया, पर गिनीज के कड़े मानकों पर खरा न उतर पाने के कारण वे डिस्क्वालिफाई हो गए. हार मानने के बजाय उन्होंने इसे चुनौती के रूप में लिया. 2025 में एक बार फिर वही टाइटल चुना. इस बार बेहतर तकनीक, सटीक फॉर्म, वीडियो क्वालिटी और लगातार अभ्यास के साथ उन्होंने खुद को पूरी तरह तैयार किया. मुंबई में अपने दोस्त मनीष के साथ छह महीने की कठोर ट्रेनिंग के बाद 8 दिसंबर 2025 को गिनीज ने उनका टाइटल स्वीकार किया. 10 दिसंबर को आधिकारिक प्रयास हुआ और 16 दिसंबर 2025 को वह पल आया जिसका उन्हें वर्षों से इंतजार था. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने आधिकारिक रूप से उनके रिकॉर्ड को मंजूरी दे दी.
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता को मंगल राज ने अपनी मां, परिवार, मित्रों और खासकर अपनी जन्मभूमि सीतामढ़ी को समर्पित किया है. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य, साहस और निरंतर प्रयास ही व्यक्ति की सच्ची पहचान बनाते हैं. मंगल का मानना है कि हर ‘रिजेक्शन’ अगली सफलता की तैयारी होता है. वे अपने इस रिकॉर्ड को एक पड़ाव बताते हुए कहते हैं कि सफर अभी बाकी है. अब उनका नया लक्ष्य भारत का नाम विश्व पटल पर और बुलंद करना है. मां सीता की कृपा और मां के आशीर्वाद के साथ मंगल राज नए सपनों, नए संकल्प और बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ रहे हैं.
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