नए साल पर गुड न्‍यूज: क‍िसानों ने ऐसी भरी झोली, चीन भी रह गया पीछे, जानकर आप भी कह उठेंगे वाह

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नए साल की शुरुआत इससे बेहतर नहीं हो सकती. जब हम और आप जश्न में डूबे हैं, तभी भारत के खेतों से एक ऐसी खबर आई है, जिसने हर हिंदुस्तान का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है. यह खबर सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी नहीं है, बल्कि यह भारत के स्वाभिमान, संघर्ष और जीत की एक महागाथा है. भारत अब चावल उत्पादन में चीन को पछाड़कर दुनिया का नंबर 1 देश बन गया है. जी हां, वही चीन जो अब तक कृषि और मैन्‍यूफैक्‍चर‍िंग में दुनिया का सिरमौर माना जाता था, उसे हमारे अन्नदाताओं ने अपनी मेहनत के दम पर पीछे छोड़ दिया है. खुद कृष‍ि मंत्री श‍िवराज सिंह चौहान ने यह खुशखबरी शेयर की है. यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक और भावुक करने वाली है क्योंकि एक वक्त था जब भारत अपनी आबादी का पेट भरने के लिए अमेरिका के जहाजों का इंतजार करता था, और आज वही भारत दुनिया के कुल चावल उत्पादन का 28 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अपने खेतों में उगा रहा है.

आज की युवा पीढ़ी शायद उस दर्द को महसूस न कर पाए, लेकिन हमारे बुजुर्गों की आंखों में वो मंजर आज भी तैरता है. 1960 के दशक की बात है. भारत आजाद तो हो गया था, लेकिन हमारे पास अपने लोगों को खिलाने के लिए पर्याप्त अनाज नहीं था. अकाल और सूखे ने देश की कमर तोड़ दी थी. हालत यह थी कि भारत को अमेरिका के साथ PL-480 समझौते के तहत अनाज मांगना पड़ता था. अमेरिका से जो गेहूं आता था, वह लाल रंग का होता था और अक्सर उसकी गुणवत्ता इतनी खराब होती थी कि उसे वहां जानवरों को खिलाया जाता था. लेकिन भूख से जूझ रहे भारत के पास कोई विकल्प नहीं था. इसे ‘शिप टू माउथ’की स्थिति कहा जाता था यानी जब जहाज बंदरगाह पर आएगा, तभी देश के लोगों के मुंह तक निवाला पहुंचेगा. तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश की नाजुक हालत को देखते हुए देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील की थी. वह भारत की बेबसी का दौर था. दुनिया के कई देशों को लगता था कि भारत कभी अपनी भूख नहीं मिटा पाएगा और बिखर जाएगा.

2026 का भारत… अब हम दुनिया को खिलाते हैं

अब उस ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर को हटाकर आज के रंगीन और समृद्ध भारत को देखिए. आज वही भारत, किसी के आगे हाथ नहीं फैलाता, बल्कि दुनिया का पेट भरता है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्‍स पर ल‍िखा, अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है कि भारत ने चावल उत्पादन में नया कीर्तिमान स्थापित किया है. चीन को पीछे छोड़ते हुए भारत चावल उत्पादन में विश्व का सबसे अग्रणी देश बना है. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि आज दुनिया में चावल की जितनी खेती होती है, उसका 28 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले भारत का है. यानी दुनिया की हर चौथी चावल की थाली में भारतीय चावल की महक है.

चीन को पछाड़ना क्यों है बड़ी बात?

चीन, दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश होने के साथ-साथ कृषि तकनीकों में भी काफी आगे रहा है. दशकों से चावल उत्पादन में चीन का दबदबा था. चीन के पास हाइब्रिड चावल की उन्नत तकनीक और प्रति हेक्टेयर ज्यादा उपज की क्षमता थी. ऐसे में, भारत का चीन से आगे निकलना यह साबित करता है कि अब हम तकनीक और उत्पादन क्षमता में महाशक्तियों को टक्कर दे रहे हैं. यह भारत की फूड स‍िक्‍योरिटी के साथ-साथ खाद्य आत्‍मनिर्भरता की जीत है. अब हमें अपनी शर्तों पर दुनिया से व्यापार करने की ताकत मिल गई है.

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