सरकार को इस साल कितना राजकोषीय घाटा? कमाई से कई लाख करोड़ ज्यादा हो रहा खर्चा, राज्यों को भी खुलकर बांटे पैसे
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fiscal Deficit : सरकार ने चालू वित्तवर्ष में नवंबर तक हुए राजघोषीय घाटे का आंकड़ा बताया है. कैग की ओर से जारी इन आंकड़ों के अनुसार, बजट में तय किए गए कुल राजकोषीय घाटे का 62 फीसदी आंकड़ा अब तक पार हो चुका है.
कैग ने राजकोषीय घाटे को लेकर नई रिपोर्ट जारी की है. नई दिल्ली. सरकार ने बुधवार को आंकड़े जारी कर बताया कि उसे चालू वित्तवर्ष में नवंबर तक कितने रुपये का घाटा हुआ है. इस रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा बजट में चालू वित्तवर्ष के लिए तय किए गए कुल लक्ष्य का 62 फीसदी से अधिक पहुंच गया है. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि सरकार पर खर्च का बोझ उसे होने वाली कमाई से ज्यादा बढ़ गया है. देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने हालिया रिपोर्ट में बताया कि सरकार का राजकोषीय घाटा पिछले साल से बढ़ा है.
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा नवंबर के अंत तक 9.76 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह वित्तवर्ष 2025-26 के वार्षिक बजट लक्ष्य का 62.3 फीसदी है. पिछले साल इसी समय यह 52.5 फीसदी था. केंद्र सरकार ने 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा (कमाई और राजस्व के बीच का अंतर) जीडीपी का 4.4 फीसदी यानी 15.69 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान रखा है.
अप्रैल से नवंबर तक कितनी कमाई
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने बताया है कि नवंबर 2025 तक केंद्र सरकार की कुल कमाई 19.49 लाख करोड़ रुपये रही, जो कुल बजट अनुमान का 55.7 फीसदी है. इसमें से 13.94 लाख करोड़ रुपये टैक्स राजस्व के रूप में मिले, जबकि 5.16 लाख करोड़ रुपये गैर-कर राजस्व से प्राप्त हुए और 38,927 करोड़ रुपये गैर-ऋण पूंजी प्राप्तियों के रूप में आए हैं. इस दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को टैक्स में हिस्सेदारी के रूप में 9.36 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर भी किए. यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में 1.24 लाख करोड़ रुपये अधिक है.
सरकार का खर्च कितना
नवंबर तक केंद्र सरकार का कुल खर्च 29.26 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना बजट अनुमान का 57.8 फीसदी है. इसमें से 22.67 लाख करोड़ रुपये राजस्व मद में और 6.58 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत मद में खर्च किए गए हैं. राजस्व खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान का रहा, जिस पर 7.45 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए. इसके अलावा प्रमुख मदों में सब्सिडी पर 2.88 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए. यानी करीब सवा 10 लाख करोड़ रुपये सिर्फ ब्याज और सब्सिडी पर खर्च कर दिए गए.
क्या कहते हैं अर्थशास्त्री
कैग के इन आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि चालू वित्तवर्ष में केंद्र सरकार के सकल कर राजस्व में बजट अनुमान की तुलना में लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये की कमी रहने की संभावना है. उन्होंने कहा कि कर राजस्व में संभावित कमी की भरपाई गैर-कर राजस्व में बेहतर प्रदर्शन और राजस्व खर्च में बचत से हो सकती है. लिहाजा फिलहाल राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से आगे जाने की आशंका नहीं है. इसका मतलब है कि सरकार पर खर्च और कर्ज का बोझ और बढ़ने की आशंका कम है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें