जरूरत का 99 फीसदी सोना आयात करता है भारत और 95% कॉपर, बिहारी बाबू ने बताया दोनों में आत्मनिर्भर बनने का प्लान
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Gold and Copper Plan : भारत को सोने और तांबे के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए वैसे तो सरकार कई तरह की पहल पर जोर दे रही है, लेकिन वेदांता प्रमुख अनिल अग्रवाल ने इसका पूरा प्लान बता दिया है.
भारत में सोने और कॉपर का उत्पादन कम और खपत काफी ज्यादा है. नई दिल्ली. भारत कभी सोने की चिडि़या था, ये बात तो हम भारतीयों ने बचपन से हजारों बार सुनी होगी. लेकिन, आज की सच्चाई ये है कि हम अपनी जरूरत का 99.9 फीसदी यानी करीब-करीब 100 फीसदी सोना आयात ही करते हैं. इसका मतलब है कि भारत में सोने का खनन न के बराबर हो रहा है. एक और धातु है कॉपर, इसके लिए भी आज हमारा देश 95 फीसदी तक आयात पर ही निर्भर करता है. लेकिन, बिहारी बाबू यानी वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने इन दोनों ही धातुओं में देश को आत्मनिर्भर बनाने का पूरा प्लान बताया है.
अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डिन पर लिखा कि देश को तांबा और सोने में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की जरूरत है. खासकर मौजूदा खनन परिसंपत्तियों से तांबा और सोने का उत्पादन बढ़ाकर. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि यदि दुनिया थोड़े समय में खनिज उत्पादन बढ़ाना चाहती है, तो इसका एक ही तरीका है. मौजूदा परिसंपत्तियों का पूरा उपयोग करें. नए प्रोजेक्ट्स का उत्पादन शुरू करने में 5 से 10 साल लगते हैं. लिहाजा तत्काल क्षमता बढ़ाने के लिए मौजूदा उपलब्ध संसाधनों पर ही फोकस करना होगा.
भारत के लिए बताया बड़ा प्लान
उन्होंने भारत की भारी आयात निर्भरता को लेकर भी चिंता जताई. कहा अभी जहां लगभग 99.9% सोने और लगभग 95% तांबे की जरूरतें आयात से पूरी होती हैं. बावजूद इसके देश में कई घरेलू परिसंपत्तियों का कम इस्तेमाल हो रहा है या निष्क्रिय हैं. इनमें से कई परिसंपत्तियां सरकारी स्वामित्व में हैं. वर्तमान वैश्विक मूल्य स्तर पर तेजी से उत्पादन बढ़ाने के लिए निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने की जरूरत है. हिम्मत करें, यह आत्मनिर्भरता का सबसे तेज रास्ता है. खनिज उत्पादन बढ़ाना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता माना जाना चाहिए.
क्या है उत्पादन बढ़ाने का तरीका
अग्रवाल ने मौजूदा परिसंपत्तियों से उत्पादन फिर से शुरू करने के लिए निवेश, तकनीक और संचालन विशेषज्ञता की आवश्यकता होने पर जोर दिया है. इसके लिए बस कुछ उद्यमी ऊर्जा, निवेश और तकनीक चाहिए. पूर्व चीनी नेता डेंग जियाओपिंग का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि बिल्ली काली है या सफेद, जब तक वह चूहे पकड़ती है. यह परिणाम केंद्रित, व्यावहारिक दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित करता है. वेदांता प्रमुख की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा संक्रमण के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान बढ़ रहा है.
कैसे मिलेगी सोने में आत्मनिर्भरता
- नई खदान की खोज : भारत में अभी सोने का सालाना उत्पादन महज 1 से 2 टन का है, जबकि खपत 800 से 900 टन की है. सरकार भी खनन को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर बनने का प्लान बना रही है. इसके लिए सोने के ब्लॉक की नीलामी शुरू की जा चुकी है, जिसमें निजी कंपनियां भी निवेश कर रही हैं. इस कड़ी में आंध्र प्रदेश के जोन्नागिरी प्रोजेक्ट को पहली बार किसी निजी कंपनी को सौंपा गया है. पिछले कुछ साल में सोने की नई खदानों की खोज भी लगातार की जा रही है.
- प्रसंस्करण : खदान के साथ सोने की प्रोसेसिंग को भी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. इससे खदान से निकाले गए सोने को निर्यात और इस्तेमाल के लायक बनाया जा सकेगा.
- निवेश और कौशल विकास : भारत को खनन क्षेत्र के लिए साल 2030 तक करीब 57 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है. इसमें वेदांता जैसी निजी कंपनियां बड़े रोल निभा सकती हैं.
- चुनौतियां और समाधान : दुनिया में सोने की कीमतें बढ़ रही हैं और भारत में खदानें बंद हैं. इससे बचने के लिए रॉयल्टी गोल्ड फंड जैसी योजनाओं का प्रस्ताव है, जिसे जल्द शुरू किया जाना चाहिए.
तांबे में आत्मनिर्भरता के लिए क्या रास्ता
- लक्ष्य बनाना : कॉपर यानी तांबे के मामले में भारत की हालत थोड़ी सी ठीक है, लेकिन यहां भी उत्पादन 10 लाख टन है तो खपत इससे 10 गुना ज्यादा. बाकी जरूरत पूरी करने के लिए उसे जापान और चिली पर निर्भर रहना पड़ता है. स्वच्छ ऊर्जा, ई-वाहन और इन्फ्रा सेक्टर में तांबे की जरूरत लगातार बढ़ रही, लेकिन उत्पादन नहीं बढ़ रहा. इसके लिए सरकार ने साल 2030 तक उत्पादन को भी तीन गुना करने का लक्ष्य रखा है. इससे आयात को 40 फीसदी तक घटाया जा सकेगा और साल 2047 तक आयात पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी.
- रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग : कॉपर की रिफाइनिंग बढ़ाने के लिए सरकार नए-नए प्रोजेक्ट ला रही है और प्रोसेसिंग यूनिट भी लगा रही है. थुत्थुकुड़ी में स्टारलाइट प्लांट को ग्रीन कॉपर फ्रेमवर्क के जरिये दोबारा शुरू किया जा रहा है. झारखंड की राखा कॉपर माइंस को भी तकनीकी रूप से अपग्रेड करके उत्पादन बढ़ाने की तैयारी है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें