griha pravesh significance। गृह प्रवेश का महत्व
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Vastu Tips 2026: भारतीय संस्कृति में घर सिर्फ रहने की जगह नहीं माना जाता, बल्कि इसे जीवन की दिशा तय करने वाला केंद्र माना गया है. जब कोई व्यक्ति नया घर बनवाता है या नया घर खरीदता है, तो वहां रहने से पहले गृह प्रवेश किया जाता है. यह केवल एक रस्म नहीं होती, बल्कि घर और उसमें रहने वाले लोगों के जीवन के बीच एक ऊर्जा संबंध स्थापित करने की प्रक्रिया मानी जाती है. आज के समय में कई लोग नौकरी, स्थानांतरण, बीमारी या पारिवारिक कारणों से बिना विधि-विधान के घर में रहने लगते हैं. कई बार लोगों को यह भी पता नहीं होता कि गृह प्रवेश क्यों जरूरी है और इसका जीवन पर क्या असर पड़ता है. वेद, पुराण, ज्योतिष और वास्तु में गृह प्रवेश को लेकर गहरी मान्यताएं बताई गई हैं. इन मान्यताओं का मकसद डर पैदा करना नहीं, बल्कि घर को सकारात्मक और शांत बनाना है. वर्ष 2026 को ध्यान में रखते हुए आइए जानते हैं कि गृह प्रवेश का असली मतलब क्या है और इसके पीछे की आध्यात्मिक सोच क्या कहती है.

1. गृह प्रवेश का अर्थ क्या है<br />गृह प्रवेश का मतलब केवल नए घर में कदम रखना नहीं है. इसे घर में सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का तरीका माना गया है. मान्यता है कि जब कोई व्यक्ति पहली बार घर में प्रवेश करता है, उसी समय घर की ऊर्जा उसके जीवन से जुड़ जाती है. इसलिए यह पल बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.

2. वेद और पुराण क्या संकेत देते हैं<br />वेदों में घर को गृहस्थ जीवन की नींव कहा गया है. अथर्ववेद के अनुसार जहां अग्नि, जल और मंत्रों के जरिए शुद्धिकरण किया जाता है, वहां देव शक्तियों का वास माना जाता है. गरुड़ पुराण और स्कंद पुराण में बताया गया है कि सही तरीके से किया गया गृह प्रवेश घर में सुख और समृद्धि बनाए रखता है. बिना संस्कार के घर में प्रवेश करने से मन में बेचैनी और जीवन में रुकावट आ सकती है.

3. आध्यात्मिक नजर से गृह प्रवेश<br />आध्यात्मिक रूप से गृह प्रवेश का संबंध पांच तत्वों से माना गया है.<br />-कलश में जल रखने से जल तत्व संतुलित रहता है<br />-हवन से अग्नि तत्व सक्रिय होता है<br />-दीप जलाने से प्रकाश और ऊर्जा का संचार होता है<br />-मंत्र उच्चारण से वातावरण में सकारात्मक तरंगें फैलती हैं<br />इन क्रियाओं से घर एक शांत और मजबूत ऊर्जा वाला स्थान बनता है.
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4. ज्योतिष में गृह प्रवेश का महत्व<br />ज्योतिष के अनुसार गृह प्रवेश के समय ग्रहों की स्थिति जीवन पर लंबे समय तक असर डालती है. गुरु, शुक्र, बुध और चंद्र की अनुकूल स्थिति शुभ मानी जाती है. मजबूत चंद्रमा मानसिक शांति देता है. वहीं राहु काल, यमगंड या कमजोर चंद्रमा के समय गृह प्रवेश को ठीक नहीं माना जाता. इसी वजह से मुहूर्त देखकर गृह प्रवेश करने की परंपरा चली आ रही है.

5. वास्तु शास्त्र क्या कहता है<br />वास्तु के अनुसार हर घर में एक ऊर्जा क्षेत्र होता है, जिसे वास्तु पुरुष कहा जाता है. गृह प्रवेश से पहले घर का साफ और संतुलित होना जरूरी माना गया है.<br />-मुख्य दरवाजा साफ और रोशनी वाला हो<br />-उत्तर-पूर्व दिशा हल्की और खुली हो<br />-घर पूरी तरह खाली न हो<br />-पहले दिन रसोई का उपयोग जरूर किया जाए<br />माना जाता है कि छोटी सी गलती भी आगे चलकर धन, स्वास्थ्य और मानसिक शांति पर असर डाल सकती है.

6. बिना गृह प्रवेश घर में रहना पड़ा हो तो क्या करें<br />कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि गृह प्रवेश संभव नहीं हो पाता. शास्त्रों में इसके समाधान भी बताए गए हैं.<br />-घर में गंगाजल या साफ जल छिड़कें<br />-मुख्य द्वार पर स्वस्तिक या ॐ बनाएं<br />-दीप जलाकर ईश्वर से मन से क्षमा मांगें<br />बाद में किसी शुभ दिन पर छोटी पूजा, नवग्रह शांति या वास्तु शांति करवाई जा सकती है. पहली रसोई करना भी जरूरी माना गया है.

7. सरल वास्तु उपाय जो रोज किए जा सकते हैं<br />-रोज शाम को दीप जलाएं<br />-उत्तर-पूर्व दिशा में पानी से भरा पात्र रखें<br />-हफ्ते में एक दिन धूप दिखाएं<br />-तुलसी या कोई शुभ पौधा लगाएं<br />इन उपायों से धीरे-धीरे नकारात्मक ऊर्जा कम होती जाती है और घर में शांति बनी रहती है.

गृह प्रवेश भारतीय परंपरा में एक महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है. इसका उद्देश्य घर और परिवार के बीच सकारात्मक ऊर्जा का संबंध बनाना है. यदि सही समय और विधि से किया जाए तो जीवन में सुख, शांति और स्थिरता आती है. मजबूरी में ऐसा न हो पाए, तो सरल उपायों से संतुलन बनाया जा सकता है.