कोडिंग, क्राइम और लेडी डॉन: बेंगलुरु के इंजीनियर को हुआ ‘शीलावती’ से प्यार, फिर श्रीलंका तक फैलाया अवैध करोबार
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बेंगलुरु के टेक-इंजीनियर को जब ‘शीलावती’ गांजे से प्यार हुआ, तो उसने लेडी डॉन रेणुका के साथ मिलकर मौत का ग्लोबल नेटवर्क बुन डाला. ओडिशा के जंगलों से गांजा खरीदकर यह गैंग तमिलनाडु के रास्ते श्रीलंका तक सप्लाई कर रहा था. चार राज्यों की पुलिस तब हैरान रह गई जब पता चला कि एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का मास्टरमाइंड है.
पुलिस मामले की जांच कर रही है. दिन में सॉफ्टवेयर कोडिंग और रात में ड्रग्स की लोडिंग! बेंगलुरु के एक नामी टेक-पार्क में बैठकर दुनिया बदलने का दावा करने वाला इंजीनियर जब विशाखापत्तनम की ‘लेडी डॉन’ के संपर्क में आया तो कहानी ने खौफनाक मोड़ ले लिया. उसे कोडिंग से ज्यादा ओडिशा के जंगलों में उगने वाले ‘शीलावती’ गांजे से प्यार हो गया. देखते ही देखते इस हाई-टेक इंजीनियर और शातिर महिला ने मिलकर अपराध का ऐसा ‘सॉफ्टवेयर’ तैयार किया, जिसकी पहुंच भारत के चार राज्यों से लेकर श्रीलंका के समुद्री तटों तक जा पहुंची. जब पुलिस ने इस सिंडिकेट का पर्दाफाश किया तो वे भी दंग रह गए .
अनकापल्ली जिले की नथावरम पुलिस ने एक ऐसे ही हाई-टेक ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त किया है जिसने भारत के चार राज्यों आंध्र प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, तमिलनाडु और पड़ोसी देश श्रीलंका की पुलिस के होश उड़ा दिए हैं. इस गिरोह में इंजीनियर साहब के साथ मुख्य चेहरा बनी 28 वर्षीय गड़े रेणुका जिसे अपराधी जगत में लेडी डॉन कहा जाता है.
कैसे बुना ‘शीलावती’ गांजे का अंतरराष्ट्रीय जाल?
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गड़े रेणुका और उसके साथी सूर्या कालिदास ने नरसीपट्टनम में एक गुप्त ठिकाना किराए पर ले रखा था. इनका काम ओडिशा-आंध्र सीमा (AOB) के जंगलों से ‘शीलावती’ प्रजाति का उच्च गुणवत्ता वाला गांजा इकट्ठा करना था. इस नेटवर्क में बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की एंट्री ने पूरे खेल को ‘कॉर्पोरेट’ रंग दे दिया. इंजीनियर ने अपनी तकनीकी समझ और नेटवर्क का इस्तेमाल कर तस्करी के रूट तय किए. बिचौलिये अडूरी प्रसाद की मदद से यह गैंग ओडिशा के बलिमेला और चित्रकोंडा के आदिवासियों से मात्र 5,000 रुपये प्रति किलो में गांजा खरीदता था. इसके बाद शातिर ड्राइवरों की मदद से इस माल को बेंगलुरु और कोयंबटूर के गोदामों में शिफ्ट किया जाता था.
तमिलनाडु से श्रीलंका तक ‘छोटा पैकेट, बड़ा धमाका’
यह गिरोह केवल थोक तस्करी तक सीमित नहीं था. लेडी डॉन रेणुका ने तमिलनाडु के स्थानीय तस्करों के साथ मिलकर गांजे को छोटे पैकेटों में बेचना शुरू किया. पुलिस के अनुसार यह पहला ऐसा मामला है जहां आंध्र-ओडिशा बॉर्डर का गांजा सीधे समुद्री रास्ते से श्रीलंका भेजा जा रहा था. गिरोह ने राजनगरम हाईवे जंक्शन को अपना मुख्य ट्रांजिट पॉइंट बना रखा था. एक गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए सुगवरम गांव के पास घेराबंदी कर गैंग को दबोच लिया. पुलिस ने मौके से 74 किलो सूखा गांजा, एक कार, दो बाइक और कई मोबाइल फोन जब्त किए हैं. इस गिरफ्तारी ने यह साबित कर दिया है कि अब अपराध की दुनिया में ‘सफेदपोश’ प्रोफेशनल भी शामिल हो रहे हैं, जो ड्रग्स के कारोबार को अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार ले जा रहे हैं.
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पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें