Public Opinion : “सड़क पर गड्ढे, नालों पर स्लैब नहीं”, गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में रहने वालों का फूटा गुस्सा, “कहां गए 600 करोड़”

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Public Opinion Ghaziabad : गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में बसने वालों को कई सपने दिखाए गए, लेकिन ये इलाका अब सड़क जैसी बुनियादी चीजों की बदहाली से जूझ रहा है. जिस इलाके को कभी आधुनिक आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया था, आज लाखों लोगों की परेशानी का कारण बन चुका है. करीब 60 सोसाइटियों वाले इस इलाके की सड़कें लंबे समय से जर्जर हैं. आए दिन बच्चे और बुजुर्ग गिरकर चोटिल हो रहे हैं. लोकल 18 ने यहां के लोगों से बात की.

गाजियाबाद. दिल्ली से सटे गाजियाबाद का राजनगर एक्सटेंशन, जिसे कभी आधुनिक आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया गया था, आज बदहाल सड़कों की वजह से लाखों लोगों की परेशानी का कारण बन चुका है. करीब 60 सोसाइटियों वाले इस इलाके में लगभग दो लाख से अधिक लोग रहते हैं, लेकिन यहां की आंतरिक सड़कें लंबे समय से जर्जर हालत में हैं. राज गार्डन सोसाइटी रोड और चार्म्स कैसल रोड जैसी प्रमुख सड़कों पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिससे रोजमर्रा की आवाजाही किसी चुनौती से कम नहीं रह गई है. लोकल 18 से बात करते हुए स्थानीय निवासी पुनीत गोयल बताते हैं कि वर्ष 2013 में जब राजनगर एक्सटेंशन में बसावट शुरू हुई थी, तब लोगों को बेहतर सड़कों और मूलभूत सुविधाओं का भरोसा दिलाया गया था. आज हालात ऐसे हैं कि गड्ढों की वजह से कई बार सड़क हादसे हो चुके हैं.

शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं

पुनीत कहते हैं कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए ये रास्ते सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे हैं. बारिश के मौसम में सड़कों पर पानी भर जाता है, जिससे गड्ढे नजर नहीं आते और दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए इन सड़कों पर चलना तक मुश्किल हो गया है. सड़कों के निर्माण के लिए करीब 600 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत होने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक इसका लाभ जमीन पर दिखाई नहीं दिया. गौरव सोनी ने बताया कि खराब सड़कों को लेकर कई बार गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. आए दिन बच्चे और बुजुर्ग गिरकर चोटिल हो रहे हैं, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही.

हालात और बदतर

राकेश कुमार बताते हैं कि हर बार शिकायत करने पर यह आश्वासन दिया जाता है कि जल्द सड़कें बन जाएंगी क्योंकि फंड जारी हो चुका है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी सड़कों की हालत नहीं सुधरी. केवल सड़कें ही नहीं बल्कि सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं की भी भारी कमी है. कई जगह सीवर लाइन नहीं होने से बरसात के दिनों में पानी सड़कों पर भर जाता है और हालात और बदतर हो जाते हैं. स्थानीय निवासी साधना कहती हैं कि वे 2017 से यहां रह रही हैं, लेकिन तब से लेकर अब तक सड़कों में कोई खास सुधार नहीं हुआ. टूटे रास्तों और किनारों पर फैली गंदगी की वजह से आए दिन हादसे होते हैं. प्रशासन जल्द से जल्द सड़कों को ठीक कराए.

क्या बोला प्राधिकरण

दीपांशु मित्तल का कहना है कि कुछ साल पहले बनी सड़कें अब पूरी तरह टूट चुकी हैं. चार्म्स कैसल सोसाइटी के पास 2025 में बनी सड़क भी कुछ ही समय में गड्ढों में तब्दील हो गई. सड़कों के किनारे बने नालों पर स्लैब न होने से खासकर रात के समय दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है. गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र की सड़कों के निर्माण और मरम्मत का काम जारी है. विभाग के अनुसार जल्द ही सभी प्रमुख और आंतरिक सड़कों को गड्ढा-मुक्त कर दिया जाएगा ताकि लोगों को आवाजाही में हो रही परेशानियों से राहत मिल सके.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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