Is having only one child considered unlucky Know from astrologers | क्या एक ही संतान होना अशुभ माना जाता है? ग्रहों की इन स्थितियों की वजह से बनती है ऐसी स्थिति, ज्योतिषाचार्यों से जानें
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कई लोगों के आपने देखा होगा कि उनकी केवल एक ही संतान होती है. लेकिन कुछ जगहों पर एक बच्चे का होना दोष माना जाता है, माना जाता है कि ऐसे दोष होने से परिवार को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. तो क्या वाकई में एक संतान होना अशुभ माना जाता है. आइए ज्योतिष के माध्यम से जानते हैं इसके पीछे की वजह.

आज के आधुनिक युग में किसी ना किसी चीज को लेकर समाज में कई मान्यताएं और भ्रांतियां प्रचलित हैं. कुछ मान्यताओं में तो यह भी माना जाता है कि अगर किसी दंपत्ति का केवल एक ही बच्चा हो, तो यह अपशगुन होता है और परिवार के लिए अशुभ संकेत समझा जाता है. इसलिए जल्द से जल्द दूसरा बच्चा करना चाहिए, ताकि घर भी पूरा हो सके और अपशगुन हट जाए. गांवों में अक्सर यह चर्चा सुनने को मिलती है कि जिन लोगों के एक बच्चा है, उनको हर विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए, जिससे भगवान खुश हों और ग्रहों की स्थिति शुभ हो जाए. ऐसे में क्या वाकई एक ही बच्चा होना अपशगुन होता है या फिर यह केवल भ्रांतियां हैं? आइए जानते हैं ज्योतिष शास्त्र में इसके पीछे की वजह…

कई दंपत्ति एक ही संतान से संतुष्ट हो रहे हैं. इसका कारण वर्तमान परिवार नियोजन प्रथाएं, सामाजिक परिस्थितियां या उनका व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है. हर कोई आर्थिक स्थिति के हिसाब से जीवन यापन करता है और उसी हिसाब से प्लानिंग भी करता है. ज्योतिषाचार्य गोपाल शर्मा के अनुसार, एक ही संतान होना किसी भी स्थिति में दोष नहीं माना जाता है. यह कहना मात्र एक अंधविश्वास है कि एक पुत्र होना या फिर एक ही पुत्री होने से अधिक दोष उत्पन्न होते हैं. अगर आपकी एक संतान है तो डरने की जरूरत नहीं है, इससे कोई दोष नहीं लगेगा.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की केवल एक ही संतान है और उसके बाद संतान नहीं हो रही है, तो कुंडली में ग्रहों की स्थिति इसका कारण हो सकती हैं. कुंडली में पंचम भाव जन्म स्थान माना जाता है. इस भाव में शत्रु ग्रह जैसे गुरु, केतु या मंगल की उपस्थिति या अशुभ ग्रहों की दृष्टि के कारण संतान प्राप्ति में बाधा आ सकती है.
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अगर राहु या केतु पंचम भाव में मौदूद हों, तो इसे नाग दोष या पुत्र दोष भी कहा जाता है. यह दोष बांझपन या संतान प्राप्ति में देरी का कारण बन सकता है. यद्यपि इन ग्रहों की स्थिति से एक संतान की प्राप्ति हो सकती है, लेकिन यह मान लेना गलत है कि एक संतान होने से उस संतान को कोई हानि होगी या फिर कोई दोष लगेगा.

शास्त्रों में यह बताया गया है कि जिन लोगों को प्रजनन संबंधी समस्याएं या दोष महसूस होते हैं, वे ज्योतिषियों की सलाहानुसार कुछ उपाय कर सकते हैं. नाग देवी को दूध या पंचामृत से अभिषेक करने से नाग दोष या पुत्र दोष की गंभीरता कम हो जाती है. श्रीकालहस्ती जैसे पवित्र स्थानों की यात्रा करना और राहु-केतु शांति पूजा करना शुभ माना जाता है. श्रद्धापूर्वक देवी दुर्गा और भगवान विनायक की पूजा करने से कुंडली में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. नवग्रह मंदिरों में असहाय लोगों को भोजन या वस्त्र दान करने से ग्रहों के दोषों से राहत मिलती है.