जंगी जहाज बोलके झुनझुना पकड़ा दिया! एर्दोगन ने मुनीर संग कर दिया खेल, 3000 टन वाले PNS खैबर में कितना दम?

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PNS Khaibar: तुर्की ने पाकिस्तान को अत्याधुनिक युद्धपोत PNS खैबर सौंपा है. हालांकि यह भारतीय नौसेना के ब्रह्मोस लैस तलवार क्लास जहाजों के सामने कहीं नहीं ठहरता. खैबर की धीमी हरबाह मिसाइल भारत की सुपरसोनिक रफ्तार का मुकाबला नहीं कर सकती. भारत के पास P-8I पोसीडॉन जैसे समुद्री शिकारी हैं, जो इस जहाज को रडार पर आते ही चुटकियों में तबाह करने की मारक क्षमता रखते हैं.

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जंगी जहाज बोलके झुनझुना दे दिया! एर्दोगन ने कर दिया खेल, PNS खैबर में कितना दमपाकिस्‍तान को दूसरा MILGEM शिप तुर्की से मिली.

नई दिल्‍ली. समंदर की लहरों पर एक नया खिलाड़ी उतरा है, जिसका नाम है PNS खैबर. तुर्की के इस्तांबुल में 20 दिसंबर 2025 को जब तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने इस युद्धपोत की कमान पाकिस्तानी नौसेना को सौंपी तो इस्लामाबाद में जश्न का माहौल था. इसे पाकिस्तान का गेम-चेंजर बताया जा रहा है लेकिन क्या तुर्की की यह तकनीक अरब सागर और हिन्‍द महासागर में भारतीय नौसेना के लौह कवच को भेद पाएगी? हकीकत यह है कि जिसे पाकिस्तान अपना ‘ब्रह्मास्त्र’ समझ रहा है भारतीय नौसेना के पास उसे समंदर की गहराइयों में दफन करने के लिए चंद मिनट ही लगेंगे. चलिए हम आपको विस्‍तार में इसके बारे में बताते हैं.

PNS खैबर: तुर्की की चमक और पाकिस्तान की उम्मीद
PNS खैबर, तुर्की के ‘MILGEM’ प्रोजेक्ट के तहत बना 3,000 टन का एक आधुनिक युद्धपोत है. इसकी खूबियों की बात करें तो यह रडार से बचने वाली स्टेल्थ तकनीक से लैस है. इसमें तुर्की का आधुनिक एडवेंट कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगा है और यह हरबाह जैसी क्रूज मिसाइलें दागने में सक्षम है. सुनने में यह काफी अच्‍छा और आकर्षक लगता है लेकिन जब इसकी तुलना भारतीय नौसेना के दिग्गजों से होती है तो यह चमक फीकी पड़ने लगती है.

किस भारतीय जहाज से है इसकी सीधी टक्कर?
तकनीकी तौर पर PNS खैबर की तुलना भारत के तलवार क्लास (Project 11356) फ्रिगेट्स से की जा सकती है.
• वजन और ताकत: जहां PNS खैबर 3,000 टन का है, वहीं भारत का तलवार क्लास 4,000 टन का भारी-भरकम योद्धा है.
• मारक क्षमता: खैबर की ‘हरबाह’ मिसाइल एक ‘सबसोनिक’ मिसाइल है यानी इसकी गति धीमी है. इसके उलट भारतीय जहाजों पर तैनात ब्रह्मोस (BrahMos) दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक मिसाइल है, जिसे रोकना नामुमकिन है.

कैसे भारत इसे चुटकियों में निपटा सकता है?
भारतीय नौसेना के पास ऐसे तीन तुरुप के इक्के हैं जो PNS खैबर को रडार पर आने से पहले ही खत्म कर सकते हैं:
1. ब्रह्मोस का कहर (The Speed Gap): PNS खैबर का डिफेंस सिस्टम सबसोनिक मिसाइलों को रोकने के लिए बना है. ब्रह्मोस Mach 3 की रफ्तार से आती है. खैबर के कंप्यूटर को खतरे का पता चलने से पहले ही ब्रह्मोस उसके परखच्चे उड़ा देगी.
2. प्रोजेक्ट 17A (नीलगिरी क्लास): भारत के नए नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स (6,700 टन) के सामने PNS खैबर एक खिलौने जैसा है. नीलगिरी क्लास में 32 वर्टिकल लॉन्च मिसाइलें (VLS) हैं, जबकि खैबर में सिर्फ 12-16 सेल हैं. यानी भारत एक साथ इतनी मिसाइलें दाग सकता है कि खैबर का सुरक्षा कवच ओवरलोड होकर फेल हो जाएगा.
3. आसमान से नजर (P-8I पोसीडॉन): भारत के पास P-8I पोसीडॉन जैसे समुद्री शिकारी विमान हैं. ये विमान खैबर के रडार की रेंज से बाहर रहकर उसे ट्रैक कर सकते हैं और समुद्र के बीचों-बीच उसे ‘सिटिंग डक’ (आसान शिकार) बना सकते हैं.

दिखावा ज्यादा, दम कम
PNS खैबर निश्चित रूप से पाकिस्तान के लिए एक तकनीकी सुधार है, लेकिन भारतीय नौसेना की ‘ब्लू वॉटर’ क्षमता के सामने यह बहुत छोटा है. भारत के पास स्वदेशी ‘आईएनएस विशाखापत्तनम’ जैसे विध्वंसक और ‘विक्रांत’ जैसे विमानवाहक पोत हैं जिनके एक इशारे पर PNS खैबर जैसे जहाजों का वजूद खतरे में पड़ सकता है. संक्षेप में तुर्की का यह जहाज पाकिस्तान की तटीय रक्षा तो कर सकता है लेकिन भारत से टकराने की हिम्मत की तो इसका हश्र भी 1971 के ऑपरेशन ट्राइडेंट जैसा ही होगा.

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Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

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