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उत्तराखंड के पहाड़ों पर सर्दियों के दिनों में डेली डाइट में लगभग हर कोई भट्ट की दाल का सेवन करता है क्योंकि भट्ट की दाल केवल भोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान है. कड़कड़ाती ठंड में लोहे की कड़ाही में बनी गरम-गरम चुड़कानी या डुबके शरीर को ऊर्जा और गर्मी देता हैं. 

Bhatt Dal Recipe

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि भट्ट की दाल फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होने के कारण मधुमेह और हृदय रोगों में भी लाभकारी मानी जाती है. आधुनिक समय में भी उत्तराखंडी प्रवासी दुनिया के किसी भी कोने में रहें, भट्ट की दाल का स्वाद उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है. अब रोजाना एक ही तरह की भट्ट की दाल खाकर आप बोर नहीं होंगे आप भट्ट की दाल से कई तरह के व्यंजन तैयार कर सकते हैं. आप इससे भट्ट की चुड़कानी, भट्ट की काफली, भट्ट का जौला, भट्ट के परांठे और भट्ट के डुबके, आदि बनाकर खा सकते हैं.

Bhatt ki Churkani

भट्ट की चुड़कानी कुमाऊं क्षेत्र की सबसे लोकप्रिय डिश है. इसे बनाने के लिए भट्ट के दानों को लोहे की कड़ाही में तेल के साथ तब तक भुना जाता है जब तक कि वे चटकने न लगें. इसके बाद इसमें आटा डालकर भुना जाता है और फिर पानी और पहाड़ी मसालों का मेल किया जाता है.लोहे की कड़ाही में पकने के कारण इसका रंग गहरा काला होता है, जो इसे एक विशिष्ट रूप और आयरन से भरपूर गुण देता है.

Bhatt ke Dubke

डुबके बनाने की विधि चुड़कानी से थोड़ी अलग और अधिक मेहनत वाली है. इसमें भट्ट की दाल को रात भर भिगोकर रखा जाता है और फिर सिल-बट्टे पर बारीक पीस लिया जाता है. इस पिसे हुए पेस्ट को धीमी आंच पर लोहे की कड़ाही में पकाया जाता है. पकने के बाद इसका टेक्सचर स्मूथ और गाढ़ा होता है. इसे अक्सर स्थानीय ‘जम्बू’ या ‘गंद्रेणी’ के तड़के के साथ परोसा जाता है, जो इसकी खुशबू को दोगुना कर देता है.

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bhatt ki dal

यह भट्ट बनाने का सबसे सरल लेकिन सेहतमंद तरीका है. इसमें दाल को सीधे प्रेशर कुकर में उबाल लिया जाता है और फिर लहसुन, अदरक, हरी मिर्च और हींग का तड़का लगाया जाता है.यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो कम तेल-मसाले वाला भोजन पसंद करते हैं. चावल के साथ इस सादी दाल का स्वाद पहाड़ों की सादगी को दर्शाता है. सर्दियों के दिनों में ज्यादातर लोग गर्म चावल पर इसे खाते हैं.

Bhatt ka Jaula

भट्ट जौला एक प्रकार का पहाड़ी ‘खिचड़ी’ व्यंजन है, जिसे अक्सर पेट खराब होने पर या सर्दियों की शाम को हल्के भोजन के रूप में खाया जाता है. इसमें चावल और भट्ट की दाल को एक साथ बहुत अधिक पानी में पकाया जाता है ताकि यह अर्ध-तरल रूप ले ले. इसमें छाछ या दही मिलाकर भी पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद हल्का खट्टा और बहुत ही सुकून देने वाला हो जाता है.

Bhatt ki Kapli

कापली आमतौर पर पालक के साथ बनाई जाती है, लेकिन भट्ट की कापली भी बहुत प्रसिद्ध है.इसमें भट्ट के पेस्ट को पालक या किसी अन्य स्थानीय हरी सब्जी के साथ मिलाकर पकाया जाता है. यह डिश प्रोटीन और विटामिन्स का एक पावरहाउस है. चावल के साथ इसका गाढ़ा ग्रेवी जैसा मेल उत्तराखंड के पारंपरिक ‘ल्यूण’ (पहाड़ी नमक) के साथ बहुत स्वादिष्ट लगता है.

Bhatt dal paratha

इसके अलावा आप भट्ट की दाल को भीगा कर उसे उबालकर उससे परांठे भी तैयार कर सकते हैं. भट्ट की दाल का स्वाद अलग ही है. आधुनिक समय में भी उत्तराखंडी प्रवासी दुनिया के किसी भी कोने में रहें, भट्ट की दाल का स्वाद उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखता है.

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उत्तराखंड की मशहूर भट्ट की दाल से डुबके से लेकर काफ़ली तक बना सकते हैं 5 तरह के पहाड़ी व्यंजन

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