इस्लाम में काफिर किसे कहते हैं और कौन होते हैं काफिर..यहां जानिए इनकी सच्चाई
अलीगढ़: मुस्लिम समाज मे अक्सर आम बातचीत और धार्मिक बहसों में ‘काफ़िर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इसके वास्तविक मतलब और इस्लामी नज़रिये को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां मौजूद हैं. क्या काफ़िर किसी खास समुदाय या मजहब के लिए कहा गया शब्द है या फिर इसका संबंध इंसान के अमल और अल्लाह के आदेशों से है? इस्लामी शिक्षाओं की रोशनी में इस शब्द का सही अर्थ समझना आज के दौर में बेहद ज़रूरी हो गया है. इसलिए लोकल 18 की टीम ने मुस्लिम धर्मगुरु से इस शब्द के बारे में जानकारी हासिल की.
क्या है काफिर का अर्थ
जानकारी देते हुए मुस्लिम धर्मगुरु शाही चीफ मुफ़्ती ऑफ़ उत्तर प्रदेश मौलाना इफराहीम हुसैन ने बताया कि इस्लाम में ‘काफ़िर’ शब्द का इस्तेमाल एक बहुत अहम और संवेदनशील मामले में किया गया है. कुरान के अनुसार अल्लाह ने अपने बंदों के लिए साफ तौर पर आयतें, आदेश और निर्देश नाज़िल किए हैं. जिन लोगों तक अल्लाह के ये हुक्म पहुँचे और उन्होंने जान-बूझकर उनका इंकार किया, उन्हें छिपाया या अपने स्वार्थ के लिए ढक दिया, ऐसी स्थिति को “कुफ्र” कहा गया है, जिससे “काफिर” शब्द बनता है यानी सच्चाई को जानने के बाद भी उसे स्वीकार न करना या निजी फायदे के लिए उसे छुपाना.
कौन कहलाता है काफिर
मौलाना ने बताया कि कुरान मूल रूप से मुसलमानों पर नाज़िल हुई है, इसलिए सबसे पहले इसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं पर आती है. अगर कोई व्यक्ति मुसलमान कहलाता है और कुरान को अपनी किताब मानता है, लेकिन उसके आदेशों पर अमल नहीं करता, नेक कामों को छोड़ देता है और अपने फायदे के लिए गलत कामों को अपनाता है, तो वह अल्लाह की आयतों और आदेशों को छिपाने वालों में शामिल हो जाता है.
ऐसे लोग जो इस्लाम का नाम लेकर अल्लाह के आदेशों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, इंसानियत, सच्चाई और न्याय को नजरअंदाज करते हैं और अपनी जातीय या व्यक्तिगत भलाई के लिए दीन का गलत इस्तेमाल करते हैं वह काफिर कहलाते हैं. ऐसे लोग कुरान की नजर में भी गंभीर अपराध के भागी माने गए हैं. अल्लाह ने ऐसे लोगों के लिए सख़्त चेतावनी दी है और आख़िरत में सज़ा का ज़िक्र किया है.
“काफ़िर” का अर्थ किसी जाति या नाम से नहीं
मौलाना ने कहा कि इस्लाम की शिक्षाओं के मुताबिक “काफ़िर” का अर्थ किसी जाति या नाम से नहीं, बल्कि अल्लाह के आदेशों को जानकर भी उन्हें छिपाने, नकारने और उन पर अमल न करने से जुड़ा हुआ है यानी जिन पर अल्लाह की तरफ़ से हिदायत आई और उन्होंने उसे स्वार्थ के कारण ठुकरा दिया, वही इस दायरे में आते हैं. और काफिर कहलाते है.