अपनी ही फिल्में फ्लॉप होने की दुआ मांगता था सुपरस्टार, मुमताज को मानता था गुरु, हेमा मालिनी संग दे चुका डिजास्टर
Last Updated:
हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार कहे जाने वाले राजेश खन्ना की जिंदगी जितनी रोशन दिखती थी, उसके पीछे उतना ही गहरा अंधेरा भी था. जिस अभिनेता के नाम पर कभी सिनेमाघर हाउसफुल रहते थे, वही एक दौर में अपनी ही फिल्मों के फ्लॉप होने की कामना करने लगा था. शोहरत की बुलंदियों से गिरावट तक की यही कहानी उनकी फिल्म ‘महबूबा’ के साथ और भी दर्दनाक हो गई.

नई दिल्ली. एक्टिंग की दुनिया में बहुत कम ऐसे स्टार्स हैं, जिन्होंने असली सुपरस्टारडम देखा हो. उन्हीं में से एक थे राजेश खन्ना, जिन्हें लोग प्यार से काका कहते थे. उनकी एक झलक पाने के लिए फैंस कुछ भी कर गुजरते थे. हालात ऐसे थे कि लड़कियां उनके नाम का सिंदूर भरती थीं, और कुछ तो उनकी तस्वीर के साथ शादी तक कर लेती थीं.

राजेश खन्ना की लोकप्रियता को लेकर एक कहावत भी मशहूर हो गई थी. ऊपर आका, नीचे काका. उनका स्टारडम इतना जबरदस्त था कि शूटिंग लोकेशन के बाहर भिखारी भी उनके नाम पर भीख मांगा करते थे.मुमताज संग उनकी जोड़ी काफी हिट थी. मुमताज ने तो इंटरव्यू में बताया था कि वह उन्हें गुरु मानते थे.

अमृतसर में जन्मे राजेश खन्ना ने बहुत कम समय में वो मुकाम हासिल कर लिया था, जिसका सपना हर अभिनेता देखता है. महज तीन साल में उन्होंने 17 हिट फिल्में दीं. डायरेक्टर और प्रोड्यूसर उनके घर के नीचे लाइन लगाकर अपनी स्क्रिप्ट सुनाने खड़े रहते थे. लेकिन हर किसी को काका की हां नहीं मिलती थी.
Add News18 as
Preferred Source on Google

हैरानी की बात ये है कि इतनी शोहरत और दीवानगी के बावजूद राजेश खन्ना खुद इससे परेशान हो गए थे. उनकी लोकप्रियता इस कदर बढ़ गई थी कि एक समय ऐसा भी आया जब वे चाहते थे कि कुछ फिल्में फ्लॉप हो जाएं, ताकि हालात थोड़े काबू में आएं.

लेकिन वक्त कभी एक जैसा नहीं रहता. 1976 और 1977 का दौर राजेश खन्ना के लिए बेहद मुश्किल साबित हुआ. उनकी फिल्में लगातार फ्लॉप होने लगीं. सिनेमाघर खाली रहने लगे और फिल्में अपनी लागत तक नहीं निकाल पा रही थीं.यासिर उस्मान की किताब ‘द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ इंडियाज फर्स्ट सुपरस्टार’ के मुताबिक, लगातार फ्लॉप फिल्मों ने राजेश खन्ना को डिप्रेशन में धकेल दिया था. वे अपने गम को भुलाने के लिए शराब का सहारा लेने लगे थे. हालत इतनी बिगड़ गई थी कि रात में वे अचानक चीखने लगते थे और उनके मन में आत्महत्या के ख्याल आने लगे थे.

किताब में ये भी जिक्र है कि एक समय राजेश खन्ना समंदर में डूबकर जान देने तक की सोचने लगे थे. 1976 और 1977 उनके करियर के सबसे अंधेरे साल साबित हुए.

1976 में हेमा मालिनी के साथ आई उनकी फिल्म ‘महबूबा’ बुरी तरह फ्लॉप हुई. इस फिल्म को उनके करियर की सबसे बड़ी आपदाओं में गिना गया. उसी दौर में अमिताभ बच्चन का एंग्री यंग मैन वाला दौर शुरू हो चुका था.

हालांकि 1971 की फिल्म ‘आनंद’ में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन दोनों नजर आए थे, लेकिन बाद में सारी पॉपुलैरिटी अमिताभ बच्चन के हिस्से चली गई. इसके बाद 1976 में ‘बंडल बाज’ और 1977 में ‘अनुरोध’, ‘त्याग’, ‘कर्म’, ‘छैला बाबू’ और ‘चलता पुर्जा’ रिलीज हुईं. दुर्भाग्य से ये सभी फिल्में फ्लॉप रहीं.