सर्दी का सुपरफूड, इस लड्डू में चीनी डालने की जरूरत नहीं, शुगर पेशेंट भी खाएं, एक खाने से शरीर रहेगा गरम! – Madhya Pradesh News

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Healthy Laddu Recipe: नए साल पर घर में बघेलखंडी लड्डू बनाकर स्वाद और सेहत दोनों का आनंद लिया जा सकता है. पारंपरिक तरीके से तैयार ये लड्डू स्वाद में लाजवाब होते हैं. ज्वार फाइबर से भरपूर होने के कारण डायबिटीज के मरीज भी इन्हें बेझिझक खा सकते हैं.

Jowar laddu: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में बनने वाला एक लड्डू आज भी पारंपरिक थाली की शान माना जाता है. पीढ़ियों से गांव-देहात में खाया जाने वाला यह मोटे अनाज का लड्डू एक बार फिर शहरी लोगों की डाइट में जगह बना रहा है. खासकर सर्दियों के मौसम में बनने वाला ये लड्डू न केवल शरीर को अंदर से गर्माहट देता है, बल्कि पोषण के लिहाज से किसी सुपरफूड से कम नहीं है. खास बात ये कि इस लड्डू को शुगर पेशेंट भी खा सकते हैं.

विंध्य और बघेलखंड अंचल में ज्वार को जोन्हरी के नाम से जाना जाता है. सफेद और हल्के पीले रंग के छोटे दानों वाला यह मोटा अनाज प्राकृतिक रूप से फाइबर, प्रोटीन, आयरन और कई जरूरी मिनरल्स से भरपूर होता है. बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती बीमारियों के बीच लोग अब वजन घटाने, शुगर कंट्रोल रखने और दिल को स्वस्थ रखने के लिए फिर से मिलेट्स यानी मोटे अनाज की ओर लौट रहे हैं. यही वजह है कि ज्वार से बना लड्डू अब हेल्दी ईटिंग का नया ट्रेंड बनता जा रहा है.

इस लड्डू में इतने गुण
गौ फॉर्म FPO के संचालक आशीष मिश्रा ने लोकल 18 को बताया, बूंदी या मगज के लड्डुओं की तुलना में ज्वार का लड्डू हल्का, आसानी से पचने वाला और लंबे समय तक पेट भरा रखने वाला माना जाता है. इसमें मौजूद उच्च फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और शरीर में कैलोरी की मात्रा को नियंत्रित करता है. ज्वार में शुगर की मात्रा बेहद कम होती है, जबकि आयरन, विटामिन A, B, C और फोलिक एसिड जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यही कारण है कि डायबिटीज के मरीज भी इसे बिना खा सकते हैं.

ऐसे बनेंगे ये लड्डू
आशीष मिश्रा ने बताया कि ज्वार के लड्डू बनाने के लिए ज्वार आटे को अच्छी तरह से भूना जाता है, जब तक उसका रंग हल्का न बदल जाए. इसके बाद उसे ठंडा कर मूंगफली का पेस्ट, देसी घी और ड्राई फ्रूट्स मिलाए जाते हैं. हाथों से बनाए गए ये लड्डू स्वाद में लाजवाब होते हैं और सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद हैं. उन्होंने बताया कि ज्वार में प्राकृतिक मिठास होती है, इसलिए इसमें अतिरिक्त शुगर डालने की जरूरत नहीं पड़ती. चाहें तो गुड़ या किसी अन्य प्राकृतिक मिठास का भी उपयोग किया जा सकता है.

विंध्य क्षेत्र के गांवों में यह लड्डू आज भी बेहद लोकप्रिय है. आसपास के गांवों की महिलाएं इन्हें बनाकर शहरों में बेचती हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी भी मिलती है. नए साल पर अगर आप कुछ पारंपरिक और हेल्दी ट्राई करना चाहते हैं, तो बघेलखंडी ज्वार का लड्डू एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

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सर्दी का सुपरफूड, इस लड्डू में चीनी डालने की जरूरत नहीं, शुगर पेशेंट भी खाएं

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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