क्रिकेट नहीं हॉकी का था गेम, शाहरुख खान को बताया गद्दार, रील लाइफ के किरदार में कैसे छा गए थे किंग खान?
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Shah Rukh Khan KKR IPL Bangladesh Cricketer Mustafizur Rahman Controversy: अब सोशल मीडिया पर बहस तेज है और एक बार फिर शाहरुख खान की देशभक्ति को लेकर सवाल उठाए जाने लगे हैं. बॉलीवुड के सबसे अमीर सेलेब्स की लिस्ट में नंबर वन पर आने वाले किंग खान की देशभक्ति पर उंगली उठाई जा रही है. रियल लाइफ में अपने फैसलों के लेकर वह कई बार विवादों में आए, लेकिन क्या आपको उनका रील लाइफ का वो किरदार याद है, जब उन्हें ‘गद्दार’ कहा गया था.

नई दिल्ली. 2026 का आईपीएल ऑक्शन अभी-अभी खत्म हुआ था और कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के मालिक शाहरुख खान ने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को अपनी टीम में शामिल किया. यह फैसला जैसे ही सामने आया, सोशल मीडिया पर तूफान मच गया. बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के बीच बांग्लादेशी क्रिकेटर को खरीदने को लेकर शाहरुख खान का ऐसा करना किसी को भी रास नहीं आ रहा है.

नेताओं से लेकर धर्मगुरुओं ने शाहरुख खान के खिलाफ बिगुल बजा दिया. विवाद इतना बढ़ा कि शाहरुख को ‘गद्दार’ तक कहा जाने लगा, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब उन्हें ये तमगा हासिल हुआ. रील लाइफ में भी उन्हें ये तमगा मिला और फिर उन्होंने वो कर के दिखाया, जिसको लोगों ने सपने में भी नहीं सोचा था. फोटो साभार-@IMDb

साल 2007 में रिलीज हुई फिल्म ‘चक दे इंडिया’ में शाहरुख खान ने कबीर खान का किरदार निभाया था, जो भारतीय पुरुष हॉकी टीम के पूर्व कप्तान होते हैं. फिल्म की कहानी की शुरुआत ही एक बड़े विवाद से होती है, जब कबीर खान को पाकिस्तान के खिलाफ मैच हारने के बाद देशद्रोही करार दे दिया जाता है. उनका मुस्लिम नाम, उनकी चुप्पी और एक तस्वीर… सब कुछ उन्हें ‘गद्दार’ साबित करने के लिए काफी मान लिया जाता है. फोटो साभार-@IMDb
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यही वह मोड़ था जहां शाहरुख खान की रील लाइफ इमेज ने दर्शकों को झकझोर दिया. कबीर खान देश छोड़ देता है, लेकिन सात साल बाद लौटकर भारतीय महिला हॉकी टीम का कोच बनता है और एक ऐसे सफर पर निकलता है, जो देशभक्ति की परिभाषा ही बदल देता है. फोटो साभार-@IMDb

फिल्म की स्क्रिप्ट जयदीप साहनी ने लिखी, जो असल जिंदगी से प्रेरित थी. मुख्य रूप से यह पूर्व भारतीय हॉकी गोलकीपर मीर रंजन नेगी की जिंदगी से इंस्पायर्ड है. मीर रंजन नेगी 1982 एशियन गेम्स फाइनल में पाकिस्तान से 7-1 की करारी हार के बाद ‘गद्दार’ कहलाए थे. लोगों ने उन पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगाया, क्योंकि वे मुस्लिम थे और पाकिस्तान से मैच हारना संदेह पैदा कर गया. फिल्म में भी शाहरुख का किरदार कबीर खान इसी तरह की ट्रेजडी से गुजरता है.

इसके अलावा, फिल्म भारतीय महिला हॉकी टीम की 2002 कॉमनवेल्थ गेम्स में जीत से भी प्रेरित है, जहां टीम ने कड़े हालातों में गोल्ड मेडल जीता. हालांकि स्क्रीनप्ले फिक्शनल है, लेकिन असल टीम और कोचों की संघर्ष की कहानियां इसमें बुनी गई हैं.

‘चक दे इंडिया’ ऐसे दौर में आई थी, जब भारत में क्रिकेट के अलावा किसी खेल की ज्यादा चर्चा नहीं होती थी. फिल्म ने हॉकी जैसे खेल को मुख्यधारा में ला दिया. ‘सत्तर मिनट’ वाला डायलॉग आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे आइकॉनिक सीन्स में गिना जाता है. शाहरुख खान की संयमित एक्टिंद, न ओवरड्रामा और न ही रोमांस… यही वजह रही कि फिल्म को जबरदस्त सराहना मिली. फोटो साभार-@IMDb

याद है वह सीन जहां कबीर कहता है, ‘मुझे स्टेट्स के नाम न सुनाई देते हैं, न दिखाई देते हैं… सिर्फ एक मुल्क का नाम सुनाई देता है- इंडिया!’ यह डायलॉग आज भी गूंजता है. फिल्म में हॉकी नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद, लिंग समानता और टीमवर्क की बात है. रोमांटिक हीरो से सख्त कोच तक शाहरुख ने इस रोल में अपनी इमेज बदली और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर छा गई. फोटो साभार-@IMDb

चक दे इंडिया 10 अगस्त 2007 को रिलीज हुई थी. यह एक स्पोर्ट्स फिल्म थी जिसका डायरेक्शन शिमित अमीन ने किया था. यशराज फिल्म्स के बैनर तले आदित्य चोपड़ा ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था. गीत भी जयदीप साहनी ने ही लिखे थे. फिल्म का टाइटल सॉन्ग ‘कुछ करिये कुछ करिये….चक दे इंडिया’ नेशनल एंथम बन गया था. फिल्म का बजट करीब 22 करोड़ रुपये रखा गया था. मूवी ने 101 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. 2007 में यह फिल्म सबसे ज्यादा पैसे कमाने के मामले में तीसरे नंबर पर रही थी. यह फिल्म लोगों को इतनी ज्यादा पसंद आई कि इसे आईएमडीबी पर 8.1 रेटिंग मिली हुई है. फोटो साभार-@IMDb

चक दे इंडिया को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर कुल 43 अवॉर्ड मिले थे. 72 में नॉमिनेशन मिला था. फिल्म को नेशनल अवॉर्ड समेत 5 फिल्म फेयर पुरस्कार मिले थे. दिलचस्प बात यह है कि बॉक्स ऑफिस पर चक दे इंडिया का क्लैश सनी देओल की फिल्म ‘काफिला’ से हुआ था. फोटो साभार-@IMDb

अब 2026 के विवाद से जोड़ें तो लगता है, रील और रियल लाइफ में फर्क कम है. शाहरुख को आईपीएल में मुस्तफिजुर को लेने पर ‘गद्दार’ कहा जा रहा है, ठीक वैसे ही जैसे कबीर खान को… लेकिन फिल्म बताती है कि खेल सीमाओं से ऊपर है. मुस्तफिजुर जैसे खिलाड़ी आईपीएल को ग्लोबल बनाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कबीर ने टीम को एकजुट किया. शाहरुख ने रील लाइफ में कबीर बनकर करोड़ों को इंस्पायर किया और रियल लाइफ में केकेआर को चैंपियन बनाया. ‘चक दे इंडिया’ न सिर्फ एक फिल्म है, बल्कि एक मूवमेंट, जो बताता है कि असल राष्ट्रभक्ति मैदान पर जीत से आती है, आरोपों से नहीं.