Mahabharat Earth Map। महाभारत में पृथ्वी का नक्शा

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Mahabharat Earth Map: आज की दुनिया में हम मोबाइल खोलकर एक क्लिक में पूरी पृथ्वी को देख लेते हैं. गूगल अर्थ हो या अलग-अलग सैटेलाइट तकनीक, हमारी उंगलियों पर दुनिया का नक्शा मौजूद है. स्कूलों में बच्चे छोटे-से ग्लोब को घुमाकर अलग-अलग महाद्वीप पहचान लेते हैं. ऐसा लगता है जैसे तकनीक ने हमें एक नई दृष्टि दी है, जिसमें पूरी दुनिया हमारी हथेली में सिमट गई है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये विचार, ये कॉन्सेप्ट यानी पूरी पृथ्वी को एक यूनिट की तरह देखने की सोच, क्या सिर्फ आज की देन है? या फिर कहीं न कहीं, हमारे पुरातन ग्रंथों में इसका आधार पहले से मौजूद था? अगर हम इतिहास में पीछे जाएं तो पाएंगे कि सिर्फ युद्ध, राज्य और पात्र ही नहीं, हमारे धार्मिक और पौराणिक ग्रंथों में अद्भुत ज्ञान भी छिपा है. ऐसा ज्ञान जो आज के समय में विज्ञान की भाषा में समझ आता है. महाभारत, जो गणेश जी द्वारा लिखित और महर्षि वेदव्यास द्वारा कहा गया, सिर्फ एक कथा नहीं बल्कि महान ज्ञान और दृष्टि का भंडार है. इसी महाभारत में एक ऐसा श्लोक मिलता है, जो हैरान कर देता है क्योंकि इसमें हजारों साल पहले ही पृथ्वी के नक्शे जैसा वर्णन दिया गया है. सोचिए… महाभारत वो काल है जब न सैटेलाइट थे, न ग्लोब, न तकनीक. फिर भी एक श्लोक में पृथ्वी की आकृति का उल्लेख ऐसा मिलता है जैसे किसी ने चांद से नीचे झांककर पृथ्वी को देखा हो. ऐसा कैसे? क्या ये सिर्फ संयोग है या फिर उन ऋषियों के पास सच में कोई अनोखी दृष्टि थी? यही सवाल आज के आर्टिकल का आधार है. हम जानेंगे उस श्लोक के बारे में, उसका अर्थ और ये भी समझेंगे कि आखिर लोग इस श्लोक को पृथ्वी के नक्शे का वर्णन क्यों मानते हैं.

महाभारत के किस श्लोक में बताया गया है पृथ्वी का नक्शा?
महाभारत के भीष्म पर्व में इस रहस्यमय श्लोक का उल्लेख मिलता है. जब महाभारत युद्ध शुरू होने के पहले महाराज धृतराष्ट्र ने संजय से पूछा कि पृथ्वी कैसी दिखती है, तब संजय ने जो जवाब दिया, वही आज चर्चा का विषय है.
श्लोक इस प्रकार है-
“सुदर्शनं प्रवक्ष्यामि द्वीपं तु कुरुनन्दन,
परिमण्डलो महाराज द्वीपोऽसौ चक्रसंस्थितः,
यथा हि पुरुषः पश्येदादर्शे मुखमात्मनः,
एवं सुदर्शनद्वीपो दृश्यते चन्द्रमण्डले,
द्विरंशे पिप्पलस्तत्र द्विरंशे च शशो महान्.”

इस श्लोक का सरल अर्थ कुछ इस तरह समझ आता है-
हे कुरुनंदन, सुदर्शन नाम का यह द्वीप यानी पृथ्वी गोलाकार है. जैसे इंसान शीशे में अपना चेहरा देखता है, उसी तरह यह चंद्रमंडल पर दिखाई देता है. इस द्वीप के चार भाग हैं, जिनमें दो हिस्से पीपल के पत्तों की आकृति जैसे दिखते हैं और बाकी दो हिस्से खरगोश के आकार जैसे दिखाई देते हैं.

क्या सच में इस श्लोक में दुनिया का नक्शा छिपा है?
अगर हम इस श्लोक को इमेजिन करें तो एक गोल पृथ्वी दिखती है, जो अलग-अलग आकार वाले क्षेत्रों में बंटी है. कहा जाता है कि अगर इस वर्णन में बताए आकारों को उल्टा करके देखें तो वह नक्शा पृथ्वी के आधुनिक नक्शे जैसा लगता है. पीपल के पत्ते जैसे हिस्से एशिया और यूरोप के आकार से मेल खाते बताए जाते हैं, जबकि खरगोश जैसे हिस्से अफ्रीका और अमेरिका के रूप में समझे जाते हैं. अब ये दावा कितना वैज्ञानिक है या कितना भावात्मक, ये व्यक्तियों पर निर्भर करता है. कोई इसे संयोग कहता है, कोई इसे ऋषियों की दिव्य दृष्टि. कई विद्वान इसे प्राचीन ज्ञान का प्रमाण बताते हैं. इसी श्लोक का अनुवाद 11वीं सदी में श्री रामानुजाचार्य ने किया, जिसके बाद यह लोगों के सामने और स्पष्ट रूप में आया.

क्या वेदव्यास जी के पास पृथ्वी देखने की कोई विशेष दृष्टि थी?
ये सवाल आज भी चर्चा में है. क्योंकि उस दौर में न कोई अंतरिक्ष यात्रा थी और न पृथ्वी के आकार का वैज्ञानिक प्रमाण. फिर भी महाभारत में पृथ्वी को गोल बताया गया है, जबकि बाद में पश्चिमी वैज्ञानिकों को यह सिद्ध करने में सदियां लगीं. पहले तो लोग मानते ही नहीं थे कि पृथ्वी गोल है, लेकिन हमारे ग्रंथों में ये पहले से कहा जा चुका था. ये बात विज्ञान के हिसाब से चौंकाने वाली है. कई शोधकर्ता मानते हैं कि भारतीय चिंतन में आध्यात्मिक और वैज्ञानिक सोच आपस में जुड़ी थी. यानी ध्यान, साधना और ज्ञान के जरिए व्यक्ति वो देख पाता था जो आम इंसान की नजर सीमित कर देती है. इसे सीधे चमत्कार कह देना भी उचित नहीं और इसे झूठ मान लेना भी सही नहीं. दोनों के बीच में कहीं एक सच छिपा है.

ये सिर्फ एक उदाहरण नहीं है…
हमारे ग्रंथों में सौर मंडल, ग्रहों की गति, सूर्य की परिक्रमा, जल चक्र, गर्भ में शिशु के गठन जैसी बातें पहले से लिखी मिली हैं, जिनकी समानता आज की वैज्ञानिक खोजों से मिलती है. यही कारण है कि दुनिया अब भारतीय ग्रंथों को सिर्फ धर्म नहीं, बल्कि विज्ञान की दृष्टि से भी पढ़ रही है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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