कैपिटल‍ डोम से हिला पाकिस्‍तान, बॉर्डर पर कर दी बड़ी बदमाशी, आर्मी ने लिया ऐसा फैसला, जब चाहे तब आ जाएगी तबाही | capital dome Vajra Sentinel counter unmanned aerial systems CUAS Kartavya Path Pakistan panic Indian army invisible warrior

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Capital Dome: ऑपरेशन सिंदूर में दुश्‍मन देश को कड़ा सबक सिखाया गया. साथ ही इसके कुछ आउटकम भी निकले हैं, जिन्‍हें दुरुस्‍त करने पर लगातार काम चल रहा है. खासकर एयर डिफेंस सिस्‍टम को लेकर न केवल बड़े फैसले लिए गए हैं, बल्कि उसमें हजारों करोड़ का निवेश भी किया जा रहा है. अब इसका असर भी द‍िखने लगा है. राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली को ड्रोन अटैक के खतरे से बचाने के लिए कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी से लैसे एंटी ड्रोन सिस्‍टम इंस्‍टॉल किया गया है. भारत के प्रोजेक्‍ट कैपिटल डोम को लेकर पाकिस्‍तान की धड़कनें बढ़ गई हैं.

कैपिटल‍ डोम से हिला पाकिस्‍तान, बॉर्डर पर कर दी बदमाशी, आर्मी की बड़ी तैयारीCapital Dome: देश की राजधानी दिल्‍ली को किसी भी तरह के ड्रोन अटैक से बचाने के लिए ऐतिहासिक कर्तव्‍य पथ पर मॉडर्न एंटी ड्रोन इंस्‍टॉल किया गया है. (फाइल फोटो)

Capital Dome: डिफेंस सेक्‍टर में भारत लगातार आत्‍मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश को पहली बार रियल टर्म ड्रोन अटैक थ्रेट का सामना करना पड़ा. एरियल थ्रेट से निपटने के लिए भारत अब लगातार इस दिशा में काम कर रहा है. एंटी एयरक्राफ्ट, एंटी मिसाइल से लेकर एंटी ड्रोन सिस्‍टम तक डेवलप किए जा रहे हैं. मिशन सुदर्शन चक्र में लाखों करोड़ रुपये इन्‍वेस्‍ट करने की प्‍लानिंग है. मिशन सुदर्शन चक्र नेशनल एयर डिफेंस प्रोग्राम है, जिसका उद्देश्‍य देश के हर हिस्‍से को किसी भी तरह के हवाई हमले से बचाना है. सुदर्शन चक्र को साल 2035 तक पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया है. इस दिशा में लगातार काम भी चल रहा है. इसी क्रम में देश की राजधानी दिल्‍ली को किसी भी तरह के एरियल अटैक से बचाने के लिए खास एयर डिफेंस सिस्‍टम डिप्‍लॉय करने की तैयारी चल रही है. इस दिशा में पहला और महत्‍वपूर्ण कदम उठाया गया है. ऐतिहासिक कर्तव्‍य पथ पर एंटी ड्रोन सिस्‍टम इंस्‍टॉल किया गया है. मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस स्‍वदेश निर्मित एंटी ड्रोन सिस्‍टम को तैनात किया गया है. यह सिस्‍टम किसी भी तरह के ड्रोन अटैक को न्‍यूट्रालाइज करने में सक्षम है. दूसरी तरफ इंडियन आर्मी ने अपने हर कोर के लिए 8 से 10 हजार ड्रोन की फ्लीट तैयार करने की योजना पर काम कर रही है. भारत के कैपिटल डोम प्रोग्राम और आर्मी की प्‍लानिंग से पाकिस्‍तान में खलबली मची हुई है. इस्‍लामाबाद इस कदर घबराया हुआ है अपनी जनता का पेट काटकर चीन से एंटी ड्रोन खरीदकर उसे जम्‍मू-कश्‍मीर से लगती सीमा पर तैनात किया है.

राजधानी दिल्‍ली की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चेन्नई की रक्षा स्टार्ट-अप कंपनी बिग बैंग बूम सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (BBBS) ने कर्तव्य पथ पर अपना उन्नत वज्र सेंटिनल एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किया है. यह तैनाती ड्रोन जैसे मानवरहित हवाई खतरों से निपटने के लिए की गई है. चेन्नई स्थित यह कंपनी काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) तकनीक में विशेषज्ञ है. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में BBBS को भारतीय वायुसेना और आर्मी से 200 करोड़ रुपये से अधिक का ठेका मिला था. वज्र सेंटिनल सिस्टम दुश्मन ड्रोन को पहचानने, ट्रैक करने और निष्क्रिय करने में सक्षम है. यह DJI Mavic और Phantom जैसे आम तौर पर मिलने वाले ड्रोन को भी बेअसर कर सकता है. इसमें पैसिव RF सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट सिग्नल जैमिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे गलत अलर्ट की संभावना कम होती है. यह सिस्टम किसी भी मौसम और हालात में काम करने के लिए सैन्य मानकों पर खरा उतरा है. इस सिस्टम ने 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमता साबित की थी, जब भारतीय सेना और वायुसेना ने इससे कई विदेशी ड्रोन खतरों को नाकाम किया था. सैनिकों से मिले फीडबैक में इसे देशी और विदेशी विकल्पों से बेहतर बताया गया. कर्तव्य पथ पर इसकी तैनाती सीमा क्षेत्रों से आगे बढ़कर शहरी सुरक्षा में इसके इस्तेमाल का संकेत है. यह कदम आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी रक्षा तकनीक पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है.

आर्मी ने ड्रोन को लेकर बड़ी प्‍लानिंग की है. (फाइल फोटो)

सेना की बड़ी तैयारी

भविष्य के युद्धों की तैयारी को तेज करते हुए भारतीय सेना एक समर्पित ड्रोन फोर्स खड़ी कर रही है. इसके तहत हर कोर में 8,000 से 10,000 ड्रोन तैनात करने की योजना है. सेना का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक हर सैनिक को ड्रोन संचालन का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाए. ड्रोन यूनिट्स को अब सभी आर्म्स और सर्विसेज में शामिल किया जा रहा है. इसके लिए देश के 19 प्रमुख सैन्य संस्थानों में विशेष ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं. इनमें देहरादून की भारतीय सैन्य अकादमी, चेन्नई और गया की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, महू का इन्फैंट्री स्कूल और देओलाली का आर्टिलरी स्कूल शामिल हैं. सैनिकों को नैनो, माइक्रो, स्मॉल और मीडियम श्रेणी के ड्रोन चलाने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जाएगी. इनका उपयोग निगरानी, टोही और हमलावर अभियानों में किया जाएगा. प्रशिक्षण का जोर वास्तविक युद्ध परिस्थितियों में प्रभावी इस्तेमाल पर होगा. सेना स्वदेशी ड्रोन सिस्‍टम्‍स को प्राथमिकता दे रही है. नागास्त्र-1 लोइटरिंग म्यूनिशन को सेना में शामिल किया गया है, जो लक्ष्य पर मंडराकर सटीक हमला करने में सक्षम है. ड्रोन खतरों से निपटने के लिए काउंटर-ड्रोन क्षमता भी मजबूत की जा रही है. D4, सक्षम और भार्गवास्त्र जैसे स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम दुश्मन ड्रोन की पहचान और निष्क्रियता के लिए तैनात किए जा रहे हैं. डीआरडीओ ने लेजर आधारित ड्रोन रोधी प्रणाली भी विकसित की है, जिसकी मारक क्षमता दो किलोमीटर तक है.

थर-थर कांप रहे पाकिस्‍तान के नापाक कदम

कैपिटल डोम और इंडियन आर्मी की तैयारियों ने पाकिस्‍तान के होश उड़ा दिए हैं. आतंकियों को पनाह देने वाला देश अब थर-थर कांप रहा है. इस डर का असर भी देखा जाने लगा है. मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर अपनी ड्रोन-रोधी तैयारियों को तेज किया है. भारतीय खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के रावलाकोट, कोटली और भींबर सेक्टरों में चीन निर्मित और स्वदेशी काउंटर-ड्रोन सिस्टम तैनात किए गए हैं. ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ था, जिसमें भारत ने पाकिस्तान प्रशासित इलाकों में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल और हवाई हमले किए. इस टकराव में दोनों देशों के बीच पहली बार बड़े स्तर पर ड्रोन गतिविधियां देखी गईं. पाकिस्तान द्वारा 10 मई को भेजे गए बिना हथियार वाले ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन को भारतीय बलों ने पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया. पाकिस्तान ने ‘स्पाइडर’ काउंटर-यूएएस सिस्टम को शामिल किया है, जो 10 किलोमीटर से अधिक दूरी पर ड्रोन का पता लगाकर उन्हें जैमिंग और स्पूफिंग के जरिए निष्क्रिय कर सकता है. इसके अलावा, ‘सुफ्रा’ ड्रोन-जैमिंग गन को भी सीमा पर लगाया गया है, जो 1.5 किलोमीटर तक कामिकाज़े ड्रोन को गिराने में सक्षम बताई जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय ड्रोन क्षमताओं की सफलता ने पाकिस्तान को अपनी रक्षा रणनीति बदलने पर मजबूर किया है. यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया में ड्रोन-केंद्रित सैन्य संतुलन की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है, हालांकि इतनी तेजी से तैनाती की प्रभावशीलता और समन्वय पर सवाल भी उठ रहे हैं.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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