Board Exams: कल मेरा एग्जाम है और मुझे नींद नहीं आ रही… क्या यह सामान्य है?

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नई दिल्ली (Board Exams Tips). बोर्ड परीक्षा का मौसम आते ही स्टूडेंट्स के बीच एक आम धारणा बन जाती है कि जितना अधिक वे जागेंगे और पढ़ेंगे, उतने ही बेहतर अंक आएंगे. अक्सर छात्र नींद से समझौता कर रात-रात भर सिलेबस पूरा करने की कोशिश में लगे रहते हैं. हालांकि, वैज्ञानिक शोध और एजुकेशन एक्सपर्ट इसके ठीक उलट सलाह देते हैं. दरअसल, नींद केवल शरीर को आराम देने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह दिमाग के लिए ‘डेटा कंसोलिडेशन’ का समय है.

जब छात्र सोते हैं तो उनका मस्तिष्क दिनभर पढ़ी गई जानकारी को शॉर्ट-टर्म मेमोरी से लॉन्ग-टर्म मेमोरी में ट्रांसफर करता है. नींद की कमी सीधे तौर पर Cognitive functions (जैसे ध्यान केंद्रित करना, तर्क करना और याद करने की क्षमता) को प्रभावित करती है. जो छात्र 8 घंटे की अच्छी नींद लेकर परीक्षा देने जाता है, वह उस छात्र की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करता है, जिसने रातभर जागकर पढ़ाई की है लेकिन वह मानसिक रूप से थका हुआ है. बोर्ड परीक्षा की तैयारी के दौरान पर्याप्त नींद लेना मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी है.

अच्छी नींद दिलाएगी अच्छे मार्क्स

रिसर्च के अनुसार, नींद के दौरान हमारा दिमाग न्यूरल कनेक्शन को मजबूत करता है. इसे ‘मेमोरी कंसोलिडेशन’ कहा जाता है. अगर आप परीक्षा से पहले ठीक से नहीं सोते हैं तो याद किया गया कुछ भी दिमाग में ठीक से स्टोर नहीं हो पाता. यही कारण है कि कई बार स्टूडेंट्स परीक्षा हॉल में बैठते ही सब कुछ भूल जाते हैं या ‘ब्लैकआउट’ महसूस करते हैं. नींद दिमाग को साफ करने और नई जानकारी हासिल करने के लिए जगह बनाने का काम करती है.

स्टूडेंट्स को कितने घंटे सोना चाहिए?

विभिन्न आयु वर्ग के छात्रों के लिए नींद की जरूरतें अलग-अलग होती हैं:

  • स्कूली छात्र (13-18 वर्ष): इन्हें कम से कम 8 से 10 घंटे की नींद लेनी चाहिए.
  • कॉलेज के छात्र: इनके लिए 7 से 9 घंटे की नींद अनिवार्य है. परीक्षा के दौरान, यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप कम से कम 7 घंटे की गहरी नींद लें.

इससे प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (दिमाग का वह हिस्सा जो निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार है) एक्टिव रहता है.

कम नींद लेने से क्या परेशानी होती है?

जब छात्र नींद की कमी के शिकार होते हैं तो उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:

  • एकाग्रता में कमी: थका हुआ दिमाग एक ही विषय पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता.
  • चिड़चिड़ापन और तनाव: नींद की कमी से कोर्टिसोल (तनाव हॉर्मोन) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे परीक्षा का डर और बढ़ जाता है.
  • धीमी प्रतिक्रिया: गणित या भौतिकी जैसे विषयों में, जहां तुरंत कैलकुलेशन की जरूरत होती है, नींद की कमी आपके दिमाग की स्पीड कम कर देती है.

बेहतर नींद के लिए ‘स्लीप हाइजीन’ टिप्स

परीक्षा के तनाव के बीच अच्छी नींद लेना मुश्किल हो सकता है, लेकिन इन टिप्स से मदद मिल सकती है:

  • डिजिटल डिटॉक्स: सोने से कम से कम 30-60 मिनट पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बंद कर दें. इनकी ‘ब्लू लाइट’ नींद लाने वाले हॉर्मोन ‘मेलाटोनिन’ को रोकती है.
  • तय समय: हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें. इससे आपके शरीर की जैविक घड़ी (Circadian Rhythm) बनी रहती है.
  • कैफीन से बचें: देर शाम के बाद चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन न करें क्योंकि ये आपकी गहरी नींद में बाधा डालते हैं.
  • पढ़ाई का माहौल: अपने बेड पर बैठकर पढ़ाई न करें. बिस्तर को केवल सोने के लिए रखें वर्ना दिमाग वहां जाते ही आराम की मुद्रा में आ जाएगा.

अंकों की दौड़ में नींद से कॉम्प्रोमाइज करना गलत है. परीक्षा की तैयारी में नींद को अनिवार्य ‘विषय’ के रूप में शामिल करें और अपने रिजल्ट में पॉजिटिव बदलाव देखें.

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