दिल्ली: डीएलएफ कैमेलियास में 12 करोड़ की ठगी, मोहित गोगिया गिरोह पकड़ा
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मोहित गोगिया गिरोह ने डीएलएफ कैमेलियास के नाम पर 12 करोड़ की ठगी की, फर्जी दस्तावेज और बैंक नीलामी से कई राज्यों में 200 करोड़ से ज्यादा का संगठित अपराध किया गया.

Crime News: दिल्ली की ठंडी रातों में जब शहर सो रहा था, तब कागजों पर एक ऐसी कहानी रची जा रही थी, जो कई लोगों के सपनों को लूटने वाली थी. गुरुग्राम के आलीशान डीएलएफ कैमेलियास की एक ऐसी प्रॉपर्टी, जो थी ही नहीं, उसी के नाम पर 12 करोड़ रुपये की ठगी का खेल खेला गया. यह कोई मामूली धोखाधड़ी नहीं थी, बल्कि एक संगठित अपराध, जिसमें जाली दस्तावेज, फर्जी बैंक नीलामी और करोड़ों का काला खेल शामिल था.
इस साज़िश का सूत्रधार था मोहित गोगिया. यह एक ऐसा नाम, जो कहने को कारोबारी था, लेकिन अंदर से ठगों की पूरी फौज का सेनापति था. उसके साथ थे ऐसे चेहरे, जो बैंक खातों को हथियार और भरोसे को शिकार बनाते थे. शिकायतकर्ता को दिखाए गए एसबीआई के नीलामी कागज, सेल सर्टिफिकेट और कवरिंग लेटर सब कुछ नकली होता था. लेकिन पेशकश इतनी लुभावनी होती थी कि शक की गुंजाइश ही नहीं बचती थी. आरोपियों ने अगस्त से अक्टूबर 2024 के बीच आरटीजीएस और डिमांड ड्राफ्ट के जरिये 12.04 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए थे.
जब बैंक ने दस्तावेजों को फर्जी बताया, तब कहानी ने खौफनाक मोड़ लिया. क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल हरकत में आई. जांच शुरू हुई और एक-एक बैंक स्टेटमेंट खंगाले गए, खातों की परतें उधेड़ी गईं और पैसों की राह को नक्शे की तरह पढ़ा गया. दिल्ली-एनसीआर से लेकर भोपाल और मुंबई तक दबिशें दी गईं, लेकिन मोहित हर बार हाथ से फिसल जाता. फिर आई 22 नवंबर 2025 की सुबह. तकनीकी निगरानी और मैनुअल इंटेलिजेंस के जरिए पता चला कि मोहित मुंबई से उत्तराखंड की ओर भाग रहा है.
ऋषिकेश–देहरादून रोड पर डोईवाला के पास क्राइम ब्रांच की टीम ने उसकी आज़ादी की कहानी वहीं खत्म कर दी. पूछताछ में परत-दर-परत सच सामने आया. जाली दस्तावेज बनाने से लेकर पैसों को कई खातों में घुमाने तक का पूरा तंत्र सामने आ गया. मोहित के इशारे पर चार और चेहरे बेनकाब हुए. पहले दो नाम थे विशाल मल्होत्रा और सचिन गुलाटी. इन दोनों ने अपने बैंक खातों को मनी लॉन्ड्रिंग की मशीन बना दिया. अभिनव पाठक वह था, जिसने सौदे की पहचान करवाई और अपना हिस्सा पाया. भरत छाबड़ा नाम का चौथा आरोपी जिसके लैपटॉप पर जालसाजी के कागज़ गढ़े गए.
गिरोह का एक और बड़ा नाम राम सिंह उर्फ़ बाबाजी अभी भी फरार है, जो ‘बाबाजी फाइनेंस’ के जरिये पैसों का हाई-इंटरेस्ट खेल चला रहा था. जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह सिर्फ 12 करोड़ तक सीमित नहीं था. डीएलएफ कैमेलियास, एम्बिएंस मॉल और दिल्ली के कई ठिकानों के नाम पर 200 करोड़ से ज्यादा की ठगी कई राज्यों में फैली हुई थी.
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Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें