MQ-9 रीपर ड्रोन: दुनिया का सबसे घातक हंटर-किलर, ताकत और विवाद.

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MQ-9 रीपर दुनिया का सबसे घातक साइलेंट-किलर ड्रोन है जो 50,000 फीट की ऊंचाई से सटीक निशाना लगाता है. यह 27 घंटे लगातार उड़ सकता है और हेलफायर मिसाइलों से लैस है. इसने ईरान के जनरल सुलेमानी और अल-जवाहिरी जैसे खूंखार आतंकियों का खात्मा किया. करीब 300 करोड़ की कीमत वाला यह ड्रोन बिना पायलट के संचालित होता है.

MQ-9 Reaper stratergic importance

आसमान का शिकारी और मारक क्षमता: MQ-9 रीपर दुनिया का सबसे घातक ‘हंटर-किलर’ ड्रोन है, जिसे लंबी दूरी की जासूसी और सटीक हमलों के लिए बनाया गया है. यह 50,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन की हर हरकत पर नजर रखता है. यह ड्रोन 1,700 किलोग्राम से ज्यादा वजन के हथियार ले जा सकता है, जिसमें अत्याधुनिक हेलफायर मिसाइलें और लेजर-गाइडेड बम शामिल हैं, जो इसे बेहद विनाशकारी बनाते हैं.

MQ-9 Reaper features update

बेजोड़ तकनीक और सेंसर सिस्टम: इस ड्रोन में मल्टी-स्पेक्ट्रल टारगेटिंग सिस्टम और इन्फ्रारेड सेंसर लगे हैं, जो घने अंधेरे या बादलों के बीच भी दुश्मन को ढूंढ निकालते हैं. इसका हनीवेल टर्बोप्रॉप इंजन इसे 480 किमी प्रति घंटे की रफ्तार देता है. सबसे बड़ी खूबी इसकी ‘अदृश्य’ रहने की क्षमता है, जिससे यह रडार की नजरों से बचकर चुपके से हमला करने में सक्षम है, जिससे दुश्मन को संभलने का मौका नहीं मिलता.

MQ-9 Reaper war in use

लंबी उड़ान और जीरो रिस्क: यह ड्रोन लगातार 27 घंटे तक हवा में रह सकता है, जो किसी भी मानवयुक्त फाइटर जेट के लिए असंभव है. इसका नियंत्रण हजारों मील दूर बैठे पायलट सैटेलाइट के जरिए करते हैं. इससे युद्ध के दौरान सैनिकों या पायलटों की जान जाने का जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाता है. यह अमेरिका के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ हथियार साबित हुआ है, जो दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर संचालित होता है.

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MQ-9 Reaper Features

ऐतिहासिक मिशन और बड़ी भूमिका: इस ड्रोन ने दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकियों का खात्मा किया है. साल 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी और 2022 में अल-कायदा सरगना अयमान अल-जवाहिरी को खत्म करने में इसी ड्रोन का हाथ था. अफगानिस्तान, इराक और सीरिया के युद्धों में इसने हजारों सफल मिशनों को अंजाम दिया है. आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जंग में रीपर ड्रोन आज अमेरिका का सबसे भरोसेमंद और घातक रणनीतिक हथियार बन चुका है.

MQ-9 Reaper specility

भारी-भरकम कीमत और लागत: एक MQ-9 रीपर यूनिट की कीमत लगभग 32 मिलियन डॉलर (करीब 265 करोड़ रुपये) है. हालांकि, जब इसमें सेंसर, कंट्रोल स्टेशन और सैटेलाइट लिंक सिस्टम जोड़ा जाता है, तो इसकी लागत 100 मिलियन डॉलर के पार पहुंच जाती है. भले ही यह महंगा लगे, लेकिन एक आधुनिक फाइटर जेट की तुलना में इसका रखरखाव और संचालन काफी सस्ता पड़ता है, जिससे कई देश इसे खरीदने की होड़ में लगे हैं.

MQ-9 Reaper cost

नागरिक मौतों पर बढ़ता विवाद: इस ड्रोन की सबसे बड़ी आलोचना ‘कोलेटरल डैमेज’ यानी निर्दोष नागरिकों की मौत को लेकर होती है. कई बार गलत खुफिया जानकारी या तकनीकी चूक के कारण ड्रोन हमलों में बेगुनाह लोग और बच्चे मारे गए हैं. मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि ड्रोन युद्ध ने हत्याओं को ‘वीडियो गेम’ जैसा आसान बना दिया है, जिससे युद्ध की नैतिक जिम्मेदारी और जवाबदेही कम होती जा रही है, जो एक गंभीर विषय है.

MQ-9 Reaper

हैकिंग और भविष्य की चुनौतियां: तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता इसकी कमजोरी भी है. दुश्मन देश सिग्नल जैमिंग या साइबर हमले के जरिए इस ड्रोन को हैक करने की कोशिश कर सकते हैं. 2011 में ईरान द्वारा एक अमेरिकी ड्रोन को सुरक्षित उतार लेने की घटना ने सुरक्षा पर सवाल खड़े किए थे. इसके बावजूद, भारत जैसे देश अब इसके समुद्री वर्जन ‘सी गार्जियन’ को अपना रहे हैं, ताकि हिंद महासागर में चीन की घुसपैठ पर नजर रखी जा सके.

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MQ-9 रीपर: सुलेमानी से जवाहिरी तक, 50000 फीट ऊपर से मौत बांटता है साइलेंट-किलर

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